5000 की विदेशी फौज ने कुचला ईरान में प्रदर्शन

तेहरान: ईरान में करीब तीन हफ्ते से चल रहे विरोध प्रदर्शन अब खत्म होते नजर आ रहे हैं। विरोध प्रदर्शनों को दबाने के तरीके पर अली खामेनेई के नेतृत्व वाले शासन के लिए कई तरह की बातें कही जा रही हैं। ईरान में खामेनेई शासन को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लेबनानी गुट हिजबुल्लाह और इराक की शिया मिलिशिया से मदद मिलने का दावा किया गया है। कथित तौर पर पड़ोसी देशों के शिया लड़ाकों ने इस प्रदर्शन को खत्म करने में तेहरान की मदद की है।

इंडिया टुडे ने कुछ रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया है कि ईरानी शासन ने विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए विदेशी शिया मिलिशिया का सहारा लिया। मिलिशिया लड़ाकों ने आक्रामक रुख अपनाया, जो करीब 2,600 मौतों की वजह बना। खामेनेई ने कथित तौर पर अरबी बोलने वाले ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ मिलिशिया को प्रदर्शनकारियों को कुचलने का काम सौंपा क्योंकि उनके सुरक्षाबल लोगों पर गोली चलाने में हिचकिचा रहे थे।

रिपोर्ट कहती है कि हाल के हफ्तों में करीब 5,000 इराकी लड़ाके धार्मिक तीर्थयात्री बनकर ईरान में घुसे। इसके बाद इन्होंने प्रदर्शनों को कुचलने का काम संभाल लिया। इन्होंने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने में कोई हिचक नहीं दिखाई। इसका नतीजा ये हुआ कि इस हफ्ते के अंत तक विरोध प्रदर्शनों और मौतों की रिपोर्ट कम हो गईं।

रॉयटर्स ने शुक्रवार को एक मानवाधिकार समूह और निवासियों से मिली जानकारी के आधार पर बताया कि इस खूनी कार्रवाई ने फिलहाल विरोध प्रदर्शनों को बड़े पैमाने पर शांत कर दिया है। पिछले कुछ दिनों में तेहरान में कोई विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ है। CNN ने एक यूरोपीय सैन्य सूत्र और इराकी सुरक्षा सूत्र के हवाले से कहा कि इराकी मिलिशिया पिछले कुछ हफ्तों में प्रदर्शनों को दबाने के लिए ईरान में घुसे हैं।

इराकी सुरक्षा सूत्र ने कहा कि करीब 5,000 लड़ाके दो दक्षिणी सीमा चौकियों- मेसन प्रांत में शैब और वासित प्रांत में जुरबतिया के रास्ते ईरान में दाखिल हुए। यूरोपीय सैन्य सूत्र ने800 शिया लड़ाके इराक के दियाला, मेसन और बसरा प्रांतों से धार्मिक तीर्थयात्राओं के बहाने यात्रा करते हुए सीमा पार करने का दावा किया।

ये लड़ाके ईरान समर्थक समूहों जैसे कताइब हिजबुल्लाह, हरकत हिजबुल्लाह अल-नुजाबा, कताइब सैय्यद अल-शुहादा और बदर संगठन से संबंधित हैं। ये सभी इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के तहत काम करते है। दावा है कि इनकी मौजूदगी ईरान के हमादान जैसे शहरों में देखी गई है।

इससे पहले इराकी गृह मंत्रालय के अधिकारी अली डी ने न्यूज एजेंसी द मीडियालाइन से बात करते हुए कहा था कि 11 जनवरी तक कथित शिया तीर्थयात्रियों की दर्जनों 50-सीटर बसें ईरान में दाखिल हुईं। उनमें कोई परिवार नहीं था, कोई बुजुर्ग यात्री नहीं था। उनमें सिर्फ जवान आदमी थे और सभी एक जैसी काली टी-शर्ट पहने हुए थे। ये दिखाता है कि कैसे मिलिशिया की एंट्री कराई गई।

कुर्द मानवाधिकार समूह हेंगा संगठन फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार, कुछ ईरानी सुरक्षा कर्मियों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद ये किया गया। ईरानी विपक्षी नेता मेहदी रजा ने कहा कि इराकी मिलिशिया को आधिकारिक या सैन्य मुख्यालयों की रखवाली के लिए तैनात किया गया था। ईरानी पत्रकार नेजात बहरामी ने चेतावनी दी कि हिजबुल्लाह और हशद अल-शाबी के लड़ाके ईरानियों को दबा रहे हैं।

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