‘जख्मी’ सड़कों पर ‘मौत का सफर’ और सरकारी ‘जुर्माना’

संतोष ‘सप्तांशु’
देहरादून।
गूगल युग में सोशल मीडिया वह पैनी तलवार बन चुका है, जिससे सत्ता तक डगमगाने लग गयी हैं। यह सब होने के बाद भी देश में नौकरशाह बदलने को तैयार नहीं हैं। देश में हालिया नया मोटर अधिनियम के तहत बने नियमों का पालन करवाने के लिए नौकरशाह किसी भी हद तक जाने को तैयार हो गए हैं। क्योंकि इससे वह जनता के बीच अपना खौफ बनाने में कामयाब हो रहे हैं, जबकि देश की हकीकत को आमजन अच्छी तरह से जानता है।

हाल ही में सरकार ने नये नियम लागू करने के लिए जिस प्रकार तत्परता दिखाई वह किसी के गले नहीं उतर रहा है। क्योंकि हकीकत तो यह है कि जिन सड़कों पर चलने वाले वाहनों के लिए यह नियम बनाये गए है वह सड़कें तो लंबे समय से जख्मी है और यह जख्म न तो सरकार को दिखते हैं और न नौकरशाहों को। क्योंकि उन्हें तो अपनी बादशाहत कायम रखनी है। जनता चाहे जख्मी सड़कों पर मौत का सफर ही क्यों तय न कर रहे हों। सरकार को अपने खजाने की चिंता है और नौकरशाहों को अपनी जेबों की। जनता का पूछनहार तो कोई नहीं है, मजबूरन जनता जख्मी सड़कों पर मौत के सफर पर निकलने को मजबूर हैं।

देश में सड़कों की क्या स्थिति है यह किसी से नहीं छूपी है। सरकार, हमारे भाग्य विधाता और नौकरशाह सभी मजे में हैं। वह भी आमजन के साथ हमेशा जख्मी सड़कों पर मौत का सफर तय करते हैं। इसके बाद भी इनके कान में जू तक नहीं रेंगती। सरकारी आंकड़ों में तो देश की सड़कें यूरोप से भी बेहतर है। फिर सत्ता में बैठे हमारे भाग्यविधाता और नौकरशाहों को जनता की फिक्र क्यों होगी। आंकड़ों में तो सभी जगह सड़कें सीसे जैसी चमकने के साथ-साथ गड्ढे मुक्त होने के साथ बहुत की सुंदर है। ऐसे में जनता के लिए बने मोटर अधिनियम का जनता पालन नहीं कर रही है तो उस पर सरकार जुर्माना तो लगना ही चाहिए।

अगर ऐसा होता है तो कुछ सरकारी खजाने और कुछ अपनी जेबों में तो आ ही जाएगा। यह सोचना हमारे देश के नौकरशाहों का है, ऐसा जनता मानती है। अब अगर बात देश की सड़कों की करें तो आज के गूगल युग में सोशल साइटों पर हजारों तस्वीरें और वीडियों आपको दिखाई देंगे जो देश में सड़कों की हकीकत को बयां कर रहे है। ऐसे में सरकारी जुर्मानें पर आम जनता की बौखलाहट तो लाजमी है।


अकेले उत्तराखंड की बात करें तो यहां सड़क हादसों की अधिसंख्य वजह जख्मी सड़कें है, लेकिन सरकार और नौकरशाह मानने को तैयार नहीं। राज्य के पहाड़ी जनपदों में अभी तक हुई दुर्घटनाओं का कारण सड़क की दयनीय स्थिति है। इस बारे में जनता कई बार अपने भाग्यविधाताओं को बताने के साथ-साथ इसका विरोध भी कर चुकी है कि इन सड़कों के जख्मों को ठीक किया जाए। लेकिन सरकार के कान में जू तक नहीं रेंगती और नौकरशाह हैं कि उन्हें फाइलों में जब सबकुछ ठीक दिख रहा है तो जनता की कौन सुने। वह तो चिल्लाती रहती है, उसे मिले या ना मिले उसका काम तो चिल्लाने का है।

