गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा बदरीनाथ धाम के लिए रवाना

देहरादून: बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रकिया शुरू हो गई है. ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती आज आठ अप्रैल को गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा में सम्मिलित हुए. आज कलश यात्रा का रात्रि विश्राम लक्ष्मण झूले के पास स्थित शत्रुध्न मंदिर में होगा. यह गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा लक्ष्मीनारायण मंदिर डिम्मर ज्योतिर्मठ से होते हुए कपाट खुलने से पहले बदरीनाथ धाम पहुंच जाएगी. इसके बाद ही 23 अप्रैल को सुबह 6.15 बजे मंदिर के कपाट खोले जाएंगे. इस महोत्सव के आयोजक केंद्रीय धार्मिक डिमरी पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी ने आज शंकराचार्य का आशीर्वाद प्राप्त कर किया.

इस मौके पर शंकराचार्य जी महाराज ने बताया कि जो पुण्य भगवान बदरी नारायण के दर्शन से मिलता है, वहीं दिव्य पुण्य इस पवित्र तेल कलश के दर्शन करने से मिलता है. बता दें कि डिमरी धार्मिक पंचायत के पदाधिकारी बीते दिन मंगलवार सात अप्रैल को टिहरी राज दरबार नरेंद्र नगर पहुंचे थे. राज दरबार नरेंद्र नगर में ही महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह सहित सुहागिन महिलाओं ने तिलों को पिरोकर तेल का कलश श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत को सौंपा था. वहीं कलश कल ऋषिकेश पहुंचा था. इसके बाद आज ये यात्रा ऋषिकेश से रवाना हुई.

मान्यता के अनुसार इन्हीं तिलों के तेल से कपाट खुलने के दौरान भगवान बदरी विशाल का अभिषेक किया जाता है. नरेंद्र नगर से चलने के बाद तेल कलश यात्रा का पहला रात्रि विश्राम पड़ाव ऋषिकेश होता है. ऋषिकेश के बाद दूसरा रात्रि विश्राम श्री शत्रुघ्न मंदिर लक्ष्मण झूले के पास स्थित शत्रुध्न मंदिर होता है. इसके बाद अगले दिन यानी 9 अप्रैल को तेल कलश यात्रा श्री शत्रुघ्न मंदिर से श्रीनगर गढ़वाल के लिए प्रस्तान करेंगी. 9 अप्रैल को ही तेल कलश यात्रा श्रीनगर गढ़वाल पहुंच जाएगी.

भगवान बदरीविशाल के अभिषेक प्रयुक्त तेल कलश कुछ दिनों तक डिमरी तीर्थ पुरोहितों के मूल गांव डिम्मर स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में रखा जाएगा, जहां इसकी प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी. इसी तरह यात्रा की निर्धारित तिथियों में तेल कलश पाखी गरूड़ गंगा होते हुए 20 अप्रैल को श्री नृसिंह मंदिर ज्योतिर्मठ पहुचेंगा. 21 अप्रैल को रविग्राम पांडुकेश्वर में रात्रि विश्राम रहेगा. तेल कलश 22 अप्रैल की शाम तक श्री बदरीनाथ धाम पहुंच जाएगा. इसके बाद 23 अप्रैल से सुबह भगवान बदरीविशाल के कपाट खुलेंगे.

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