पंजाब प्रांत में 70 साल बाद आई भयानाक बाढ़, 30 की मौत और लाखों बेघर

इस्लामाबाद :पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में आई भयानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। बीते 24 घंटे में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई है जबकि लाखों लोग बेघर हो गए हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन को कई जगह बांध तोड़ने के लिए विस्फोटक तक इस्तेमाल करना पड़ा ताकि बड़े शहरों को बाढ़ से बचाया जा सके।

शनिवार सुबह से हो रही मूसलधार बारिश ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने दो सितंबर तक और तेज बारिश की चेतावनी दी है। पंजाब प्रांत के करीब 1,700 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें सिखों का पवित्र स्थल करतारपुर भी शामिल है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के मुताबिक, 26 जून से शुरू हुए मानसून में अब तक देशभर में 842 लोगों की जान जा चुकी है।

पंजाब की वरिष्ठ मंत्री मरियम औरंगजेब ने बताया कि पिछले 24 घंटे में 30 लोगों की जान गई है। करीब 15 लाख लोग बेघर हो गए हैं। अब तक 5 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। लगभग 2,000 गांव डूब गए हैं और हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो गई है। प्रशासन ने मंडी बहाउद्दीन, चिनीओट और झंग समेत कई इलाकों में सात जगह बांध तोड़ने के लिए विस्फोटक का इस्तेमाल किया।

जानकारी के मुताबिक, केवल चिनाब नदी से 1,169 गांव प्रभावित हुए हैं। रावी नदी से 462 गांव और सतलुज से 391 गांव डूबे हैं। पूरे प्रांत में 351 राहत व मेडिकल कैंप चलाए जा रहे हैं। लाहौर में करीब 40 साल बाद दो दर्जन कॉलोनियां पानी में डूब गईं। वहीं, मुल्तान शहर पर बाढ़ का बड़ा खतरा मंडरा रहा है क्योंकि चिनाब नदी में अगले 24 घंटे में 8 लाख क्यूसेक का पानी आने की आशंका जताई गई है।

एनडीएमए ने चिनाब, रावी और सतलुज नदियों में बाढ़ की चेतावनी जारी की है। खासकर सतलुज नदी में 1955 जैसी स्थिति बन रही है। कसूर जिले में खतरा बढ़ता जा रहा है। प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (पीडीएमए) ने इसे सबसे भयानक बाढ़ बताया और कहा है कि मानसून का नौवां दौर दो सितंबर तक जारी रहेगा। राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है, लेकिन लगातार बारिश और नदियों के उफान से संकट और गहराता जा रहा है।

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