अब आपको सूबे की अस्थाई अर्थात अघोषित स्थाई राजधानी की हकीकत से रूबरू करवाते हैं। देहरादून में सचिवालय से लेकर विधानसभा और हमारे नीति नियंता से लेकर हमारे पालनहार। सभी यहां एसी कमरों और एसी हाईटेक गाड़ियों में घूमते हैं। भाग्यविधाताओं और नौकरशाहों के पास तो हाईटेक वाहन हैं जो चलते तो उन्हीं जख्मी सड़कों पर है जहां आमजन रोज चलती है। आमजन तो इन सड़कों पर मौत का सफर तय कर रही है, लेकिन नेता और अफसरों की ऐसी हाईटेक गाडियां है कि उनमें सड़क के गड्ढों का आभास ही नहीं होता है। इसलिए तो उन्हें यह दिखते नहीं हैं। दून कहने को तो अस्थाई राजधानी है और यहां की सड़कें कागजों में चकाचक है, पर हकीकत आप देखेंगे तो आप भी चैक जाएंगे। दून की कोई भी वीवीआईपी सड़क हो या फिर आम सड़क सभी पर गड्ढे आम है और लोग इनमें नित्य जख्मी हो रहे हैं।


कुछ दिनों पूर्व कारगी से पटेलनगर मार्ग के जख्मों को भरने का कार्य हुआ। उसके अगले दिन फिर बारिश हुई और सड़क फिर जख्मी हो गयी। अब इस मार्ग को फिर एक ही सप्ताह में ठीक तो नहीं किया जा सकता है। क्योंकि जब मार्ग को ठीक करके फाइल प्रशासन से होकर शासन तक पहुंचेगी तब तक तो इसे ठीक नहीं किया जा सकता है। क्योंकि बजट तो शासन से ही पास होना है और अगर ऐसा कहा जाएगा कि सड़क फिर खराब हो गयी तो दिक्कतें आ जाएगी। क्योंकि फाइल में तो सड़क चकाचक हो गयी है, जबकि हकीकत क्या है यह किसी से छुपी नहीं है। यह तो अकेले एक सड़क की बात है। दून की हर सड़क का यही हाल है। चाहे वह सचिवालय रोड़ हो या फिर विधानसभा या फिर अन्य कोई भी सड़क। दून की सभी सड़कें जख्मी है पर फाइलों में नहीं हकीकत में। लेकिन प्रशासन और शासन की बिडंबना है कि जब तक फाइल में मार्ग चकाचक है तब तक हकीकत को नहीं देखा जा सकता है। फाइल पास होने के बाद देखा जा सकता है।

हालिया नये मोटर अधिनियम के तहत सरकार द्वारा तय किए गए जुर्माने को लेकर तैयारियों में नौकरशाह व्यस्त है। क्योंकि इससे उनकी जेबों में भी कुछ माल आएगा। देश की जनता तो सुधरेगी नहीं और नौकरशाहों से डरेगी ही। क्योंकि पुलिससियां खौफ दिखाकर सड़क पर खुलेआम वसूली करने पर कोई रोकने और टोकने वाला नहीं है। हां डर अवश्य है कि अगर जनता जाग गयी तो फिर समस्या पैदा हो जाएगी। फिलहाल जनता जागने वाली नहीं है। वह सोशल मीडिया पर ही अपनी भडास निकालेगी।

कारगी-पटेलनगर रोडः दो किमी पर दो सौ जख्म
कारगी से पटेलनगर रोड को मैंने पिछले तेरह सालों से ऐसा ही देखा है। हर दो कम की दूरी पर टूटी सड़क। बरसात में कारगी से विद्याविहार तक नाला बना हुआ। इस मार्ग से कई वीवीआईपी से लेकर कई अफसर गुजरते है लेकिन किसी को यह नहीं दिखता। इस वजह से तो कई बार इस दो किमी पर घंटों जाम भी लग जाता है। सबसे बड़ा कारण यह है कि यह सड़क सालों से जख्मी हालत में है और इसका कोई पूछनहार नहीं है। सड़क पर दो किमी में दो सौ से अधिक गडृढे होंगे लेकिन इसकी किसी को चिंता नहीं है। न तो इस मार्ग पर नाली की व्यवस्था है और न सड़क को ठीक करने की। अगर कभी ठीक करने वाले आ भी गए तो वह भी मिट्टी भरकर चले जाते है और फिर कुछ दिन बाद वही ढाक के तीन पात।

