चीन के इर्द-गिर्द अमेरिका का ‘जाल’ !

नई दिल्लीः भारत समेत कई देश अमेरिका के MQ-9 ड्रोन खरीद रहे हैं. मिलिट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन ड्रोन का बढ़ता इस्तेमाल बीजिंग के लिए एक चुनौती है. आइये जानते हैं कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी को इनसे बचने के लिए क्या करना होगा?साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट अमेरिका के ज्यादा से ज्यादा साथी और पार्टनर MQ-9 ड्रोन खरीद रहे हैं. ये ड्रोन जासूसी और हमला करने वाले दोनों तरह के मिशन कर सकते हैं.

MQ-9 का इस्तेमाल कई हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन के लिए किया गया है, जिसमें 2020 में ईरानी मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या भी शामिल है.साउथ कोरिया के कुनसन एयर बेस, फिलीपींस के बासा एयर बेस ये ड्रोन तैनात हैं. US मरीन कॉर्प्स ने बताया है कि सितंबर से जापान के ओकिनावा में कडेना एयर बेस पर छह MQ-9 तैनात किए गए हैं. वहीं जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स 2032 तक 23 MQ-9B सीगार्डियन खरीदेगी.

भारत ने भी 2020 में दो MQ-9B खरीदे थे. इसने 2024 में लगभग US$3.5 बिलियन के 31 ड्रोन के ऑर्डर के साथ इसे और बढ़ा दिया, जिनकी डिलीवरी 2029 और 2030 के बीच होने की उम्मीद है.चीनी मिलिट्री टेक मैगजीन ऑर्डनेंस इंडस्ट्री साइंस टेक्नोलॉजी के एक एनालिसिस के मुताबिक चीन के लिए इस ड्रोन का सबसे बड़ा खतरा इसकी 15,240 मीटर (50,000 फीट) तक की सबसे ज़्यादा ऊंचाई और इसकी लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता है.

भविष्य में US मिलिट्री MQ-9s को चीन से दूर तैनात कर सकती है और धीरे-धीरे चीनी एयरस्पेस में घुस सकती है या टोही और टारगेट डेज़िग्नेशन मिशन करने के लिए उसके आस-पास काम कर सकती है. मिलिट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीन के पास MQ-9 ड्रोन का अमेरिका का बढ़ता इस्तेमाल और पीपल्स लिबरेशन आर्मी के लिए काउंटर-टोही को बेहतर बनाना और भी जरूरी हो गया है

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