तेहरान: अमेरिका ने दावा किया है कि वो अभी तक ईरान के 16 उन जहाजों को डुबो चुका है जो होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंग बिछा रहे थे। अंदाजा है कि ईरान के पास 2000 से 6000 नेवल माइन हैं और सीएनएन की एक रिपोर्ट में दो आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ईरान ने समंदर में कई दर्जन बारूदी सुरंग अभी तक बिछा दिए हैं। हालांकि अभी तक इनकी संख्या दर्जनों में ही है लेकिन ईरान की क्षमता इसे काफी तेजी से कई और और हजार तक ले जान की है।
हालांकि अमेरिका ने ईरान के कई जहाजों को डुबोया है लेकिन ईरान की नौसेना के पास करीब 80 से 90 प्रतिशत छोटे जहाज, छोटे नाव और माइन लेयर्स हैं, जिनके जरिए वो बिजली की रफ्तार से पानी के रास्ते में सैकड़ों माइन बिछा सकता है। होर्मुज स्ट्रेट को ईरान पहले ही ब्लॉक कर चुका है और इक्का दुक्का जहाज भी उस रास्ते से गुजर पा रहे हैं। जिससे दुनियाभर में तेल और गैस का संकट शुरू हो गया है। होर्मुज से दुनिया का 20 प्रतिशत लिक्विड गैस की सप्लाई की जाती है।
रविवार को जारी US एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध शुरू होने से पहले 27 फरवरी को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 71.32 डॉलर प्रति बैरल थी जो बुधवार को 94.35 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल को पार कर सकता है। ऐसी धमकी वजह होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से ब्लॉक करने की उसकी क्षमता है।
ईरान के पास कई तरह के समुद्री प्लेटफॉर्म हैं जिनके जरिए वो पानी में बारूदी सुरंग बिछा सकता है। जिनमें माइन बिछाने वाले क्राफ्ट, विस्फोटकों से भरी नावें और किनारे पर मौजूद मिसाइल बैटरी हैं। अमेरिका ने कहा है कि वह कमर्शियल समुद्री ट्रैफिक को आगे बढ़ाने के ऑप्शन पर काम कर रहा है। अमेरिका के जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन ने एक ब्रीफिंग में कहा कि पेंटागन “होर्मुज को सुरक्षित बनाने के लिए कई तरह के विकल्पों पर काम कर रहा है।”
समुद्र से सिर्फ व्यापार ही नहीं होते हैं बल्कि समुद्र के नीचे विशालकाय और उलझा हुआ जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी है। जिसमें उत्तरी अमेरिका से यूरोप और एशिया तक मिड-अटलांटिक समुद्र तल पर लगभग लाखों मील तक फैले केबल नेटवर्क हैं। अगर ये टूटते हैं तो दुनिया ही ठप पड़ जाएगी। ऐसे सिस्टम में रुकावट से कम्युनिकेशन, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन, बिजली और भी बहुत कुछ पर बहुत बुरे नतीजे हो सकते हैं।ईरान जानता है कि वो पारंपरिक युद्ध में अमेरिका के सामने टिक नहीं पाएगा इसीलिए वर्षों से वो छापामार युद्ध की तैयारी करता आ रहा था। अब वो अपने उसी युद्ध नीति को अपना रहा है।
नाविकों के लिए खतरा कम करने के लिए बिना पायलट वाले जहाजों को लंबे समय से समुद्री माइन क्लियरेंस मिशन में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इजरायल करीब दो दशकों से USVs को डेवलप और मैन्युफैक्चर कर रहा है, जिसमें कई कंपनियां अलग-अलग प्लेटफॉर्म लगा रही हैं। इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) के पास कटाना USV और ब्लू व्हेल बिना पायलट वाली पनडुब्बी है। वहीं राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स के पास प्रोटेक्टर है और एल्बिट सिस्टम्स के पास सीगल USV है। इन्हें समुद्री बारूदी सुरंगों का खतरा कम करने के लिए ही डिजाइन किया गया है।
अमेरिकी नौसेना भी USVs पर काम कर रही है। जुलाई में उसने घोषणा की थी कि वह ऐसे USVs पर काम कर रही है जो समुद्र में हजारों मील दूर तक मिसाइलों समेत बड़े पेलोड ले जा सकें। यूएस नेवी के मुताबिक मॉड्यूलर अटैक सरफेस क्राफ्ट (MASC) प्रोग्राम में तेजी लाई गई है। ज्यादा क्षमता वाले एम्बार्क्ड पेलोड प्लेटफॉर्म की जरूरत के लिए एक हाई-एंड्योरेंस USV होगा।