सड़कों पर गड्ढे या गड्ढों पर सड़क

गोरखपुर से शिमला बाईपास जाने वाली सड़क को देखकर ये कहना जरा मुश्किल है। क्योंकि शहर से कुछ ही किलोमीटर दूर ये सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। जो हर वक्त हादसों को न्योता दे रही हैं। इसके अलावा नगर निगम में शामिल कुछ नये वार्डों की सड़कों की स्थिति भी खराब है। सड़क निर्माण के लिए स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं, लेकिन ये सड़कें कब बनेंगी, किसी को पता नहीं है।

समाधान पोर्टल पर बजट नहीं का जवाब मिला
गोरखपुर से शिमला बाईपास की सड़क पूरी तरह टूट चुकी है। इस सड़क से होकर लोग मजबूरी में ही जाते हैं। बारिश होने के बाद सड़क की स्थिति और खराब हो जाती है। इस समस्या को देखते हुए समाजिक कार्यकर्ता वीरु बिष्ट ने समाधान पोर्टल पर शिकायत की। बिष्ट ने कहा कि समाधान पोर्टल से जबाव मिला कि अभी बजट नहीं है। आरकेडिया की पूर्व उपप्रधान गीता बिष्ट ने बताया कि शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक छह जनवरी 2018 को श्यामपुर में ट्यूबवेल का उद्घाटन करने पहुंचे थे। बिष्ट ने बताया कि उद्घाटन के दौरान मंत्री कौशिक ने मोहनपुर पावर हाउस से कृष्णविहार से आगे स्मिथनगर तिराहे तक की सड़क मरम्मत और नाला निर्माण का वादा किया था, लेकिन ये सड़क आज तक नहीं बनी।

बद्रीपुर: देवपुरम में नहीं बन पाई सड़कें
बद्रीपुर ग्राम पंचायत अब नगर निगम का वार्ड बन गया है, लेकिन यहां कई मोहल्लों की सड़कें टूटी हैं। कुछ मोहल्लों में तो आज तक सड़क बनी ही नहीं। देवपुरम कॉलोनी में सड़क बनाने के लिए कई बार सर्वे हो चुका है। पहले पीडब्ल्यूडी और अब एमडीडीए ने भी सर्वे किया, लेकिन बद्रीपुर की आंतरिक सड़कों को बनाने काम शुरू नहीं हो पाया है। लोगों को इंतजार है कि चुनाव आचार संहिता खत्म हो, तो उनके इलाके की सड़कें बनें।

प्रतिमायन चौक पर नहीं बनी सड़क
लोअर नत्थनपुर प्रतिमायन चौक की आधी- अधूरी सड़क पिछले तीन-चार साल से स्थानीय लोगों की परेशानी का सबब बनी हुई है। इस सड़क के लिए स्थानीय लोग समाधान एप से लेकर सीएम कार्यालय, पीडब्ल्यूडी कार्यालय और सांसद तक से गुहार लगा चुके हैं। मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही। करीब दो सौ मीटर सड़क और कॉलोनी की पांच लेन की सड़कें बुरी तरह उखड़ चुकी हैं। पीडब्ल्यूडी अधिकारी बजट की कमी बताते हैं। सड़क पर कई गड्ढे दुर्घटना का कारण बने हुए हैं। करीब चार साल पहले विभाग ने लोअर नत्थनपुर की सड़क का काम किया था और प्रतिमायन चौक कॉलोनी की सड़क पर महज पचास मीटर में डामरीकरण के बाद काम रोक दिया गया। स्थानीय निवासी राधाकृष्ण पंत का कहना है कि सीएम के विधानसभा क्षेत्र के लिए ही विभाग के पास बजट नहीं है तो अन्य जगहों के हाल समझे जा सकते हैं।

