आसमान से बरसी आफतः 54 मरे, कई लापता,नदी-नालों में आया उफान

कई राज्यों में बाढ़ का कोहराम, महाराष्ट्र में 29 और केरल में 22 लोगों की मौत,उत्तराखंड के चमोली और टिहरी में बादल फटा, मलबे में दबने से दो लोगों की मौत, दो लापता

देहरादून/ मुंबई/वायनाड: आसमान से बरस रहे आफत के बादल लोगों पर कहर बनकर टूट रहे हैं। देश में अलग-अलग स्थानों पर बारिश के कहर ने 54 लोगों की जान ले ली और कई के लापता होने के समाचार है। बारिश ने देश में जन जीवन अस्तव्यस्त कर दिया है। लोगांे का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। देश के सभी भागों में इस बार बारिश आफत बनकर बरस रही है।

मुंबई महाराष्ट्र और केरल में बाढ़ का कोहराम जारी है. बाढ़ के कारण अब तक महाराष्ट्र में 29 और केरल में 22 लोगों की मौत हो चुकी हैं. महाराष्ट्र के सांगली में 11, कोल्हापुर में 4, पुणे में 6, सतारा में 7 और सोलापुर में एक लोग की मौत हुई है. वहीं, केरल में 22 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 22 हजार लोग राहत शिविर में पनाह लिए हुए हैं. कर्नाटक में भी बाढ़ ने तबाही मचाई है. यहां पर अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है.

केरल में एनडीआरएफ राहत और बचाव कार्यों में लगी है. बाढ़ के कारण कोच्चि एयरपोर्ट रविवार तक बंद कर दिया गया है. महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा का बड़ा हिस्सा सैलाब के चलते पानी-पानी हो गया है. कर्नाटक के बेलगाम में तीन हेलिकॉप्टर रेस्क्यू मिशन में जुटे हैं. इसके अलावा महाराष्ट्र में नौसेना तो केरल-कर्नाटक में सेना और वायुसेना को बचाव कार्यों में लगाया गया है.

केरल के ईडुकी, वायनाड, कोडिकोड, मल्लापुरम जिले में मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है. केरल में अगले दो दिन तक भारी बारिश का अनुमान है. बाकी कई राज्यों के लिए भी मौसम विभाग ने ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है. एनडीआरएफ की टीमें बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने में जुटी हुई हैं.

बाढ़ से निपटने की तैयारियों को जायजा लेने के लिए केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने हाई लेवल बैठक भी की है. राहत एवं बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की 10 और टीमों को तैनात किया गया है.

केरल में 1385 राहत शिविर बनाए गए हैं. सभी अधिकारियों को बाढ़ की स्थिति पर नजर बनाए रखने को कहा गया है. मौसम के रेड अलर्ट के बीच वायनाड में सेना को उतारने का फैसला लिया गया.

महाराष्ट्र में भी कई नदियों का जल स्तर खतरे का सायरन बजा रहा है, हजारों एकड़ फसल बाढ़ में बर्बाद हो चुकी है. कुछ इलाकों में तो नौसेना को तैनात करना पड़ा है. मुख्य़मंत्री फडणवीस ने हवाई सर्वे किया और जमीनी तबाही का हाल जाना.

महाराष्ट्र में कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है. 150 से ज्यादा गांव का संपर्क अभी भी टूट गया है. हजारों लोग अभी भी पानी में फंसे हैं. एनडीआरएफ की टीम अब तक 3500 लोगों का रेस्क्यू कर चुकी है और लगातार लोगों को रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.

पहाड़ की लाइफ लाइन ठप, प्रशासनिक अमले के छूटे पसीने
देहरादूनः टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग 81 घंटे बाद आज सुबह आवाजाही के लिए खोल दिया गया। यहां धौन में भारी मलबा आने से हाईवे पांच अगस्त की रात 10.28 बजे से बंद था।


इस निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग को आवाजाही के लिए सुचारु करने में पूरे प्रशासनिक अमले के पसीने छूट गए। धौन के पास दोनों तरफ से जेसीबी, पोकलैंड और लोडर होने के बावजूद पहाड़ी की तरफ से बोल्डर और मलबा गिरने से रोड का काम निरंतर नहीं चल पा रहा था। मैदानी क्षेत्र टनकपुर का चंपावत और पिथौरागढ़ से सीधा सड़क संपर्क नहीं हो पा रहा था।


