दुर्घटनाओं ने मातम में बदला दशहरे का उल्लास

देहरादून: उत्तराखंड में एक के बाद एक हुई दुर्घटनाओं ने दशहरे के उल्लास को मातम में बदल दिया। मंगलवार को नवमी पूजन के बाद लोग बुधवार को दशहरा मनाने की तैयारियों में जुटे थे।

इसी बीच उत्तरकाशी स्थित द्रौपदी का डांडा के डोकरणी ग्लेशियर में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) के प्रशिक्षुओं समेत प्रशिक्षु पर्वतारोहियों के हिमस्खलन में दबकर लापता होने की सूचना ने सबको झकझोर कर रख दिया। निम के एडवांस कोर्स के तहत द्रौपदी का डांडा गए इस दल में 42 लोग शामिल थे।

बारिश और भारी बर्फबारी के चलते मंगलवार को वहां वायु सेवा की रेस्क्यू टीम राहत व बचाव कार्य भी शुरू नहीं कर पाई। इसलिए ठीक-ठीक पता नहीं लग पा रहा है कि इस हादसे में कितने पर्वतारोही सुरक्षित हैं। अभी तक चार पर्वतारोहियों के मरने की पुष्टि हुई है।

इसी बीच, शाम को सूचना मिली की हरिद्वार जिले के लालढांग से पौड़ी जिले के बीरोंखाल ब्लाक स्थित कांडा तल्ला गांव जा रही बरात की एक बस खाई में गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। इस दुर्घटना में 25 बरातियों के मरने की सूचना है और अभी कई लोग पहाड़ी से लटकी बस में फंसे हुए हैं।

उधर, देहरादून के कालसी ब्लाक में भी कोटी के पास बोलेरो के खाई में गिरने से डिमऊ के एक युवक की मौत हो गई। इन दुर्घटनाओं ने न केवल दशहरे की खुशी को बदरंग कर दिया, बल्कि त्योहारी उल्लास में भी मातम घोल दिया।

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