बंजारावाला की सड़कें भी खस्ताहाल
दून विवि रोड, मोथरोवाला और बंजारावाला की सड़कें भी खस्ताहाल हैं। इससे दोपहिया वाहन कई बार अनियंत्रित होकर जख्मी हो रहे हैं। बंगाली कोठी से दून विवि तक सड़कों पर कई जगह बड़े गड्ढे हैं। जो रात के वक्त कई बार दिखते नहीं है और दोपहिया वाहन का टायर उनमें चला जाता है। यहां दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसी तरह मोथरोवाला रोड पर भी बड़े गड्ढे हैं। केदारपुरम से बद्रीपुर और नवादा जाने वाली सड़क का तो बहुत ही बुरा हाल है।

नगर निगम में जुड़े नए मोहल्लों में सड़क-नाली के काम को बजट की कमी नहीं है। आचार संहिता लगी है। इसलिए नए कामों की स्वीकृति अभी नहीं मिल सकती है। निगम की ओर से जरूरी कामों को कराने के लिए निर्वाचन आयोग से अनुमति मांगी जाएगी।
सुनील उनियाल गामा, मेयर

बड़ोवाला से परवल के बीच की सड़क बनाने के लिए शासन में इस्टीमेट भेजा हुआ है। स्मिथनगर से मोहनपुर के बीच सड़क का पैचवर्क कराया था। परवल मार्ग से दूसरी सड़क का इस्टीमेट भेजा है या नहीं, इसे दिखवाया जाएगा। सड़क सुधारीकरण के काम जल्द होंगे।
राजेश कुमार, ईई लोनिवि निर्माण खंड

भारी जुर्माना देना पड़ेगा साथ ही जेल जाने की भी नौबत

बीते बुधवार को राज्यसभा में भी पास हो गया। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ये विधेयक कानून बन जाएगा। उम्मीद है कि संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट 2019 इसी माह (अगस्त) से देशभर में लागू हो जाएगा और गलत ड्राइविंग करने वालों को भारी जुर्माना देना पड़ेगा साथ ही जेल जाने की भी नौबत आ सकती है।


ये संशोधित बिल रोड सेफ्टी और हादसों की संख्या में कमी लाने के लिए बहुत सख्त किया गया है। सरकार बड़े जुर्माने लगाकर लोगों में नियमों को लेकर अनुशासन लाना चाहती है। नया कानून देश के 30 साल पुराने ट्रांसपोर्टेशन लॉ में बड़ा बदलाव लाएगा। कानून बनने से ये यातायात नियमों में ये बड़े बदलाव होंगे जिन्हें आप को जिनका आपको ध्यान रखना होगा।

खराब सड़क बनाने वाले ठेकेदार की जिम्मेदारी होगी तय

नए मोटर व्हीकल एक्ट में वाहन निर्माता कंपनी और सड़क बनाने वाले ठेकेदार की जिम्मेदारी तय होगी। गाड़ी निर्माण में गड़बड़ी पर वाहन निर्माता कंपनी पर 100 करोड़ रुपए जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही खराब सड़क निर्माण पर ठेकेदार पर एक लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है। नए कानून में मोटर दुर्घटना कोष की स्थापना की व्यवस्था है, जो सड़क का इस्तेमाल करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अनिवार्य बीमा कवर देगा।


यातायात नियम तोड़ने पर अब इतना देना होगा जुर्माना
नए मोटर व्हीकल एक्ट के मुताबिक ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और व्हीकल रजिस्ट्रेशन के लिए आधार अनिवार्य होगा।

