वॉशिंगटन: अमेरिका ने पाकिस्तान की रेको डिक खदान परियोजना में 1.3 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है। ट्रंप प्रशासन की ओर से बुधवार को कहा गया है कि ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ के तहत यह बड़ा निवेश किया जाएगा। दूसरी ओर मुश्किल आर्थिक हालात से गुजर रहे पाकिस्तान के लिए यह बड़ी राहत है। यह निवेश उसकी अर्थव्यवस्था को रफ्तार दे सकता है। हालांकि इस इलाके में पाकिस्तानी सेना को विद्रोही गुट बीएलए से चुनौती मिल रही है। ऐसे में यहां खनन के लिए अमेरिका और पाकिस्तान को बीएलए से भी पार पाना होगा। बीएलए बलूचिस्तान की खनिज संपदा को दूसरे देशों को देने का विरोध करता रहा है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने प्रोजेक्ट वॉल्ट का मकसद महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ धातुओं के लिए वैश्विक बाजार को नया आकार देना बताया है। विदेश विभाग की ओर से कहा गया है कि रेको डिक ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ के लिए अमेरिका के बाहर किया गया एकमात्र निवेश है। प्रोजेक्ट वॉल्ट की घोषणा डोनाल्ड ट्रंप ने इसी महीने, 2 फरवरी को की है। यह यूनाइटेड स्टेट एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक (EXIM) के चेयरमैन की अगुवाई वाली पहल है। इसमें EXIM ने प्रोजेक्ट के लिए 10 अरब डॉलर के लोन को मंजूरी दी है, जो इस एजेंसी की ओर से दिए गए सबसे बड़े लोन में से एक है।
EXIM ने ट्रंप प्रशासन की खनिज परियोजनाओं के लिए 14.8 अरब डॉलर के लेटर ऑफ इंटरेस्ट जारी किए हैं। महत्वपूर्ण खनिज पोर्टफोलियो के लिए EXIM ने कई लेन-देन को मंजूरी दी है, जिसमें पाकिस्तान के लिए 1.3 अरब डॉलर शामिल हैं। इस लिस्ट में अमेरिका के अलावा पाकिस्तान ही ऐसा देश है, जहां क्रिटिकल मिनरल्स के लिए इन्वेस्टमेंट किया गया है।
रेको डिक खदानपाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांतमें है। रेको डिक खदान दुनिया के सबसे बड़े तांबे और सोने के भंडारों में से एक है। रिपोर्ट बताती हैं कि बलूचिस्तान के इस इलाके में 5.9 अरब टन अयस्क (सोना और तांबा) होने का अनुमान है। इस भंडार में 0.41 फीसदी तांबा और 41.5 मिलियन औंस सोना है। यह मात्रा इस खदान की अहमियत बढ़ाती है।
रेको डिक इलाका चगाई ज्वालामुखी पहाड़ों की श्रृंखला में कुछ बचे हुए ज्वालामुखी केंद्रों में से एक है। यह इलाका बलूचिस्तान में क्वेटा-ताफ्तान लाइन रेलवे और अफगानिस्तान की सीमा के बीच फैला हुआ है। साल 2011 में यह खदान पाकिस्तान और टेथियन कॉपर कंपनी (TCC) के बीच कानूनी विवाद का केंद्र बन गई थी।
पाकिस्तान को रेको डिक के तांबा-सोना के भंडार 50 साल से ज्यादा समय तक चलने की उम्मीद है। रेको डिक की कीमत 500 अरब डॉलर से लेकर 1 ट्रिलियन डॉलर तक आंकी गई है। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने कहना है कि उनका देश अपने खनिज भंडार का सही इस्तेमाल करे तो गरीबी से बाहर निकल सकता है।
बलूचिस्तान प्रांत में विद्रोही गुट बीएलए लंबे समय से पाकिस्तान की सरकार और सेना को चुनौती दे रहा है। बीलएन ने हालिया दिनों में पाकिस्तान सेना पर भीषण हमले किए हैं। इस गुट का साफतौर पर कहना है कि वह किसी विदेशी ताकत को अपने खनिज नहीं ले जाने नहीं देगा। ऐसे में बीएलए के प्रभाव वाले इलाकों से सोना और तांबा निकालना अमेरिकी कंपनियों के लिए आसान नहीं होने जा रहा है।
अमेरिका की ओर से बलूचिस्तान में हाल ही में हमलों की निंदा की है। अमेरिका ने बीएलए की निंदा करते हुए कहा है कि हम पाकिस्तान के साथ मजबूती से खड़े हैं। अमेरिका ने कहा है कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) एक नामित विदेशी आतंकी संगठन है। अमेरिका का यह कड़ा रुख साफतौर पर भविष्य में बीएलए के साथ उसके संभावित टकराव की ओर इशारा करता है।

