दुर्लभ नजारा: रेगिस्तान ने 100 साल बाद ओढ़ी बर्फ की चादर

इराक: इराक में मौसम में अचानक हुए बदलाव ने राजधानी बगदाद समेत आसपास के इलाकों की तस्वीर बदल दी है। बगदाद में यह दुर्लभ नजारा करीब 100 साल बाद देखने को मिला है। कह सकते हैं कि जिन लोगों ने बगदाद को बर्फ की चादर में लिपटा देखा उनके लिए यह दुर्लभ है।

राजधानी वासियों को मंगलवार सुबह दूर-दूर तक सफेद बर्फ से ढकी जमीन दिखाई दी। खूबसूरत नजारा देख लोगों के चेहरे खिल गए, लोग बर्फ के साथ तस्वीरें लेने लगे। बर्फ की सफेद चादर बगदाद समेत कई शहरों के अलावा शिया समुदाय के पवित्र शहर कर्बला में भी देखी जा सकती है।


बताया जा रहा है कि इससे पहले ऐसा नजारा 1914 में दिखा था। वर्ल्ड मेट्रोलोजिकल डिपार्टमेंट के मुताबिक इराक में फरवरी में बर्फ गिरना दुर्लभ है। मौसम में अचानक बदलाव यूरोप में तूफान और बर्फीली हवाओं के कारण हुआ है।

हालांकि, इससे पहले 2008 में भी बर्फबारी हुई थी, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में नहीं हुई थी। आमतौर पर इराक में भीषण गर्मी का प्रकोप रहता है। हाल के वर्षों में गर्मी में बगदाद का तापमान 51 डिग्री सेल्सियस तक चला गया था।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक समुद्र का तापमान कनेक्टिव सिस्टम को प्रभावित करता है। पिछले कुछ सालों में जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में बढ़ोतरी हुई है। इसका असर साफ दिखने लगा है।

2018 में भी इसी वजह से मौसम में असमानता आई थी और सूखा पड़ा था और अगले साल भारी बारिश और बाढ़ ने घरों और फसलों को तबाह कर दिया था। लेकिन इस साल की शुरुआत से ही मौसम ने अलग रंग दिखाने शुरू कर दिए हैं।

सदी में दूसरी बार यह दुर्लभ नजारा देखने को मिला है। यहां पर 48 घंटे में चार इंच से ज्यादा बर्फबारी हुई है। बर्फबारी की वजह से तापमान गिरकर पांच डिग्री पर पहुंच गया। इससे पहले इतनी ज्यादा मात्रा में बर्फबारी 1914 में हुई थी।

बर्फ की सफेद चादर राजधानी समेत शिया समुदाय के पवित्र शहर कर्बला और मोसुल में भी दिखाई दी। मौसम विभाग के मुताबिक बर्फबारी उत्तरी इराक में सामान्य है, लेकिन मध्य और दक्षिणी इराक में यह दुर्लभ है।

विश्व का एक प्रमुख नगर एवं ईराक की राजधानी है। इसका नाम ६०० ईपू के बाबिल के राजा बागदाद पर पड़ा है। यह नगर 4,000 वर्ष पहले पश्चिमी यूरोप और सुदूर पूर्व के देशों के बीच, समुद्री मार्ग के आविष्कार के पहले कारवाँ मार्ग का प्रसिद्ध केंद्र था तथा नदी के किनारे इसकी स्थिति व्यापारिक महत्व रखती थी।

मेसोपोटामिया के उपजाऊ भाग में स्थित बगदाद वास्तव में शांति और समृद्धि का केंद्र था। 9वीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों में यह अपने चरमोत्कर्ष पर था। उस समय यहाँ प्रबुद्ध खलीफा की छत्रछाया में धनी व्यापारी एवं विद्वान लोग फले-फूले। रेशमी वस्त्र एवं विशाल खपरैल के भवनों के लिए प्रसिद्ध बगदाद इस्लाम धर्म का केंद्र रहा है। यहाँ का औसत ताप लगभग 23 डिग्री सें. तथा वार्षिक वर्षा सात इंच हैं, अत: यहाँ खजूर तथा झाड़ियों के कुंज अधिक मिलते हैं।

बगदाद का वास्तविक पतन 1258 ई. में शुरु होता है, जब हलाकू नामक मंगोल ने मेसोपोटेमिया पर अधिकार कर इस्लामी सभ्यता को नष्ट कर दिया। इसने धीरे-धीरे सिंचाई प्रणाली को भी छिन्न-भिन्न करके उपजाऊ कृषिक्षेत्र को स्टेप्स या घास के मैदान में परिवर्तित कर दिया। इस काल से लेकर प्रारंभिक 20वीं शताब्दी तक के कुछ समय को छोड़कर बगदाद कभी भी स्वतंत्र राजधानी नहीं रहा है।

यहाँ हिनैदी में एक बहुत बड़ा हवाई अड्डा बनाया गया जिससे काहिरा एवं बसरा संबद्ध थे। बाद में इसका इंग्लैंड, भारत और सुदूर पूर्व से भी वायुसंबंध हो गया। वर्तमान समय में संसार की सभी प्रमुख वायुसेवाएँ यहाँ से होकर जाती हैं।

तुर्की तक रेलमार्ग बन जाने से इसका संपर्क सीधे भूमध्यसागर से हो गया। इस प्रकार आवागमन के साधनों के विकास के कारण 20वीं शताब्दी में बगदाद पुन: अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा प्राप्त कर मध्य पूर्व का प्रसिद्ध नगर हो गया। यहाँ से दरियों, ऊन, गोंद, खजूर और पशुचर्म का निर्यात तथा कपास और चाय का आयात करके पुनर्निर्यात करते हैं।

यहाँ चिकित्सा, कला, कानून, इंजीनियरिंग, सैन्यशास्त्र आदि की शिक्षा का उचित प्रबंध है। यहाँ प्रसिद्ध पुरातत्व संग्रहालय है। नगर के पुराने भाग में मिट्टी के मकान, पतली तथा धूल भरी सड़कें देखने को मिलती हैं। आधुनिक भाग दर्शनीय है। यहाँ सुंदर सुंदर मसजिदें एवं बाजार हैं।

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