महाशिवरात्रिः: शिवालयों में उमड़ा भक्तों का सैलाब

नई दिल्ली। महाशिवरात्रि (MahaShivratri) हिन्‍दुओं के प्रमुख त्‍योहारों में से एक है। महाशिवरात्रि के अवसर पर पूजा अर्चना करने के लिए देश के कई हिस्सों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ भगवान शिव के मंदिरों में नजर आ रही है। मान्‍यता है कि इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, बेर और भांग चढ़ाने से भक्‍तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उसे महादेव की विशेष कृपा मिलती है।

महाशिवरात्रि के अवसर पर जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में श्री शंकराचार्य जी मंदिर में पूजा करने के लिए भक्तों कतारों में खड़े हैं।महाशिवरात्रि के अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव की पूजा करने के लिए भक्तों की भीड़ देखने को मिल रही है। इस मंदिर में जो गुंबद बनाया गया है वह भी शिवलिंग के आकार का है, जिसकी ऊंचाई 81 फीट और गोलाई भी 81 फीट है।

महाशिवरात्रि के अवसर पर चांदनी चौक के श्री गौरी शंकर मंदिर में भक्त भोले बाबा की पूजा अर्चना कर रहे हैं। चांदनी चौक के गौरी-शंकर मंदिर जहां श्रद्घालुओं की आस्था का केंद्र है, वहीं इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में भी इसका अनूठा रहस्य मिलता है। यहां भगवान शिव का अर्द्घनारीश्वर रूप मिलता है।

महाशिवरात्रि 2020 पर अमृतसर में ‘शिवाला बाग भाईजान’ मंदिर में भक्त बाबा भोलेनाथ की पूजा के लिए लंबी कतारों में खड़े हुए हैं।

मध्य प्रदेश में महाशिवरात्रि के अवसर पर उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान शिव को की अराधना करने के लिए भक्तों की भारी भीड़ लगी हुई है। महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। पुराणों, महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में इस मंदिर का मनोहर वर्णन मिलता है।

महाराष्ट्र में महाशिवरात्रि के मौके पर भगवान भोलेनाथ की पूजा करने के लिए भक्त मुंबई में बाबुलनाथ मंदिर पहुंचे हैं। कर्नाटक में महाशिवरात्रि के अवसर पर कालाबुरागी में ब्रह्म कुमारी के केंद्र में 25 फीट लंबे शिवलिंग को गेंदे के फूलों, नारंगी और भूरे रंग से सजाया हुआ है।

21 तारीख को शाम को 5 बजकर 20 मिनट से 22 फरवरी, शनिवार को शाम सात बजकर 2 मिनट तक रहेगी। महाशिवरात्रि के दिन शुभ काल के दौरान ही महादेव और पार्वती की पूजा की जानी चाहिए तभी इसका फल मिलता है। महाशिवरात्रि पर रात्रि में चार बार शिव पूजन की परंपरा है।

हिंदू धर्म के अनुसार भगवान शिव पर पूजा करते वक्त बिल्वपत्र, शहद, दूध, दही, शक्कर और गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए। ऐसा करने से आपकी सारी समस्याएं दूर होंगी साथ ही मांगी हुई मुराद भी पूरी होगी।

वैसे तो भगवान शिव जल से प्रसन्न होने वाले देव हैं। इसलिए शिव का जलाभिषषेक करने की परंपरा है, लेकिन विभिन्न रस पदार्थो से शिव का अभिषषेक करने से मनुष्य को धन, भूमि, ऐश्वर्य आदि की प्राप्ति भी होती है।

गन्ने के रस से अभिषषेक करने पर धन की प्राप्ति
शहद से अभिषषेक करने पर ऐश्वर्य की प्राप्ति
नारंगी के रस से अभिषषेक करने पर नवग्रहों की अनुकूलता
अंगूर के रस से अभिषषेक करने पर भूमि की प्राप्ति
नारियल पानी से अभिषषेक करने पर आकस्मिक धन लाभ

वर्ष में शरद पूर्णिमा, दीपावली, होली तथा महाशिवरात्रि की रात साधना की सिद्धि के लिए विशेषष मानी गई है। शिवतंत्र में वैदिक उपासकों का अपना महत्व है। महाशिवरात्रि में वैदिक तंत्र की साधना विशेषष फल प्रदान करने वाली मानी गई है। यदि अपर रात्रि से ब्रह्म मुहूर्त के मध्य ध्यान साधना से स्तवन किया जाए तो साक्षात शिव की प्राप्ति होती है।

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