भारी बारिश-भूस्खलन और बाढ़ का तांडव,बीस घर बहे, बीस जिंदा दफन

उदय दिनमानः आसमान से बरपी आफत ने वीस लोग काल के ग्रास बन गए। विश्व में अलग-अलग भागों ने प्रकृति ने तांडव मचाया। नेपाल में भारी बारिश और भूस्खलन से 20घर बहने से छह लोग जिंदा दफन हो गये। वही जापान में भी बारिश का तांडव मचा। देश में 14 लोगों की मौत हो गयी।

भूस्खलन से 20 घर बहे, एक ही परिवार के छह लोग जिंदा दफन 

काठमांडो: पश्चिमी नेपाल में मूसलाधार बारिश के कारण हुए भूस्खलन में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई जबकि तीन अन्य लापता हैं। पुलिस ने बताया कि भूस्खलन बाजहांग जिले के मल्लेसी गांव में अपराह्न करीब दो बजे हुआ। पुलिस ने बताया कि दो बच्चों सहित चार लोगों की मौत हो गई जबकि तीन अन्य लापता हैं। कई मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नेपाल पुलिस और नेपाल की सेना राहत कार्यों में जुटी हुई है।

नेपाल के बझांग जिले के केदारसु नगर पालिका वार्ड नंबर आठ के मल्लेसी में भूस्खलन से एक परिवार के छह लोग जिंदा दफन हो गए, जबकि एक व्यक्ति लापता है। छह लोगों के शव नेपाल प्रहरी ने बरामद कर लिए हैं। 

नेपाल प्रभारी से मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार रात हुई बारिश के साथ गांव के ऊपर से आए भूस्खलन ने केदारसु नगरपालिका आठ के मल्लेसी में 20 घरों को बहा दिया था। रात में भूस्खलन की जानकारी के बाद घर के अंदर मौजूद अन्य लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई, लेकिन भूस्खलन में सात लोग दब गए। इनमें डेल जेथरा (81), देवी जेथरा (43) शांति जेथरा (16), प्रयाग जेथरा (16), संतू जेठारा (15), अस्मिता जेथरा (13) के शव मिल गए हैं, जबकि गिरी जेथरा अभी लापता है।

भूस्खलन ने 22 भैंसों, 65 बकरियों और 24 गायों को भी बहा दिया। भूस्खलन के बाद बस्ती के मध्य हिस्से में 65 परिवार रह रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, भूस्खलन से खेती करने और खेती करने वाली करीब आधी जमीन भूस्खलन की जद में आई है।

इस बार मानसून में न सही, लेकिन अगले मानसून में उत्तराखंड में मौसम को पढ़ पाना वैज्ञानिकों के लिए और आसान हो जाएगा। अगले साल प्रदेश में दो डॉप्लर रडार काम करना शुरू कर देंगे। जिसके बाद मौसम की स्थानीय स्तर पर भविष्यवाणी और अधिक सटीक हो जाएगी। विश्व बैंक के सहयोग से प्रदेश में उत्तराखंड हाइड्रोमेट परियोजना शुरू की गई थी।

इसमें भारतीय मौसम विभाग से एमओयू किया गया था। इसके तहत प्रदेश में करीब 180 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और रेन गेज या बारिश मापी स्थापित किए गए हैं। इस समय इनमें से 100 से ज्यादा केंद्रों से जानकारी मिलने लगी है और आईएमडी को डाटा भी भेजा जा रहा है। इसका सबसे अधिक फायदा चार धाम यात्रियों को होगा।
 
वहीं, अच्छी खबर यह भी है कि मुक्तेश्वर में स्थापित डॉप्लर रडार से अब टेस्टिंग शुरू कर दी गई है। इसी तरह प्रदेश में एक और डॉप्लर रडार स्थापित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले मानसून में इन दोनों के शुरू होने से मौसम का अंदाजा लगाने में खासी आसानी हो जाएगी।

राज्य आपदा प्रबंधन के अधिकारियों के मुताबिक हाइड्रोमेट के तहत 100 और ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन व रेन गेज स्थापित करने का प्रस्ताव आईएमडी को भेजा जा चुका है। जिससे स्थानीय मौसम का अनुमान लगाना काफी आसान हो जाएगा।

अभी हम आईएमडी पूना को डाटा भेज रहे हैं। फॉरकास्ट का अधिकार उन्हीं का है। इतना जरूर है कि सौ से अधिक स्टेशन से डाटा जारी होने से फॉरकास्टिंग और अधिक सही हुई है।गिरीश चंद्र जोशी, वरिष्ठ परामर्शदाता, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण

भारी बारिश और बाढ़ का तांडव, अब तक 14 की मौत
टोकियो:
जापान के क्यूशू द्वीप पर लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण आई बाढ़ में अबतक 14 लोगों की मौत हो गई है। द्वीप पर भारी बारिश और भूस्खलन के कारण आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। बाढ़ के कारण स्थानीय प्रशासन ने लाखों लोगों को अपने घरों को खाली कर सुरक्षित स्थान पर जाने का आदेश जारी किया है।

बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने सेना के 10000 जवानों को राहत और बचाव कार्य के लिए तैनात किया है। कूमा नदी का जलस्तर अब भी खतरे के निशान से ऊपर है। वहीं रविवार और भारी बारिश का अनुमान जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

जापाानी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ से कुमामोटो और कगोशिमा प्रांत के लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। हिटामोशी, यत्सुशिरो और कुमामोटो के कई गावों में लोग सड़कों के बाढ़ में बह जाने के कारण फंसे हुए हैं। पुलिस, फायर ब्रिगेट और सेना के जवान फंसे हुए लोगों को बचाने के प्रयास में दिन रात मेहनत कर रहे हैं।

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