मैदानी क्षेत्र को जाने वाले लोग अब सूखीढांग-डांडा-मीडार या देवीधुरा होते हुए आगे बढ़ रहे थे। पांच अगस्त की रात 10.28 बजे से पहाड़ की इस लाइफ लाइन के बंद होने से मैदान से आने वाली सब्जी की कीमतों में 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो गई। एनएच पर वाहनों का संचालन बंद होने से पेट्रोल पंपों पर भी मार पड़ी। देवीधुरा से रसोई गैस सिलिंडर की आपूर्ति होने से गैस किल्लत नहीं हुई।

गुरुवार को चंपावत के एसडीएम अनिल गर्ब्याल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड के अधिशासी अभियंता एलडी मथैला, सहायक अभियंता वीके सक्सेना, कनिष्ठ अभियंता बीसी जोशी, नीरज श्रीवास्तव, शिवालय कंपनी के निदेशक सुरेंद्र राणा के अलावा त्वरित कार्यवाही दल (क्यूआरटी) के शंकर वर्मा, राजस्व उपनिरीक्षक छत्तर सिंह आदि लगातार मौके पर डटे रहे। रोड खोलने के प्रयास लगातार जारी रहा। मलबा गिरने के बावजूद ऑपरेटर बहादुरी से रोड खोलने में जुटे रहे।

उत्‍तराखंड में बारिश कहर बनकर बरस रही है। बीती रात टिहरी और चमोली जिले में बादल फटने से जनहानि हुई है। टिहरी जिले में मां-बेटे की मलबे में दबने से मौत हो गई, जबकि चमोली में मां-बेटी लापता बताई जा रही हैं। साथ ही कई पुलिया भी बह गए है। सूचना पर पुलिस-प्रशासन की टीम मौके के लिए रवाना हो गई है।

उधर, रुद्रप्रयाग में अगस्‍त्‍यमुनि में भारी बारिश के लोगों के घरों में पानी और मलबा घुस गया। दूसरी ओर, गंगोत्री हाईवे चुंगी बड़ेथी के पास बंद है। वैकल्पिक मार्ग से यातायात सुचारु है। यमुनोत्री हाईवे डाबरकोट व ओरछा बैंड के पास भूस्खलन होने से बंद है, जबकि उत्तरकाशी लंबगांव घनसाली मार्ग धौंतरी कोडार के बीच भूस्खलन होने से बंद है। उधर, राज्य मौसम केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि अगले चार दिनों तक मौसम इसी तरह का बना रहेगा। कुछ स्थानों पर छिटपुट बारिश हो सकती है।

टिहरी में मकान ध्वस्त होने से मां-बेटा जिंदा दफन

टिहरी जिले के भिलंगना ब्लॉक में बीती रात लगभग ढाई बजे भारी बारिश हुई। इससे पट्टी नैलचामी में थार्ती गांव में एक मकान के पीछे मलवा आने से घर पूरी तरह से मलबे में दब गया है। इसमें मां और बेटे की मलबे में दबकर मौत हो गई। मकानी देवी (34 वर्ष) और उसका बेटा सुरजीत (5 वर्ष) मलबे में दब गए। जिससे उनकी मौत हो गई।

मकानी देवी की बेटियां सपना और ईशा घायल है, वहीं मकानी देवी के ससुर शंकर सिंह और सास बच्चन देई भी मलबे में दबने से घायल हैं। मकानी देवी की बेटी सपना को ज्यादा घायल होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि सास और सासुर को पिलखी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दो कमरों का मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। ग्रामीणों ने ही रात को अपने प्रयासों से घायलों को मलबे से निकाला। गांव जाने वाली सड़क भी बंद है, जिससे घायलों को ग्रामीण पैदल ही लेकर अस्पताल पहुंचे।

पट्टी नैलचामी के ठेला गांव के ऊपर भी बादल फटने से ग्रामीणों की सैकड़ों नाली कृषि भूमि साथ ही जखनियाली गांव के श्रीयाल गांव तोक में जाने वाला पैदल पुल भी ध्वस्त हो गया है। इससे ग्रामीणों का संपर्क पूरी तरह से कट गया है। बीती रात से बिजली और मोबाइल सेवा ध्वस्त है।

