कोरोना : तो भारत में जून के पहले सप्ताह में ही खुल पाएगा लॉकडाउन!

नई दिल्ली: विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में न्यूनतम लॉकडाउन 10 सप्ताह का होना चाहिए, अन्यथा इस अवधि के दौरान जो भी हासिल हुआ है, वह बेकार चला जाएगा और हम बहुत खराब स्थिति में होंगे.अगर लॉकडाउन नहीं बढ़ाया गया तो देश कोरोना वायरस के खिलाफ अपनी लड़ाई हार सकता है.

विशेषज्ञों की माने तो देश में अभी तक कोरोना संक्रमण को लेकर जो स्थिति है इस स्थिति को ओर ठीक करना है तो देश में कम से कम दस सप्ताह का लाॅकडाउन करना होगा ताकी हम अन्य देशों की तरह कोरोना संक्रमण मरीजों की जैसी स्थिति हमारे देश में न हो। इसके लिए देश में लाॅकडाउन बढ़ाया जाना अति आवश्यक है।

हॉर्टन ने बुधवार को कहा, “प्रत्येक देश में यह महामारी हमेशा के लिए नहीं रहेगी, यह अपने आप चली जाएगी. इसके प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए सभी देश सही काम कर रहे हैं. यदि भारत में लॉकडाउन सफल होता है, तो आप 10 सप्ताह के बाद महामारी में गिरावट देख सकते हैं.”

संयुक्त राज्य अमेरिका में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या सबसे ज्यादा है, बावजूद ​इसके उसने अभी तक देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा नहीं की है. कई राज्यों में राज्यपाल ने लोगों को घर पर रहने और सभी सार्वजनिक स्थानों को बंद करने का आदेश दिया है. लेकिन इसका भी विरोध हुआ.

खबरें आईं हैं कि अमेरिका में कई राज्यों में लोग लॉकडाउन खत्म करने की मांग करते हुए सड़कों पर उतर आए. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी लॉकडाउन खोलने के इच्छुक हैं, इस तथ्य के बावजूद कि वहां गुरुवार सुबह तक 8.5 लाख कोरोना के मामले दर्ज हो चुके हैं.

स्पेन दूसरा सबसे ज्यादा प्रभावित देश है. वहां अब तक दो लाख मामले सामने आ चुके हैं. यहां भी 14 मार्च से लॉकडाउन है. बुधवार को स्पेन की सरकार ने लॉकडाउन को 9 मई तक बढ़ा दिया. इस प्रकार स्पेन में लॉकडाउन कम से कम 57 दिनों तक चलेगा.

स्पेन के उत्तरी हिस्से के एक छोटे शहर हारो को 7 मार्च को ही बंद कर दिया गया था. इस शहर में लॉकडाउन 64 दिन तक चलेगा. 22 अप्रैल तक स्पेन में कोरोना के 2.08 लाख केस दर्ज हुए हैं.

इनमें से 86,000 स्वस्थ हो चुके हैं और 22,000 लोगों की मौत हो चुकी है. बचे हुए एक लाख मामलों में से 92 हजार ऐसे हैं जिनमें हल्का संक्रमण है.

इसी तरह इटली में 9 मार्च को देशव्यापी लॉकडाउन लागू हुआ था, जिसके 3 मई यानी 57 दिनों तक चलने की उम्मीद है. इटली में कोरोना के 1.87 लाख से अधिक मामले सामने आए हैं.

इनमें से 54,500 से अधिक ठीक हो चुके हैं और अब तक 25,000 मौतें हुई हैं. “वर्ल्डोमीटर” के अनुसार, इटली में 1.07 लाख एक्टिव केस हैं जिनमें से 98 फीसदी मामले हल्के संक्रमण के हैं.

फ्रांस ने मार्च के पहले सप्ताह में सख्त प्रतिबंध लगाया और 17 मार्च को देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की. फ्रांस में लॉकडाउन 11 मई तक यानी 56 दिन चलेगा. फ्रांस में 1.6 लाख कोरोनो वायरस केस सामने आए हैं.

इनमें से 40,657 लोग ठीक हो चुके हैं और 21,340 मौतें हुई हैं. यहां फिलहाल 97,000 से अधिक एक्टिव मामले हैं. इनमें 95 प्रतिशत मामले हल्के संक्रमण के हैं और 5 प्रतिशत की स्थिति​ गंभीर है.

चीन का वुहान शहर कोरोना वायरस का केंद्र था, जहां से कोरोना वायरस फैला. यहां पर 23 जनवरी से लेकर 8 अप्रैल तक लॉकडाउन रहा और चीन कोरोना को नियंत्रित करने में सफल रहा. जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के आंकड़ों के अनुसार, 8 अप्रैल को जिस दिन चीन ने वुहान में लॉकडाउन हटाया, तब तक देश में रिकवरी रेट यानी मरीजों के स्वस्थ होने की दर 93 प्रतिशत थी.

भारत में 23 अप्रैल (सुबह 8 बजे) तक कोरोना वायरस के 21,393 मामले दर्ज हो चुके हैं. अब तक यहां 681 मौतें हो चुकी हैं और रिकवरी रेट 20 प्रतिशत है. सरकार रणनीतिक रूप से वायरस से पीड़ित लोगों की जांच कर रही है.

भारत में 25 मार्च से राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन है जो कि 14 अप्रैल को समाप्त होने वाला था. हालांकि, प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण सरकार ने इसे 3 मई तक बढ़ा दिया है. 3 मई तक भारत 40 दिनों का लॉकडाउन पूरा कर लेगा.

अगर रिचर्ड हॉर्टन के 10 सप्ताह के लॉकडाउन के सुझाव पर विचार किया जाता है, तो भारत जून के पहले सप्ताह में ही खुल पाएगा. हॉर्टन ने कहा, “मैं समझता हूं कि आपको आर्थिक गतिविधि फिर से शुरू करनी है, लेकिन कृपया जल्दबाजी न करें… अगर आप लॉकडाउन हटाने में जल्दबाजी करते हैं और महामारी नये सिरे से सिर उठाती है तो यह पहले की तुलना में और भयानक होगी.”

हालांकि, चीन एकमात्र ऐसा देश नहीं है जिसने वायरस को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया और उसके बाद फिर से खुल गया. दक्षिण कोरिया ने सिर्फ सामूहिक परीक्षण किया और बिना किसी लॉकडाउन के कोरोना वायरस को नियंत्रित करने में सफल रहा.

सिंगापुर ने भी शुरुआत में ऐसा ही किया था, लेकिन देश को संक्रमण की दूसरी लहर का सामना करना पड़ा और तब से चार हफ्तों के लिए आंशिक लॉकडाउन लागू कर दिया गया. जर्मनी ने भी एक महीने के प्रतिबंध के बाद अपने नागरिकों को ढील दी है.

गौर करने वाली बात यह है कि 14 अप्रैल को जिस दिन भारत में लॉकडाउन खत्म होने वाला था, उस समय तक देश में 11,000 से ज्यादा कोरोना के मामले थे. उसी समय, ऑस्ट्रिया में 14,000 से अधिक मामले थे. लेकिन ऑस्ट्रिया ने 14 अप्रैल से छोटी दुकानों को फिर से खोलने की इजाजत दे दी क्योंकि वहां रिकवरी रेट 53 प्रतिशत थी.

इसलिए भारत में लॉकडाउन बढ़ाया जाएगा या हटा लिया जाएगा, यह कोरोना मरीजों की रिकवरी रेट, संक्रमण बढ़ने की दर और अन्य कारकों पर निर्भर करेगा.

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