गाजा: इजरायली सैनिकों ने आतंक मचाते हुए गाजा पट्टी में नासेर अस्पताल पर डबल स्ट्राइक कर कम से कम पांच पत्रकारों समेत 20 लोगों की हत्या कर दी है। इजरायली हमले में पांच पत्रकारों की भी मौत हुई है, जो अलग अलग इंटरनेशनल मीडिया संगठनों के लिए काम कर रहे थे।
नासेर अस्पताल गाजा पट्टी के खान यूनिस में हैं। हमले में समाचार एजेंसी रॉयटर्स, एपी, अलजजीरा और मिडिल ईस्ट आई के पत्रकार शामिल हैं। हालांकि हमले के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खेद जरूर जताया है, लेकिन सवाल ये हैं कि नेतन्याहू के खेद जताने से क्या लोगों की जिंदगी लौट आएगी?
इजरायली सैनिकों के डबल स्ट्राइक में अस्पताल के कई स्वास्थ्य कर्मी और बचाव दल के सदस्य भी मारे गये हैं। कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मौके से जो वीडियो सामने आए हैं, उनमें साफ देखा जा सकता है कि इजरायल की पहली बमबारी के बाद राहत और बचाव कार्य चल रहा था। मौके पर स्वास्थ्य कर्मियों और पत्रकारों की टीम मौजूद थी और उसी बीच इजरायल ने फिर से बमबारी कर दी। खून से सने कपड़े हाथ में लिए डॉक्टर कैमरे के सामने खड़े थे कि तभी विस्फोट ने पूरे माहौल को चीख-पुकार में बदल दिया।
इजरायल के डबल स्ट्राइक ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। यूनाइटेड नेशंस के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे “भयानक हत्या” करार देते हुए तत्काल और निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पुष्टि की है कि चार स्वास्थ्यकर्मी भी मारे गए हैं। यूएनआरडब्ल्यूए प्रमुख फिलिप लजारिनी ने कहा कि पत्रकारों की लगातार होती मौतें उन आवाजों को खामोश कर रही हैं, जो गाजा में बच्चों की भुखमरी और त्रासदी को दुनिया तक पहुंचा रहे थे।
ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी ने इसे खौफनाक बताया है, जबकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे असहनीय कहा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों ने भी इजरायली हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा है, कि यह प्रेस की स्वतंत्रता और मानवीय सिद्धांतों पर सीधा हमला है।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस घटना को एक “दुखद दुर्घटना” बताया और कहा कि सैन्य अधिकारी “इसकी गहन जांच कर रहे हैं।” इन पांच पत्रकारों के मारे जाने के साथ ही गाजा में अक्टूबर 2023 के बाद शुरू हुए युद्ध में अभी तक 200 से ज्यादा पत्रकार मारे जा चुके हैं। बीबीसी ने मीडिया की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख संस्था, कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) के हवाले से कहा है कि “गाजा में युद्ध पत्रकारों के लिए अब तक का सबसे घातक संघर्ष रहा है।”
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में वहां मारे गए पत्रकारों की संख्या, दुनिया भर में पिछले तीन वर्षों में मारे गए पत्रकारों की संख्या से कहीं ज्यादा है। युद्ध शुरू होने के बाद से ही इजरायल ने अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारों के गाजा पट्टी में स्वतंत्र रूप से प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक मारे गए पत्रकारों में रॉयटर्स के कैमरामैन हुसाम अल-मसरी और फ्रीलांसर हतम खालिद शामिल हैं। अल-मसरी लाइव फीड चला रहे थे, जो धमाके के साथ अचानक बंद हो गया। एपी की फ्रीलांसर मरियम दग्गा, अल जजीरा के मोहम्मद सलामा, और मिडिल ईस्ट आई के अहमद अबू अजीज और फोटोग्राफर मोआज अबू ताहा भी इस हमले का शिकार बने।
दूसरी तरफ गाजा में हमास नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले 24 घंटे में 58 शव अस्पताल पहुंचने की रिपोर्ट दी है। दर्जनों लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि 28 लोग खाद्य सहायता लेने के दौरान मारे गए और 11 मौतें कुपोषण से दर्ज की गईं हैं, जिनमें दो बच्चे भी शामिल थे। आपको बता दें कि गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद से अभी तक करीब 63 हजार लोग मारे गये हैं, जिनमें 80 फीसदी आम नागरिक हैं।