पश्चिम बंगाल:पश्चिम बंगाल से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. बारासात के नारायण मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में गुरुवार को निपाह वायरस से संक्रमित एक 25 वर्षीय नर्स की मौत हो गई. नर्स पिछले काफी समय से इस जानलेवा वायरस से लड़ रही थी. यह मामला न केवल स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय है, बल्कि आम जनता के लिए भी सतर्क रहने की एक बड़ी चेतावनी है.
नर्स की मौत की कहानी किसी संघर्ष से कम नहीं थी. राज्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वह नर्स लंबे समय तक कोमा में रही थी. निपाह वायरस ने उसके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को इतना कमजोर कर दिया था कि उसका शरीर अन्य बीमारियों से लड़ने में असमर्थ हो गया.
नर्स नए साल की छुट्टियां मनाने 31 दिसंबर 2025 को अपने घर (पूर्वी बर्धमान) गई थी. जनवरी की शुरुआत में ही उसे तेज बुखार और संक्रमण के लक्षण महसूस हुए. उसे पहले बर्धमान मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, फिर हालत बिगड़ने पर बारासात के निजी अस्पताल में शिफ्ट किया गया.
जनवरी के अंत में उसे लाइफ सपोर्ट सिस्टम से हटा लिया गया था. वह होश में आने और बोलने की कोशिश भी कर रही थी. लेकिन अचानक गुरुवार शाम उसे फेफड़ों में संक्रमण और कार्डियक अरेस्ट हुआ, जिससे शाम 4:20 बजे उसकी मृत्यु हो गई. पश्चिम बंगाल में दिसंबर 2025 से अब तक निपाह के दो पुष्ट मामले सामने आए हैं. इनमें से एक पुरुष नर्स ठीक हो चुका है, लेकिन इस महिला नर्स की मौत ने स्थिति को गंभीर बना दिया है.
निपाह वायरस कोई नई बीमारी नहीं है, लेकिन यह बहुत खतरनाक है. यह हेनिपावायरस परिवार का हिस्सा है. इसे विज्ञान की भाषा में प्राणीजन्य वाइरस कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि यह जानवरों से इंसानों में फैलता है. इसकी पहचान सबसे पहले 1998 में मलेशिया में हुई थी, जहां सूअरों के संपर्क में आने से लोग बीमार हुए थे. इसकी मृत्यु दर 40% से 75% के बीच है, जो इसे कोविड-19 से भी कहीं अधिक घातक बनाती है.
निपाह वायरस के फैलने के मुख्य तीन रास्ते हैं. संक्रमित चमगादड़ और जानवर- यह मुख्य रूप से फ्रूट बैट्स के जरिए फैलता है. उनकी लार, पेशाब या मल में यह वायरस मौजूद होता है.

