कोरोना: गर्मियों की छुट्टियों में बरतें सावधानी

नई दिल्ली: गर्मियों की छुट्टियों में हर कोई हिल स्टेशन पर जाकर प्रकृति का आनंद लेना चाहता है। हालांकि इस बार इन जगहों पर कोरोना संक्रमण का प्रसार अधिक होने की वजह से दिक्कतें आ सकती हैं। ऐसे में डॉक्टरों का कहना है कि छुट्टियों पर जाने के लिए लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।

आंकड़ों की मानें तो हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड के अलावा पूर्वोत्तर राज्यों के कई जिलों में संक्रमण अधिक है। हिमाचल प्रदेश के छह और जम्मू कश्मीर के तीन जिलों में कोरोना का साप्ताहिक संक्रमण 11 से 28 फीसदी तक है। इसी तरह उत्तराखंड के पांच जिलों में संक्रमण का प्रसार 40 फीसदी तक दर्ज किया गया है।

केरल में बीते सप्ताह 11,296 नए कोविड मामले दर्ज किए गए। पिछले सप्ताह की तुलना में यह 2.4 गुना अधिक है। 4587 नए मामलों के साथ महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर हैं जहां 32 फीसदी की वृद्धि हुई है। दिल्ली में पिछले सप्ताह कोरोना मामलों में 94 फीसदी की वृद्धि हुई है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर, कांगड़ा, ऊना, सोलन, सिरमौर और हमीरपुर में संक्रमण क्रमश: 13.28, 13.06, 13.14, 11.35, 22.71 और 28 फीसदी है। इसी तरह जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में 27.91, बांदीपुरा में 24.56 और श्रीनगर में 18.35 फीसदी सैंपल बीते सप्ताह में संक्रमित मिले हैं। उत्तराखंड के चमोली में सर्वाधिक 40 फीसदी सैंपल पॉजिटिव मिल रहे हैं। पिथौरागढ़ में 20, देहरादून में 13.91, अल्मोड़ा में 13.16 और चंपावत में 10.71 फीसदी संक्रमण है।

देश में कोरोना का संक्रमण आठ सप्ताह बाद भी कम नहीं हुआ है। बीते तीन से नौ अप्रैल के बीच देश में 36,250 लोग कोरोना की चपेट में आए हैं, जबकि इससे पहले के सप्ताह में 20,293 लोग संक्रमित मिले थे। मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि बीते दिन कोरोना संक्रमण के चलते 5,676 नए केस सामने आए हैं। हालांकि बीते सोमवार को यह संख्या 5,880 थी। सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़कर 37,093 हो गई है।

कोरोना महामारी की तैयारियों की समीक्षा के लिए अस्पतालों में दो दिन की मॉकड्रिल सफल रही। मंगलवार को देश के 15 हजार से ज्यादा अस्पतालों ने मॉक ड्रिल में हिस्सा लिया, जबकि सोमवार को 10 हजार अस्पताल शामिल हुए थे। मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि सभी राज्यों में मॉक ड्रिल सफल रही है।

इस अभ्यास के बाद यह कहा जा सकता है कि महामारी से निपटने के लिए हमारे अस्पताल पूरी तरह तैयार हैं। दवाओं से लेकर ऑक्सीजन की आपूर्ति और बिस्तरों के अलावा वेंटिलेटर की तकनीकी खामियां भी दूर कर दी गई हैं। बीते वर्ष 27 दिसंबर को हुई मॉक-ड्रिल में करीब 15 फीसदी अस्पतालों में वेंटिलेटर की तकनीक परेशानियों से जुड़ी सूचनाएं मिली थीं।

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