तेहरान: ईरान और इजरायल के बीच बीते महीने भीषण सैन्य संघर्ष देखने को मिला था। ईरान ने 12 दिन के युद्ध में इजरायली शहरों पर मिसाइलें दागते हुए ताकत दिखाई थी लेकिन इजरायल और अमेरिका के हवाई हमलों को रोकने में ईरानी फौज कमजोर दिखी।
हालांकि अब ईरान को चीन से एयर डिफेंस सिस्टम मिल गया है, जिससे इजरायल को तेहरान के खिलाफ आक्रामक होने से पहले सोचना पड़ सकता है। ईरान को अपने खास सहयोगी चीन से सरफेस-टू-एयर मिसाइल बैटरियां मिली हैं। सरफेस टू एयर मिसाइल यानी एसएएम को जमीन या समुद्र से लॉन्च किया जाता है। यह लड़ाकू विमान और मिसाइलों जैसे हवाई खतरों से बचाती है।
मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने हाल ही में चीन से सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल बैटरी (सरफेस-टू-एयर मिसाइल बैटरीज) हासिल की हैं। इजरायल-अमेरिका के साथ हुए संघर्ष के बाद अपनी रक्षा क्षमताओं को बेहतर करने पर काम कर रही ईरानी सरकार और सेना ने यह सौदा तेल के बदले किया है। चीन ने इससे पहले पाकिस्तान को अपने HQ-9 और HQ-16 एयर डिफेंस सिस्टम दिए हैं। मिस्र के पास चीन की HQ-9 प्रणाली है। ईरान को भी चीन की ओर से यही सिस्टम दिए जाने की बात सामने आ रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से ईरान को सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (एसएएम) की डिलीवरी 24 जून को हुई। ये सिस्टम ईरान और इजरायल के बीच युद्धविराम के ठीक बाद तेहरान पहुंचा। एक अरब अधिकारी ने दावा किया कि अमेरिका के उनको तेहरान की इस डील की जानकारी थी। हालांकि अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि ईरान को चीन से सतह से हवा में मार करने वाली कितनी मिसाइलें मिली हैं।
अरब अधिकारी ने यह दावा भी किया है कि ईरान एसएएम के लिए तेल शिपमेंट के साथ भुगतान कर रहा है। चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा आयातक है। ईरान के कच्चे तेल और कंडेनसेट निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत बीजिंग को जाता है। अभी तक ईरान के पास रूस का S-300 एयर डिफेंस सिस्टम होने का दावा किया जाता है। हालांकि इजरायल के हमलों को यह सिस्टम नहीं रोक सका था।
HQ-9B एयर डिफेंस को चाइना प्रिसिजन मशीनरी इम्पोर्ट एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (CPMIEC) ने विकसित किया है। चीन का दावा है कि HQ-9B का रडार बेहद मॉडर्न है और इसकी रेंज 125 किमी तक है। चीन ने रूसी S-300 की तकनीक के आधार पर इसे तैयार किया है। पाकिस्तान और मिस्र पहले से ही इस सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं।