अयोध्या। रामजन्मभूमि पर आए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत कर मुस्लिम समुदाय ने सौहार्द की एक नई मिसाल कायम की। रामलला के प्रति आस्था दिखाते हुए पिछले वर्ष जून में लखीमपुर खीरी के एक मुस्लिम दंपती ने रामलला के दर्शन किए और सद्भाव का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया।
हालांकि, कुछ ऐसे मुस्लिम व्यक्ति भी सामने आए, जिन्होंने इबादत के नाम पर ऐसी हरकतें कीं, जिससे रामजन्मभूमि परिसर की सुरक्षा एजेंसियां असहज हुईं। इन्हीं हठधर्मी के मामलों की श्रृंखला में अब कश्मीर के शोपियां निवासी एबी अहद शेख का नाम भी शामिल हो गया है।
राम मंदिर का द्वार सभी के लिए खुला है, इस उदार व्यवस्था का फायदा उठाकर दर्शन के बहाने परिसर में नमाज पढ़ने का प्रयास करना इबादत से अधिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश लगता है। सुरक्षा एजेंसियां इस सोच के पीछे के मकसद की जांच में जुटी हुई हैं।
करीब 56 वर्षीय अहद की इस हरकत ने उनके राम मंदिर आने के उद्देश्य को ही संदिग्ध बना दिया है। इससे पहले 3 मई 2025 को भी रामजन्मभूमि परिसर ऐसी ही हरकत से परेशान हुआ था। उस समय महाराष्ट्र के नागपुर की रहने वाली सीरीन फरीद राम मंदिर पहुंची थीं।
उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगने पर विशेष सुरक्षा बल (एसएसएफ) के जवानों ने गर्भगृह के निकट उन्हें पकड़ा था। उनके पास एक पर्ची भी मिली थी, जिस पर उर्दू में कुछ अस्पष्ट शब्द लिखे थे। वह भी नमाज पढ़ने का प्रयास कर रही थीं। हालांकि, पुलिस ने ऐसे किसी कागज के मिलने से इनकार किया है।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान महिला का व्यवहार मानसिक अस्वस्थता की ओर इशारा कर रहा था। महिला के परिजनों ने भी यही जानकारी दी थी। नाम-पता सत्यापन और मेडिकल दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें छोड़ दिया गया था।राम मंदिर परिसर में किसी को भी नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं है। यह बात सभी को ज्ञात होने के बावजूद पिछले नौ महीनों में ऐसी दो अनधिकृत कोशिशें सामने आना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
पकड़े गए कश्मीरी मुस्लिम अहद शेख शोपियां में सेब की खेती करते हैं। शुरुआती पूछताछ में उन्होंने राम मंदिर आने को पर्यटन का हिस्सा बताया है। उनके अमृतसर सहित अन्य पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों की यात्रा की भी जानकारी है। पिछले वर्ष मई में पकड़ी गई मुस्लिम महिला ने भी अपनी राम मंदिर यात्रा को पर्यटन का हिस्सा ही बताया था। वह कई पर्यटन स्थलों की सैर कर चुकी थीं।
दोनों ही सामान्य दर्शनार्थी की तरह मंदिर पहुंचे थे। नौ महीने के अंदर हुई ये दो घटनाएं सामान्य नहीं मानी जा सकतीं। इसके पीछे कोई साजिश भी हो सकती है। इस प्रयास को परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने के आतंकी इरादे से भी जोड़ा जा रहा है।
