उत्तराखंड में एक लाख ट्रांसपोर्टरों को बड़ी राहत

सरकार ने व्यावसायिक वाहनों का छह माह का टैक्स कि‍या माफ

देहरादून। इस वर्ष अप्रैल में कोरोना की दूसरी लहर के कारण पर्यटन और परिवहन कारोबार पर पड़ी चोट को देखते हुए राज्य सरकार ने लगभग एक लाख ट्रांसपोर्टरों को बड़ी राहत दी है। राज्य सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के छह माह का टैक्स माफ कर दिया है। जो एक अप्रैल से 30 सितंबर तक का होगा। यह निर्णय सिर्फ राज्य मं पंजीकृत व्यावसायिक यात्री वाहनों पर लागू होगा।

भार वाहन इसमें सम्मिलित नहीं हैं। इससे सरकार पर करीब 66 करोड़ रुपये का व्ययभार आएगा। इसके अलावा सरकार ने यात्री वाहनों को 31 मार्च 2022 तक सभी तरह के विलंब शुल्क से भी छूट देने का फैसला किया है। जिससे सरकार पर तकरीबन छह करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्ययभार आएगा।

कोरोना की दूसरी लहर के अप्रैल में चरम पर आने पर सरकार ने न सिर्फ अंतरराज्यीय परिवहन पर रोक लगा दी थी, बल्कि शहरों में कोरोना कफ्र्यू लागू होने पर व्यावसायिक वाहनों का संचालन बंद हो गया था। इसके अलावा इस बार यात्रा व पर्यटन सीजन भी सामान्य नहीं रहा। परिवहन कारोबारी गुजरे तीन महीने से सरकार से टैक्स में छूट मांग रहे थे। ऐसा नहीं होने पर जून व जुलाई में हजारों की संख्या में व्यावसायिक वाहनों के परमिट सरेंडर कर दिए गए थे।

कारोबारियों के दबाव को देखते हुए परिवहन विभाग ने सरकार को तीन महीने की टैक्स माफी का प्रस्ताव भेजा था। इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विचार-विमर्श के बाद प्रदेश के मौजूदा हालात को देखते हुए छह महीने का टैक्स माफ करने के आदेश दिए। इसके बाद परिवहन सचिव डा. रणजीत सिन्हा ने बुधवार शाम इस संबंध में आदेश जारी कर दिए।

वहीं, सरकार ने व्यावसायिक यात्री वाहनों को छह माह की अवधि के लिए सभी तरह के विलंब शुल्क से भी राहत दी है। जिसके तहत एक अक्टूबर-21 से 31 मार्च-22 तक पंजीकरण प्रमाण पत्र, फिटनेस, परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस आदि के नवीनीकरण पर विलंब शुल्क नहीं देना पड़ेगा।स्टेज कैरिज बस, कांट्रेक्ट कैरिज बस, कांट्रेक्ट कैरिज टैक्सी, मैक्सी, आटो रिक्शा, विक्रम, ई-रिक्शा व स्कूल बस।

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उदय दिनमान’ एक वैचारिक आंदोलन भी है। इस आंदोलन का सरोकार आर्थिकी, राजनीति, समाज, संस्कृति, इतिहास व विकास से है। अकेले उत्तराखंड की बात करें तो यह क्षेत्र सदियों से न केवल धार्मिक आस्थाओं का केंद्र रहा है, बल्कि यह क्षेत्र मानव सभ्यता-संस्कृति का उद्गम स्थल भी समझा जाता रहा है। आधुनिक समय में विकास की अवधारणा के जन्म लेने के साथ हिमालयी समाज-संस्कृति को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ये चुनौतियां हमारी संस्कृति पर निरंतर प्रहार कर इसे गहरा आघात पहुॅचाने में तुली हुई है। हालांकि, सामाजिक, शारीरिक, आर्थिक आदि कष्टों के बावजूद यह संस्कृति अपने ताने-बाने से छिन्न-भिन्न नहीं हो सकी है। मगर निरंतर जारी प्रहारों से एकबारगी चितिंत होना स्वाभाविक है। ‘उदय दिनमान’ का प्रयास है कि राजनीति, समाज, संस्कृति, इतिहास, विकास व आर्थिकी पर निरंतर हो रहे आघातों से जनमानस को सजग रखने का प्रयास किया जाए। यह कहकर हम कोई बड़ा दंभ नहीं भर रहे हैं। यह हमारा मात्र एक लघु प्रयास भर है। हमारी अपेक्षा व आकांक्षा है कि हमारे इस प्रयास में आपकी भागीदारी ही नहीं सुनिश्चित हो, बल्कि आपके विस्तृत अनुभवों, विचारों, सुझावों व गतिविधियों का लाभ ‘उदय दिनमान’ के द्वारा व्यापक जनमानस तक पहुंचे। उक्त क्रम में ‘उदय दिनमान’ के प्रयासों को बल प्रदान करने के निमित आप अपने अनुभवों, सुझावों व विचारों को लेख अथवा यात्रावृत्त, संस्मरण, रिर्पोट, कथा-कहानी, कविता, रेखाचित्र, फोटो आदि के रूप में प्रेषित करने का कष्ट करें। संपर्क करें। https://www.udaydinmaan.com/ संतोष बेंजवाल संपादक कन्हैया विहार, निकट कारगी चैक, देहरादून (उत्तराखंड) udaydinmaan@gmail.com Phone:0135-3576257 Mob:+91.9897094986 Email: udaydinmaan@gmail.com