भूस्खलन से 112 की मौतें, 50 लोग मलबे में जिंदा दफन

उदय दिनमान डेस्कः केरल में बाढ़ और बारिश से आठ जिले बुरी तरह प्रभावित हैं। सोमवार को राज्य में मरने वालों को आंकड़ा 72 तक पहुंच गया। 58 लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों से ढाई लाख से ज्यादा लोगों को विस्थापित कर 1640 राहत शिविरों में रखा गया है।

दूसरी ओर, कर्नाटक के 17 जिले भी बाढ़ की चपेट में हैं। यहां बीते 12 दिन में 40 लोगों की जान गई, जबकि 14 लोग लापता हैं। मौसम विभाग ने बाढ़ प्रभावित बेलगावी में अगले 5 दिन तक भारी बारिश का अनुमान जताया है।

मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने रविवार को अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने बताया कि 8 अगस्त से लगातार जारी बारिश और बाढ़ में 72 लोग जान गंवा चुके हैं। राज्य में 2500 से ज्यादा घर पूरी तरह बर्बाद हो गए। भारी बारिश के चलते करीब 100 जगहों पर भूस्खलन की घटनाएं हुईं।

रविवार शाम तक मलप्पुरम में 23, कोझिकोड में 17 और वायनाड में 12 और शव बरामद हुए। पलक्कड़ जिले के करीब 10 आदिवासी इलाके का संपर्क टूटने से सैकड़ों लोग बाढ़ में फंसे हुए हैं। केरल में रेलवे ट्रैक पर पेड़ और चट्टान गिरने की वजह से ट्रैफिक पर असर पड़ा है।

निलांबुर और पुथुमाला में 57 लोग अभी मलबे में दफन
कांग्रेस नेता राहुल गांधी बाढ़ का जायजा लेने के लिए अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड पहुंचे हैं। रविवार को उन्होंने मलप्पुरम के निलांबुर का दौरा किया। यहां 8 अगस्त भूस्खलन के बाद 35 घर दब गए। चश्मदीदों का दावा है कि यहां कम से कम 65 लोग जिंदा दफन हो चुके हैं।

एनडीआरएफ रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। निलांबुर में अब तक 11 लोगों के शव मलबे से निकाले गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, 50 लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। वायनाड जिले के पुथुमाला में भी भूस्खलन से 10 लोगों की मौत हुई। यहां 7 लोग लापता हैं।

दूसरी ओर, कर्नाटक के 17 जिले बारिश और बाढ़ में सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। 1 अगस्त से अब तक 40 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 14 लापता हैं। सेना और एनडीआरएफ ने राज्य में 5 लाख 81 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला। सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के लिए 1168 राहत शिविर बनाए हैं।

रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बेलगावी में बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। कर्नाटक सरकार ने मृतकों के परिजन को 5 लाख रु. के मुआवजे का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने बाढ़ को राज्य में 45 साल की सबसे बड़ी आपदा बताया है। उन्होंने केंद्र से 3 हजार करोड़ रु. की मदद मांग की।

पश्चिम प्रशांत महासागर क्षेत्र में उठे दो तूफानों लेकिमा और क्रोसा के कारण देश के दक्षिणी राज्यों में भारी बारिश हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है। उनका कहना है कि पहले पश्चिम प्रशांत महासागर का भारतीय क्षेत्रों पर प्रभाव सीमित था। अब यह हिंद महासागर को डंप यार्ड के तौर पर इस्तेमाल करने लगा है। इसी का असर केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में भारी बारिश के रूप में दिख रहा है।

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