बगैर हेलमेट या ओवरलोड दोपहिया वाहन पर 3 महीने के लिए ड्राइवर लाइसेंस अयोग्य। बगैर हेलमेट पर 1 हजार रुपए और ओवर लोडिंग पर दो हजार रुपए जुर्माना।
नाबालिग के वाहन चलाते समय हादसा होने पर अभिभावक को 25 हजार रुपए का जुर्माना भरने के साथ-साथ 3 साल की सजा हो सकती है साथ ही जुवेनाइल एक्ट के तहत मामला चलेगा।
अब हिट-एंड-रन के केस में सरकार पीड़ित के परिजनों को 2 लाख या इससे ज्यादा का मुआवजा देगी। ये रकम फिलहाल 25,000 है।
रोड रेगुलेशन्स के उल्लंघन पर अब 100 नहीं, 500 रुपए का जुर्माना। टिकट के बिना ट्रैवल करने का जुर्माना 200 से बढ़कर 500 रुपए।
अथॉरिटी के आदेशों के उल्लंघन पर जुर्माना 500 से बढ़ाकर 2,000 रुपए। लाइसेंस के बिना अनाधिकृत वाहन इस्तेमाल करने पर जुर्माना 1,000 से बढ़ाकर 2,000 रुपए।
लाइसेंस के बिना गाड़ी चलाने पर जुर्माना 500 से बढ़ाकर 5,000 रुपए। ड्राइविंग क्वालिफिकेशन के बिना ड्राइव करने पर जुर्माना 500 से बढ़ाकर 10,000 रुपए।
ओवरसाइज्ड व्हीकल पर 5,000 का जुर्माना। ओवर स्पीडिंग पर जुर्माना 400 से बढ़ाकर LMV के लिए 1000 का जुर्माना और मीडियम पैसेंजर व्हीकल के लिए 2,000 का जुर्माना।
खतरनाक ड्राइविंग करने पर जुर्माना 1,000 से बढ़ाकर 5,000 रुपए। शराब पीकर गाड़ी चलाने पर 2 हजार की बजाय 10 हजार रुपए जुर्माना लगेगा।
स्पीडिंग या रेसिंग करने पर 2,000 नहीं 10,000 हजार भरने होंगे। बिना परमिट के गाड़ी चलाने पर 5000 से बढ़ाकर 10,000 रुपए।
कैब एग्रीगेटर्स जैसे ओला, उबर के वाहन लाइसेंसिंग शर्तों के उल्लंघन पर कंपनियों पर 25,000 से 1 लाख रुपए तक का जुर्माना। सीट बेल्ट न लगाने पर जुर्माना 100 रुपए से बढ़ाकर 1,000 रुपए।
एंबुलेंस जैसी आपातकालीन गाड़ियों को रास्ता न देने पर 10,000 रुपए का जुर्माना या फिर 6 माह की जेल। बिना इंश्योरेंस के 1,000 से जुर्माना बढ़ाकर 2,000 रुपए।
थर्ड पार्टी बीमा भी जरूरी है। ड्राइवर और क्लीनर का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस होगा। हादसे में मृत्यु पर 50 हजार से 5 लाख रुपए तक मुआवजे का प्रावधान है। अज्ञात वाहन की टक्कर से मौत पर 25 हजार से 2 लाख और घायल होने पर साढ़े 12 से 50 हजार रुपए का मुआवजा दिया जाएगा।
मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड बनाया जाएगा, जिसमें सड़क पर चलने वाले सभी चालकों का इंश्योरेंस होगा। इसका इस्तेमाल घायल के इलाज और मृत्यु होने पर परिजनों को मुआवजा देने के लिए किया जाएगा। हादसे में घायल का फ्री में इलाज करना होगा।
लर्निंग लाइसेंस के लिए पहचान पत्र का ऑनलाइन वेरीफिकेशन अनिवार्य। कमर्शियल लाइसेंस 3 के बजाय 5 साल के लिए मान्य होंगे।
लाइसेंस रिन्यूवल अब खत्म होने के एक साल के अंदर कराया जा सकेगा। ड्राइवरों की कमी पूरी करने के लिए ड्राइवर ट्रेनिंग स्कूल खोले जाएंगे। नए वाहनों का रजिस्ट्रेशन डीलर करेगा।

सभी फोटों साभार सोशल मीडिया से

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