वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के व्यापार समझौते की इस समय काफी ज्यादा चर्चा है। खासतौर से भारत की रूस से तेल खरीद और अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने पर काफी ज्यादा बात हो रही है। हालांकि इस डील का एक अहम पहलू रक्षा क्षेत्र से भी जुड़ा है। भारत के रक्षा क्षेत्र को इस डील से रफ्तार मिल सकती है। अमेरिका से सैन्य तकनीक और लड़ाकू विमानों के इंजन इस डील के होने से भारत को मिल सकते हैं, जिससे रक्षा क्षेत्र को रफ्तार मिलेगी।
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की घोषण मिलिट्री टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए अच्छी खबर है। दरअसल नई दिल्ली के कई मिलिट्री प्रोजेक्ट वॉशिंगटन के साथ बेहतर संबंधों पर निर्भर करते हैं। भारत को खासतौर से तेजस फाइटर जेट Mark1A के लिए जरूरी अमेरिकी इंजन की सप्लाई चाहिए।
अमेरिका और भारतके संबंधों में खटास आने के बाद पिछले साल से तेजस मार्क1A फाइटर जेट के लिए इंजन की सप्लाई में देरी हुई है। इससे अगली पीढ़ी के फाइटर जेट तेजस मार्क 2 बनाने के लिए इंजन की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का वादा पूरा न होने का डर पैदा हुआ। ये दोनों प्रोजेक्ट भारत के बहुत जरूरी हैं क्योंकि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)अमेरिकी इंजन का इस्तेमाल करके 500 जेट बनाने वाली है।
भारत-अमेरिका सैन्य तकनीक सहयोग अहम है। जून 2023 में अमेरिका ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और जनरल इलेक्ट्रिक के F-414 एयरो-इंजन के उत्पादन के लिए एक जॉइंट वेंचर पर सहमति जताई थी। ऐसे में तेजस मार्क-2 फाइटर जेट की योजना और डिजाइन GE F-414 इंजन के स्पेसिफिकेशन्स के आधार पर बनाई गई। इस जेट की पहली उड़ान इस साल होना तय है।
अमेरिका से संबंधों में गिरावट के बाद तेजस जेट पर एक अनिश्चितता बनी हुई थी। दरअसल HAL को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए ट्रंप प्रशासन की मंजूरी की जरूरत होगी। इंजन पर तकनीक ट्रांसफर अगले 4-5 दशकों में भारत-अमेरिका सैन्य-तकनीक साझेदारी की दिशा तय करेगा। इससे इसकी अहमियत पता चलती है।
ट्रेड डील की घोषणा से पहले अमेरिका ने भारत के साथ रक्षा और सैन्य संबंधों को बढ़ाने पर जोर दिया गया था। हालांकि ट्रंप प्रशासन के भारत से तनावपूर्ण रिश्ते का सीधा असर रक्षा संबंधों पर दिख रहा था। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप को नरेंद्र मोदी की तारीफ करने और संबंधों को सुधारने की बात कहने के बाद चीजें बदल सकती हैं।

