रांची: झारखंड की राजधानी रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस की दुखद दुर्घटना ने न केवल 7 जिंदगियां छीन लीं, बल्कि एक परिवार की आखिरी उम्मीद को भी चकनाचूर कर दिया. लातेहार जिले के चंदवा निवासी 41 वर्षीय संजय कुमार पिछले 6-7 दिनों से रांची के देवकमल हॉस्पिटल में 65% जलने की गंभीर चोटों से जूझ रहे थे. जहां डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली शिफ्ट करने की सलाह दी. इसके बाद परिवार ने तुरंत रेडबर्ड एयरवेज की एयर एंबुलेंस बुक की, जिसका कुल किराया 8 लाख रुपये तय हुआ था.
मृतक संजय कुमार के परिजनों के अनुसार, उन्होंने कंपनी को पहले ही साढ़े पांच लाख रुपये एडवांस में जमा कर दिए थे, लेकिन उड़ान भरने से ठीक पहले कंपनी ने बाकी ढाई लाख रुपये की मांग की और बिना पूरी राशि के मरीज को ले जाने से साफ इनकार कर दिया था. यह सुनकर परिवार सदमे में आ गया था. संजय की हालत नाजुक थी, समय की कमी थी, लेकिन पैसे की कमी ने सब कुछ रोक दिया. वहीं, मजबूरन परिजन चंदवा स्थित घर लौटे. वहां एक परिचित से किसी तरह ढाई लाख रुपये की व्यवस्था की. दोबारा रांची पहुंचकर उन्होंने बकाया राशि जमा की, तब जाकर विमान शाम 7:11 बजे टेकऑफ के लिए तैयार हुआ था.
इस विमान में संजय के साथ उनकी पत्नी अर्चना देवी, रिश्तेदार धुरु कुमार, क्रिटिकल केयर डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता, पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्रा और दो पायलट कैप्टन विवेक विकास भगत व कैप्टन सवराजदीप सिंह सवार थे, लेकिन सिर्फ 23 मिनट बाद, कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया. जहां खराब मौसम और डायवर्जन की कोशिश के बीच विमान चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र के जंगल में क्रैश हो गया. इस हादसे में सातों लोगों की दर्दनाक मौत हो गई.
वहीं, परिवार अब इस वजह से परेशान है कि क्या पैसे की इस देरी ने समय बर्बाद किया और हादसे का कारण बना. हालांकि DGCA और AAIB की जांच चल रही है. जहां ब्लैक बॉक्स से कारण स्पष्ट हो जाएगा, लेकिन संजय के परिजनों के लिए यह दर्द हमेशा बना रहेगा. जहां एक तरफ मरीज की जान बचाने की जद्दोजहद थी. वहीं, दूसरी तरफ पैसे की लगातार मांग हो रही थी. ऐसे में यह घटना एयर एंबुलेंस सेवाओं की पारदर्शिता और इमरजेंसी में मानवीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.
