डाबर इंडिया द्वारा 5 संस्थाओं और 11 प्रगतिशील किसानों को किया सम्मानित

रूद्रपुर: डाबर इंडिया और जीवंती वेलफेयर और चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा रूद्रपुर के जीवंती सेंटर में जड़ी-बूटी कृषिकरण संरक्षण और प्रसारण के लिए उत्तराखण्ड में उल्लेखनीय योगदान देने वाली 5 सामाजिक संस्थाओं और 11 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया।

जीवंती संेटर दिनेशपुर में आयोजित एक दिवसीय हितधारक/स्टेक होल्डर मीटिंग में कार्यक्रम की शुभारंभ गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय के अनुसंधान प्रभाग निदेशक मुख्य अतिथि डाॅ0 एस0के0 वर्मा और डाबर के आपूर्ति प्रभाग प्रमुख विशिष्ट अतिथि  नारायणन आर0 तथा बायोरिसोर्स डिविजन के प्रमुख डाॅ0 पंकज प्रसाद रतूड़ी के कर कमलों द्वारा किया गया।

तदोपरांत डाबर की पार्टनर संस्थायें आगाज़ फैडरेशन- चमोली, ह्यूमन इंडिया- रूद्रप्रयाग, टैरी- अल्मोड़ा, कुर्मांचल सेवा समिति- पिथौरागढ़, हैप्रिक- श्रीनगर पौड़ी गढ़वाल का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम के प्रथम चरण में जीवंती सेंटर के इंचार्ज डाॅ0 विजय यादव और डी0आर0डी0सी0 के डाॅ0 विनोद कुमार बिष्ट ने संयुक्त रूप से सभी प्रतिभागी किसानों, विषय विशेषज्ञ और पार्टनर संस्थाओं का अभिवादन और स्वागत किया। तदोपरांत डाॅ0 पंकज रतूड़ी द्वारा उत्तराखण्ड में डाबर द्वारा की जा रही गतिविधियों का विस्तार से प्रस्तुतिकरण किया

उन्होंने बताया कि अभी तक डाबर द्वारा बनाई जाने वाली औषधियों में 55 प्रतिशत दवाएं जड़ों से 35 प्रतिशत दवाएं बीज से, 32 प्रतिशत दवाएं तने से और 23 प्रतिशत दवाएं पत्तियों से बनाई जाती हैं इसीलिए डाबर और जीवंती उत्तराखण्ड से जड़ी-बूटी के कच्चे माल को प्राप्त करने के अतिरिक्त उन बहुमूल्य प्रजातियों को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए डाॅ0 एस0के0 वर्मा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि- ‘‘हम अक्सर सुनते हैं पहाड़ की जवानी और पहाड़ का पानी पहाड़ के काम नहीं आता।‘‘ उन्होंने कहा कि पहाड़ में रोजगार के साधन बहुत सीमित है। कृषि, बागवानी आधारित रोजगार के लिए मिट्टी का कम उपजाऊ होना भी एक बड़ी चुनौती है। सीढ़ीनुमा खेती में मिट्टी के हल्के होने की वजह से उत्पादन कम है साथ ही सिंचाई की सुविधा ना के बराबर है।

ये बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां है। इसलिए कम भूमि में अधिक आमदनी देने वाली बहुमूल्य जड़ी-बूटियों की खेती से रोजगार के अधिक साधन जुटाये जा सकते हैं। हैप्रिक संस्थान श्रीनगर के डाॅ0 प्रदीप डोभाल ने उनके संस्थान द्वारा जटामांसी, अतीस, कुटकी की खेती और एग्रोटैक्निक के बारे में जानकारी दी। और उन्होंने यह भी बताया कि उनकी 6 नर्सरियों के माध्यम से 10 लाख से अधिक पौधे वितरित किये गये हैं। हैप्रिक के निदेशक डाॅ0 वी0के0 पुरोहित ने बताया कि हैप्रिक जड़ी-बूटी शोध-शिक्षा पर कार्य करता है।

जनपद चमोली के अंतिम गाँव घेस को कुटकी की खेती के रूप में प्रसिद्ध करने में हैप्रिक का योगदान रहा है। गोविन्द बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय के मेडिसनल प्लांट रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर (एम0आर0डी0सी0) के सहायक निदेशक डाॅ0 वी0पी0 सिंह जी ने बताया कि उनके संस्थान के माध्यम से जटामांसी, चिरायता, कुटकी, कूट, डैंडलियन की खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

