नई दिल्लीः भारत अपनी रक्षा के लिए अहम कदम उठा रहा है, इसी कड़ी में रक्षा मंत्रालय के रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा किया है. दुनिया के सबसे बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम S-400 सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए 288 मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी है. इसके लिए भारत ने रूस से ₹10,000 करोड़ की लागत का डील की है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद एस-400 मिसाइलों का स्टॉक कम हो गया था. सेना एस-400 के स्टॉक में ज्यादा लॉन्ग और शॉर्ट रेंज की मिसाइलें रखना चाहती है, जिसमें है.नई मंजूरी के तहत 120 शॉर्ट रेंज और 168 लॉन्ग रेंज की मिसाइलें खरीदी जाएंगी. भारत को इसी साल जून और नवंबर में एस-400 के दो बचे हुए स्क्वाड्रन भी रूस से मिलने वाले हैं.
S-400 रूस द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (Surface-to-Air Missile System) है. यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम में से एक माना जाता है, और भारत ने इसे अपनी वायु रक्षा को मजबूत करने के लिए खरीदा है. भारत में इसे सुदर्शन चक्र नाम से भी जाना जाता है.
भारत ने अक्टूबर 2018 में रूस के साथ 5.43 बिलियन डॉलर (लगभग ₹40,000 करोड़) का सौदा किया था, तब कुल 5 स्क्वाड्रन (रेजिमेंट) खरीदे.2025-2026 तक भारत ने कई स्क्वाड्रन तैनात कर दिए हैं, खासकर चीन और पाकिस्तान सीमा पर। यह सौदा अमेरिकी CAATSA प्रतिबंधों के बावजूद किया गया. 2025 में भारत ने इसका इस्तेमाल Operation Sindoor में सफलतापूर्वक किया.
S-400 एक मोबाइल सिस्टम है, जिसमें रडार, कमांड सेंटर और मिसाइल लॉन्चर शामिल होते हैं. यह कई तरह के हवाई खतरों से निपट सकता है. यह रडार 600 किमी तक लक्ष्य का पता लगा सकता है. यह बहुत दूर से ही दुश्मन के विमान/मिसाइल को मार गिरा सकता है.
S-400 की मिसाइलें Mach 14 लगभग 17,000 km/h तक की स्पीड से जा सकती हैं. यह 5 मिनट में तैनात हो जाता है, आसानी से स्थान बदल सकता है. वर्तमान में S-400 को अभी भी दुनिया के सबसे उन्नत लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम में टॉप रैंक दिया जाता है

