नई दिल्ली: नोएडा के युवराज और द्वारका के साहिल के बीच एक अजीब और दुखद समानता थी, दोनों की आंखों में इस सरजमी से दूर, सात समंदर पार एक बेहतर भविष्य के सपने थे। मगर, एक को सिस्टम के ‘गड्ढे’ ने निगल लिया और दूसरे को सड़क पर दौड़ती ‘लापरवाही’ ने कुचल दिया।
आज एक का पिता सिस्टम से हारकर खुद विदेश चला गया है, तो दूसरे की मां के पास बस वो अधूरी बातें बची हैं, जो उसका बेटा अक्सर परदेस जाने के बारे में किया करता था। सवाल वही है : क्या हमारा तंत्र इतना लाचार है कि वह हमारे बच्चों को सुरक्षित सड़कें और बुनियादी गरिमा भी नहीं दे सकता? इंसाफ की चौखट पर आज भी ये सिसकियां जवाब मांग रही है।
द्वारका जिला के बागडोला बी-ब्लॉक में रहने वाली इन्ना माकन के इकलौते बेटे साहिल की दर्दनाक मौत ने उनको तोड़कर रख दिया है। वह बार-बार यही कहती हैं कि मेरा बेटा देश से बाहर जाने वाला था। मैंने सिंगल मदर रहते हुए बहुत झेला है। मैं बेटे को कभी इस देश में रखना नहीं चाहती थी। इन्ना ने 3 फरवरी को सड़क हादसे में बेटे को खो दिया था। आरोपी को बेल पर कहा कि आप किसी को मार दो और बेल मिल जाएगी। बेटे को सिस्टम ने खत्म कर दिया।
अपने बेटे को विदेश भेजना चाहती थी। इस देश में उसे रखने का कोई इरादा नहीं था। मेरा बेटा ये देश छोड़कर जाने वाला था। सिंगल मदर रहते हुए मैंने दुनिया में बहुत कुछ झेला है।नोएडा के सेक्टर-150 स्थित बेसमेंट के गड्ढे में डूबकर इंजिनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में कार्रवाई का इंतजार करते-करते आखिरकार उनके पिता, बेटी के साथ लंदन चले गए।
SIT की जांच शुरू होने पर उन्हें उम्मीद जगी थी कि जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी, लेकिन ऐसा न होने से वे बेहद निराश हैं। परिवार की उम्मीदें अब धीरे-धीरे टूटने लगी हैं। युवराद के पिता अपनी बेटी के पास लंदन चले गए हैं और घर पर ताला लटका हुआ है।