ह्यूमन इंडिया के संस्थापक डाॅ0 जे0एस0 बुटोला ने प्रगतिशील किसानों का परिचय देते हुए यह बताया कि जड़ी-बूटी कृषिकरण कार्य सरल नहीं है। किसानों की फसल का उचित मूल्य मिलना, समय पर खरीद का होना, प्राकृतिक आपदाओं से फसलों का नुकसान एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने डाबर से आग्रह किया कि समय-समय पर जड़ी-बूटी के खरीद के मूल्य अपडेट किये जाने चाहिए तथा किसानों को डाबर की परियोजनाओं के माध्यम से छोटे-छोटे कृषि यंत्र भी उपलब्ध कराये जाने चाहिए।

आगाज़ फैडरेशन के जे0पी0 मैठाणी ने संस्था द्वारा डाबर के साथ 3 जनपदों में टिमरू, सुगंधबाला, कुटज, वरूणा और गुलबनफ्शा की खेती के प्रयासों के बारे में प्रस्तुतिकरण दिया। जी0बी0 पंत यूनिवर्सिटी के प्रमोद मल्ल ने वैज्ञानिक विधि से मधुमक्खी पालन और उसके आर्थिक लाभ के बारे में जानकारी दी। कुर्मांचल सेवा समिति के अध्यक्ष उमेश बिष्ट ने च्यूरा से बनने वाले शहद के साथ-साथ उनकी संस्था द्वारा मधुमक्खी पालन की दिशा में किये जा रहे प्रयासों पर प्रस्तुतिकरण दिया।

इस कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में डाबर के मुख्य क्रय एवं आपूर्ति अधिकारी श्री नारायणन आर0 ने डाबर जीवंती के पार्टनर संस्थाओं को आश्वस्त किया कि भविष्य में डाबर किसानों से जो भी कच्चा माल खरीदेगा उसके तुरंत भुगतान की व्यवस्था की जाएगी उन्होंने बताया कि अभी तक उत्तराखण्ड में डाबर द्वारा जड़ी-बूटी सम्बन्धित कच्चे माल के स्टोरेज के लिए गोदाम आदि की व्यवस्था नहीं थी। लेकिन आज के इस कार्यक्रम में घोषण करते हुए मुझे हर्ष हो रहा है कि शीघ्र ही जीवंती सेंटर रूद्रपुर में स्टोरेज एवं संग्रहण केन्द्र शुरू कर दिया जाएगा।

इसका सभी ने करतल ध्वनि से स्वागत किया। डाबर और जीवंती के सहयोग से कार्य कर रहे हैप्रिक के निदेशक विजय कांत पुरोहित, ह्यूमन इंडिया के जे0 एस0 बुटोला, आगाज़ फैडरेशन के जे0पी0 मैठाणी, टैरी के मुख्य वैज्ञानिक प्रवीण शर्मा, कुमांचल सेवा समिति के उमेश बिष्ट के साथ-साथ पीपलकोटी चमोली के आगाज़ फैडरेशन से जुड़े श्रीमती रेवती देवी को 18 वर्षों से नर्सरी कार्य करने, श्रीमती रूकमा देवी को 2 वर्ष के भीतर सुगंधबाला के ढाई लाख पौधे उत्पादित करने, टैरी हिमालयन सेंटर से जुड़े किसान जीवन सिंह बिष्ट को टिमरू और काकड़ सिंघी रोपण तथा दुर्गा देवी रैकवाल को कचनार रोपण, ह्यूमन इंडिया बागेश्वर के बलवंत सिंह कार्की उन्नत एवं प्रगतिशील किसान और पिथौरागढ़ के टिमरू उत्पादक किसान प्रयाग ंिसंह पालीवाल, हैप्रिक के प्रगतिशील किसान विनोद राठी पौड़ी गढ़वाल, बलवंत सिंह चमोली से, रघुवीर सिंह टिहरी और कुर्मांचल सेवा समिति से जुड़े मधुमक्खी पालक हीरा सिंह मेहता और धन सिंह को भी प्रमाण पत्र देकर श्री नारायणन आर0 जी एवं डाॅ0 पंकज प्रसाद रतूड़ी जी ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में डाॅ0 विजय यादव, डाॅ0 विनोद कुमार बिष्ट, श्री सुरेन्द्र भगत और श्री0 सत्यनारायण ने सभी संस्था प्रमुखों और प्रगतिशील किसानों को जीवंती संेटर के परिसर में संचालित गतिविधियों- पाॅलिहाउस, ग्रीन हाउस तकनीकी केन्द्रों का भ्रमण भी करवाया।तदोपरांत डाॅ0 विजय यादव ने धन्यवाद ज्ञापित कर कार्यक्रम संपादित किया।

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