शीतकालीन यात्रा ने रचा नया अध्याय

देहरादून। देवभूमि में चारधाम के कपाट बंद होने के बाद शीतकाल में पहाड़ पर रहने वाली वीरानी अब दूर हो गई है। पिछले वर्ष से शुरू हुई शीतकालीन यात्रा के बाद से तस्वीर बदल गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सालभर पहले उत्तराखंड में आकर जिस शीतकालीन यात्रा की ब्रांडिंग की थी, वह तेजी से आगे बढ़ रही है। आस्था पथ पर शीतकालीन यात्रा नया अध्याय लिख रही है।

पहाड़ में चारधाम के शीतकालीन गद्दीस्थलों समेत अन्य धार्मिक व पर्यटक स्थलों में यात्रियों और पर्यटकों की चहल-पहल सुखद अनुभूति करा रही है। चारों धामों के शीतकालीन गद्दीस्थलों पांडुकेश्वर-ज्योतिर्मठ, ऊखीमठ, मुखबा और खरसाली में देश-दुनिया से अच्छी-खासी संख्या में यात्री पहुंच रहे हैं।

इस बार चारधाम के कपाट बंद होने के बाद से अब तक 34,140 यात्री इन स्थलों में दर्शन कर चुके हैं। शीतकालीन यात्रा अभी लगभग ढाई माह और चलनी है। यह दूसरा वर्ष है, जबकि सरकार के स्तर पर सफलतापूर्वक शीतकालीन यात्रा का संचालन किया जा रहा है।वर्ष 2024-25 में जब पहली बार यह यात्रा शुरू की गई थी, तब 73,381 यात्री शीतकालीन यात्रा पर उत्तराखंड आए थे।

चारधाम के शीतकालीन गद्दीस्थलों की यात्रा के लिए इस बार अभी तक सबसे ज्यादा यात्री केदारनाथ के गद्दीस्थल ऊखीमठ पहुंचे हैं। चारधाम यात्रा प्रबंधन एवं नियंत्रण संगठन के विशेष कार्याधिकारी डा प्रजापति नौटियाल के अनुसार ऊखीमठ में 20,338 यात्रियों ने दर्शन किए हैं। ज्योतिर्मठ, खरसाली और मुखवा में भी लगातार यात्री पहुंच रहे हैं। प्रतिदिन एक से डेढ़ हजार यात्री चारधाम के शीतकालीन प्रवास स्थलों में दर्शन कर रहे हैं।

राज्य में शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा दिए जाने के बाद से पर्यटक स्थलों में भी बड़ी संख्या में यात्री पहुंच रहे हैं। पर्यटकों को लुभाने के लिए शीतकाल मेंं स्नो लेपर्ड टूर, टूर एंड ट्रैवल्स कान्क्लेव जैसे आयोजनों पर कार्य हो रहा है।

राज्य में शीतकालीन यात्रा लगातार दूसरे वर्ष भी सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछली बार मुखवा व हर्षिल आकर जिस तरह से इस यात्रा का देश-दुनिया में प्रमोशन किया, उसके सार्थक परिणाम दिख रहे हैं। शीतकाल में भी लोग उत्तराखंड आकर पवित्र स्थलों के दर्शन करने के साथ ही यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को निहार रहे हैं। बारहमासी यात्रा की सफलता से स्थानीय लोगों का रोजगार भी फल-फूल रहा है।
-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

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