हाथियों का खौफ: दहशत में 19 गांवों के लोग

कोटद्वार: कोटद्वार के लैंसडौन वन प्रभाग की तमाम कोशिशों के बाद भी आबादी क्षेत्र में हाथियों की आमद रुकने का नाम नहीं ले रही है। अब तो हाथी लोगों के खेत और आंगन में खतरा बनकर दस्तक दे रहे हैं।

हाथी झुंड में आकर धान की खेती नष्ट कर रहे हैं तो आंगन में उत्पात मचा रहे हैं। ऐसे में जंगल के निकटवर्ती 19 गांवों के लोग जंगली जानवरों के खौफ के साये में जीने के लिए मजबूर हैं।

वर्ष 2014 में हाथी को आबादी क्षेत्र में रोकने के लिए वन विभाग ने करीब 54 लाख रुपये की लागत से 11 किमी. हाथी सुरक्षा दीवार बनाई थी लेकिन सुरक्षा दीवार की ऊंचाई कम और गुणवत्ता की कमी के कारण हाथियों ने कई स्थानों पर दीवार तोड़कर आबादी में धमकने रास्ता बना दिया।

वर्ष 2018 में वन विभाग ने 19 लाख रुपये की लागत से आठ किमी लंबी सौर ऊर्जा बाड़ बनाई लेकिन देखरेख के अभाव में सौर ऊर्जा बाड़ कुछ ही महीनों में ठप हो गई। बाड़ में करंट नहीं होने के कारण हाथी ने ताड़बाड़ को तोड़ दिया।

वर्ष 2021 में क्षेत्रीय जनता की मांग पर प्रदेश सरकार ने लैंसडौन वन प्रभाग के जंगल से सटी आबादी क्षेत्र में 15 किमी दायरे में हाथी सुरक्षा दीवार बनाने के लिए 1.20 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे।

इसके लिए पहली किश्त के रूप में करीब 67 लाख रुपये भी जारी कर दिए गए। वन विभाग ने हाथी सुरक्षा दीवार बनाने का काम सिंचाई विभाग को भी सौंप दिया था लेकिन सुरक्षा दीवार को लेकर विभागीय जांच होने के कारण हाथी सुरक्षा दीवार का काम बंद पड़ा है।

लैंसडौन वन प्रभाग के जंगलों से लगे सत्तीचौड़, शिवपुर, लालपुर, ध्रुवपुर, अपर कालाबड़, फारेस्ट कालोनी, झंडीचौड़, खुनीबड़, मवाकोट, सिगड्डी, कण्वाश्रम, रतनपुर, सनेह, ग्रास्टनगंज, कुंभीचौड़, रतनपुर, लालपानी, कोटडीढांग और रामपुर में हाथियों की आमद लगातार बनी रहती है।

यह बात सही है कि हाथी आबादी क्षेत्र में धमक कर लोगों की खेती नष्ट कर रहे हैं। हाथी बाहुल्य क्षेत्र में हाथी सुरक्षा दीवार बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट आते ही सुरक्षा दीवार निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा।
– दिनकर तिवारी, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग।

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