गदेरा आया उफान पर, मां-बेटी लापता

चमोली जिले के चौकी देवाल ब्‍लॉक के अंतर्गत ग्राम उलनग्रा, तलोर, पदमल्ला, बामन बेरा, फलदिया गांव में देर रात गांव के पीछे जंगल में बादल फटने से उक्त गांव में भारी मलबा आ गया। इससे फल्दिया गांव के बीचों बीच बहने वाला गदेरा (बरसाती नाला) उफान में आने से गांव के पुष्पा देवी (29) पत्नी रमेश राम और ज्योति (5 वर्ष) पुत्री रमेश राम लापता हैं।

वहीं, गांव के 12 मकानों को क्षति पहंची है। साथही छह गाय और एक भैंस के मलबे में दबने की सूचना है। वहीं, अन्य गांवों में भी मकानों एवं खेतों में काफी नुकसान पहुंचा है। पुलिस प्रशासन एसडीआरएफ मौके पर पहुंच गई है। लोगों को आवश्यक सुविधा मुहैया करवाई जा रही है। गांव के 12 परिवारों को गांव के प्राइमरी एवं जूनियर हाईस्कूल में रहने की व्यवस्था करवाई गई है।

अगस्‍त्‍यमुनि में घरों में घुसा पानी

रुद्रप्रयाग जिले में पूरी रात बारिश हुई। इससे अगस्तमुनि में कई घरों में पानी घुस गया। वहीं मंदाकिनी नदी खतरे के निशान पर बह रही है। गौरीकुंड हाईवे तीन स्थानों पर बंद है। केदारनाथ समेत पूरे जनपद में गत रात्रि से जोरदार बारिश जारी है। बारिश के कारण अगस्त्‍यमुनि में देर रात छोटे छोटे कई गदेरे उफान पर बहने लगे।

इससे कई दुकानों व लोगों के घरों में पानी व मलबा घुस गया। बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर 5 मीटर अधिक बढ़कर खतरे के निशान पर बहने लगा है, जबकि अलकनंदा नदी भी खतरे के निशान से मात्र एक मीटर नीचे बह रही है। गौरीकुंड हाईवे बांसवाडा, कुंड और फाटा के पास अवरुद्ध चल रहा है।

अलकनंदा नदी में बाइक सहित बहा युवक
श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर गढ़वाल से लगभग आठ किमी दूर रुद्रप्रयाग की ओर फरासु हनुमान मंदिर के पास अचानक सड़क का पुश्ता टूटने से एक व्‍यक्ति बाइक के साथ लुढ़ककर अलकनंदा नदी के तेज बहाव में गुम हो गया।

नदी में बाइक के साथ लापता हुए इस व्‍यक्ति की अभी कोई पहचान नहीं हो पाई है। लुढ़कता हुआ नीचे गिरे इस व्‍यक्ति को नदी किनारे कुछ समय के लिए एक पत्थर का सहारा लिए भी देखा गया, लेकिन कुछ ही मिनट के अंतराल में वह पत्थर सहित ही बहता हुआ नदी में गुम हो गया। वहां मौजूद कुछ लोगों ने इसका वीडियो भी बनाया।

श्रीकोटगंगानाली पुलिस चौकी से पहुंची पुलिस एसडीआरएफ के साथ खोज में जुटी है। एसआइ पुलिस पंचम सिंह बुटोला ने बताया कि अभी यह पता नहीं चल पाया है कि यह व्‍यक्ति कौन था और कहां का निवासी था। घटनास्थल के पास भूस्खलन के कारण एनएच बंद था, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहन रुके हुए थे।

बताया जा रहा है कि फरासु की ओर खाँखरा से आ रहे एक व्‍यक्ति ने सड़क बंद होने पर अपनी बाइक सड़क किनारे खड़ी कर दी और थोड़ी देर में ही यह व्‍यक्ति उसी बाइक का सहारा लेकर खड़ा हो गया। अचानक पुश्ता ढह गया और बाइक के साथ ही वह व्‍यक्ति भी लुढ़कता हुआ नदी में गम हो गया। उसकी उम्र (30-35) साल बताई जा रही है।

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