कोटा. जवाहर नगर थाना इलाके में ओपेरा हॉस्पिटल के पास गिरी बिल्डिंग का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है. राहत और बचाव कार्य के दौरान मलबे में दबने से दो बच्चों की मौत होने की सूचना सामने आई है. इस खबर के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल और गहरा गया है. प्रशासन की ओर से रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है और हर संभावित बिंदु पर बारीकी से नजर रखी जा रही है.
कोटा बिल्डिंग हादसे में करीब 20 स्टूडेंट मलबे में दबे बताए जा रहे हैं. रेस्क्यू टीम ने अब तक 7 स्टूडेंट को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है. करीब 12 स्टूडेंट के अब भी दबे होने की आशंका जताई जा रही है, जबकि एक स्टूडेंट की मौत की सूचना मिली है. राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है.
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अब तक मलबे से पांच लोगों के शव निकाले जा चुके हैं. प्रशासन का कहना है कि जिस तरह से बिल्डिंग गिरी है, उसे देखते हुए यह आशंका बनी हुई है कि कुछ और लोग भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं. इसलिए राहत और बचाव कार्य को लगातार जारी रखा गया है. मलबा हटाने का काम सावधानीपूर्वक किया जा रहा है, ताकि किसी फंसे हुए व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके.
घटना की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर खुद मौके पर पहुंचे. मंत्री ने घटनास्थल पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस और राहत दल से पूरी जानकारी ली. इसके साथ ही उन्होंने मलबा हटाने और फंसे लोगों को बाहर निकालने के कार्य की लगातार मॉनिटरिंग शुरू कर दी है. मंत्री मदन दिलावर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राहत और बचाव कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही न हो और घायलों को तत्काल बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए.
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से दो बच्चों के शव मिलने की जानकारी सामने आई है. बताया जा रहा है कि बिल्डिंग गिरने के समय ये बच्चे भी अंदर मौजूद थे और मलबे में दब गए. इस दुखद खबर के बाद स्थानीय लोग और परिजन सदमे में हैं. घटनास्थल पर मौजूद कई लोगों की आंखें नम हैं और हर कोई राहत कार्य की ओर टकटकी लगाए हुए है.
इस हादसे में घायल हुए लोगों को तुरंत एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया है. अब तक करीब एक दर्जन घायलों के इलाज की जानकारी सामने आई है. घायलों में कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है. ओपेरा हॉस्पिटल और आसपास के अन्य अस्पतालों में डॉक्टरों की टीम अलर्ट पर है.
इस हादसे में अब तक सात घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा चुका है. इनमें से दो बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. अन्य घायलों का इलाज सरकारी अस्पताल में चल रहा है. डॉक्टरों की टीम लगातार घायलों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक चिकित्सा सहायता दी जा रही है.
घटना की जानकारी मिलते ही जवाहर नगर थाना पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची. पुलिस ने सबसे पहले आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित किया और लोगों को घटनास्थल से दूर रहने की अपील की. एहतियात के तौर पर बिल्डिंग के आसपास की सड़क पर आवाजाही को सीमित किया गया, ताकि राहत और बचाव कार्य में कोई बाधा न आए. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों से भी जानकारी जुटानी शुरू की.
बिल्डिंग गिरने की इस घटना को लेकर यह भी आशंका जताई जा रही है कि मलबे से घायल लोगों या मृतकों के शव निकल सकते हैं. स्थानीय सूत्रों का कहना है कि हादसे के समय बिल्डिंग के आसपास कुछ लोग मौजूद थे. ऐसे में मलबे के नीचे दबे लोगों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इसी कारण पुलिस और प्रशासन स्थिति को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू की जांच में जुटे हैं.
बिल्डिंग गिरने के इस मामले में अब सभी की नजरें प्रशासन और पुलिस की आधिकारिक जानकारी पर टिकी हैं. यह साफ होना बाकी है कि मलबे के नीचे वास्तव में कितने लोग दबे हैं, कितने घायल हुए हैं या किसी की जान गई है या नहीं. फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आगे की जानकारी का इंतजार किया जा रहा है.

