पहाड़ की कर्मशील नारियों ने रचा है इतिहास : नरेंद्र सिंह नेगी

बीना बेंजवाल की पुस्तक का दून विश्वविद्यालय का लोकार्पण
देहरादून। बीना बेंजवाल द्वारा लिखित और विनसर पब्लिशिंग कंपनी द्वारा प्रकाशित पुस्तक उत्तराखण्ड की महिलाएँ : संघर्ष और उपलब्धियों का परिचयात्मक संचयन* के लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रसिद्ध गीतकार एवं लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि अपने -अपने क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाली 351 महिलाओं के बारे में लिखी गई यह पुस्तक शोधार्थियों को एक संदर्भ पुस्तक के रूप में काम आयेगी। श्री नेगी ने कहा कि इस पुस्तक में कई ऐसी महिलाओं का उल्लेख है, जिनके बारे में कई लोग जानते तक नहीं हैं। यह पुस्तक हमारे समाज का आईना है, जहां पहाड़ की नारियों ने अपने कर्म कौशल से इतिहास रचा है।
दून विश्वविद्यालय में आयोजित इस लोकार्पण समारोह की मुख्य अतिथि प्रो. सुरेखा डंगवाल, कुलपति, दून विश्वविद्यालय ने कहा कि इस संकलित पुस्तक में राजनीति, शिक्षा, शासन-प्रशासन, पर्यावरण, समाज सेवा, सामाजिक आंदोलन, उद्यमिता, पर्वतारोहण, खेल, योग व जीवन कौशल, कला, रंगमंच व फिल्म, संगीत व गायन, साहित्य, पत्रकारिता तथा विज्ञान के क्षेत्र की विभूतियों और प्रेरणादायी महिलाओं के संघर्षशील जीवन और उपलब्धियों की जानकारी दी गई है।
प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि यह हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड का समाज महिलाओं के प्रति अत्यंत सहिष्णु है, यही कारण है कि यहां की महिलाएं जो ठान लेती हैं, वह लक्ष्य हासिल करने की क्षमता रखती हैं। उनके पास स्वाभाविक नेतृत्व डीएनए है। यह पुस्तक इस तथ्य को दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करती है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. जयवंती डिमरी ने कहा कि महिलाओं पर अभी तक प्रकाशित पुस्तकों में यह सबसे बड़ा संकलन है। पुस्तक की लेखिका बीना बेंजवाल ने कहा कि इस पुस्तक के संकलन की प्रेरणा महामहिम राज्यपाल उत्तराखण्ड ले. जन. (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने दी थी। इसमें 60 दिवंगत महिला विभूतियों और 291 कार्यशील प्रतिभाओं की जानकारी दी गई है।
प्रो. डिमरी ने सिस्टरहुड की जरूरत को रेखांकित करते हुए कहा कि महिलाओं के योगदान का रेखांकन आज के वक्त की बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में पढ़ने की प्रवृत्ति घट रही है, फिर भी पुस्तकों का अपना महत्व है और वह हमेशा बना रहेगा। संकलन में कुछ चर्चित महिलाओं की जानकारी छूट भी गई हैं। आगे के संस्करण में उन्हें जोड़ा जाएगा। कार्यक्रम का संचालन गणेश खुगशाल ‘गणी’ ने किया।
समारोह में रमाकान्त बेंजवाल, मदनमोहन डुकलान, कुलानंद घनशाला, बलवीर राणा अडिग, शूरवीर सिंह रावत, डा. ओम बधाणी, आशीष सुन्दरियाल, सुमित्रा जुगलान, कांता घिल्डियाल, रश्मि बसलियाल, रक्षा बौड़ाई, बीना कण्डारी, मधुरवादिनी तिवारी, जे.पी. बेंजवाल, भगवती सुन्दरियाल, सोनिया गैरोला, अंजना कण्डवाल, बीना कण्डारी, शांति बिंजोला, उषा नेगी आदि साहित्यकार उपस्थित थे।

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