ग्रीनलैंड पर ट्रंप का कब्जा शुरू

वॉशिंगटन: ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की ताजा धमकियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्कटिक द्वीप को हथियाने की योजना पर अमल शुरू कर दिया है। यह कब्जा चार चरणों में किया जा सकता है, जिसके पहले स्टेप पर काम शुरू हो गया है।

एक्सपर्ट का कहना है कि डेनमार्क के इस स्वायत्तशासी क्षेत्र पर कब्जा करना अमेरिका के लिए बहुत ही आसान होगा। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आर्कटिक में स्थित ग्रीनलैंड पर कब्जा करने का यह प्लान उन रिपोर्टों के बीच आया है, जिसमें वॉइट हाउस ने कहा है कि ट्रंप इस इलाके को खरीदना चाहते हैं, लेकिन इसे हथियाने के लिए सैन्य ताकत के इस्तेमाल से इनकार नहीं करेंगे।

ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्तशासी क्षेत्र है, जिसकी आबादी लगभग 57000 है। अधिकांश हिस्से में बर्फ से ढंका यह द्वीप खनिज से भरपूर है और यही डोनाल्ड ट्रंप की इसमें दिलचस्पी की मुख्य वजह है। डेनमार्क ने द्वीप को कब्जाने की अमेरिकी योजना का विरोध किया है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों की बयानबाजी के बीच विदेश मंत्री मार्को रुबियो डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेड फ्रेडरिक्सन से मिलने वाले हैं।

डेनमार्क के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर पॉलिटिको को बताया कि यह द्वीप अमेरिका से अपनी रक्षा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि यहां ‘सिर्फ पांच हेलीकॉप्टर से कब्जा किया जा सकता है। इससे ज्यादा सैनिकों की जरूरत नहीं होगी।’ डेनिश राजनेता ने कहा कि ‘वे (ग्रीनलैंड के लोग) कुछ नहीं कर पाएंगे।’

रिपोर्ट के अनुसार, अगर राष्ट्रपति ट्रंप ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए डेनमार्क के साथ पैसे के बदले डील नहीं कर पाते हैं, जो उनके पास इस पर कब्जा करने के लिए चार स्टेप का प्लान है। इसका पहला चरण में ग्रीनलैंड के लोगों को प्रभावित करना है, जिसकी शुरुआत हो चुकी है। ट्रंप ने पिछले साल राष्ट्रपति का पदभार संभालने के साथ ही ग्रीनलैंड की आजादी पर बात करना शुरू कर दिया था।

आजाद होने के बाद ग्रीनलैंड अमेरिका के साथ ज्यादा करीब से काम कर सकता है। वर्तमान में ग्रीनलैंड को किसी भी संधि पर हस्ताक्षर करने से पहले डेनमार्क से मंजूरी लेनी पड़ती है। आजादी के लिए ग्रीनलैंड के लोगों को डेनमार्क से अलग होने की मंजूरी देने के लिए एक रेफरेंडम में हिस्सा लेना होगा।

साल 2025 में आइलैंड पर किए गए एक सर्वेक्षण में 56 प्रतिशत लोगों ने कहा था कि वे आजादी के लिए वोट करेंगे, जबकि 28 प्रतिशत ने डेनमार्क का हिस्सा बने रहने का समर्थन किया था। रिपोर्टों से पता चलता है कि अमेरिका पहले ही ग्रीनलैंड में सरकार विरोधी गुस्से को भड़काने की साजिश शुरू कर चुका है। अगस्त 2025 में डेनिश जासूसों ने कहा कि उन्होंने इसे इलाके पर ट्रंप के कब्जे को बढ़ावा देने वाली साजिश पर्दाफाश किया था।

डेनमार्क से अलग होने के बाद अमेरिका ग्रीनलैंड को अपने प्रभाव में लाने की कोशिश करेगा। इसे अमेरिका का 51वां राज्य बनाया जा सकता है। इस बारे में ट्रंप पहले भी सोच चुके हैं। सोमवार को ट्रंप के सहयोगी स्टीफन मिलर की पत्नी केटी मिलर ने अमेरिकी झंडे के रंग में ग्रीनलैंड की तस्वीर पोस्ट की थी, जिसके कैप्शन में लिखा था ‘जल्द ही।’

ट्रंप की योजना में तीसरा कदम यूरोप में अपने सहयोगियों को मनाना है। इसके लिए उनके पास तुरूप का इक्का है। ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए यूरोप को अपने पक्ष में करना का एक तरीका अपना सकते हैं। वह है द्वीप के बदले में यूक्रेन को सुरक्षा की गारंटी देना। यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगी शांति वार्ता में इसकी प्रमुखता से मांग कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें मनाने के लिए ट्रंप ये दांव खेल सकते हैं।

अगर तीसरा कदम फेल हो जाता है तो आखिरी विकल्प सैन्य कब्जे का है। ग्रीनलैंड के एक सुरक्षा विशेषज्ञ के अनुसार, इसे 30 मिनट से भी कम समय में हासिल किया जा सकता है। ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए सैन्य कार्रवाई से इनकार नहीं किया है।

वॉइट हाउस ने इसी सप्ताह कहा कि अमेरिकी सेना के कमांडर इन-चीफ के रूप में राष्ट्रपति के पास हमेशा यह विकल्प होता है। वॉइट हाउस के डेप्युटी चीफ ऑफ स्टाफ और गृह सुरक्षा सलाहकार स्टीफन मिलर ने कहा कि ‘ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर कोई भी अमेरिका से नहीं लड़ेगा।

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