इस्राइल:ब्रिटेन और नॉर्वे की सेनाओं ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में बड़ा सैन्य अभियान चलाकर रूसी पनडुब्बियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। रक्षा मंत्री जॉन हीली के अनुसार, रूस की तीन पनडुब्बियां समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स और गैस पाइपलाइनों के पास संदिग्ध गतिविधियों में लगी थीं, जिन्हें ब्रिटिश जहाजों और विमानों ने घेर लिया। ब्रिटेन ने रूस को साफ चेतावनी दी है कि समुद्र के नीचे मौजूद इन महत्वपूर्ण संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि हिजबुल्लाह के खिलाफ उनके हमले रुकने वाले नहीं हैं। लेबनान में हुए भीषण हमलों के बाद नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइली सेना पूरी ताकत और सटीक रणनीति के साथ हिजबुल्लाह को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि जो कोई भी इस्राइली नागरिकों को नुकसान पहुंचाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। नेतन्याहू ने आगे कहा कि जब तक उत्तरी इस्राइल के निवासी अपने घरों में सुरक्षित वापस नहीं लौट जाते, तब तक हिजबुल्लाह के ठिकानों पर जहां भी जरूरी होगा, हमला जारी रहेगा। नेतन्याहू के बयान ने पश्चिम एशिया में एक बार फिर से तनाव बढ़ा दिया है।
सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान बिन अब्दुल्लाह को ईरान के विदेश मंत्री अब्दुल्ला अराघची का फोन आया। सऊदी विदेश मंत्रालय के ट्वीट के अनुसार इस बातचीत के दौरान दोनों ने हाल की परिस्थितियों की समीक्षा की और क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बहाल करने के लिए तनाव कम करने के उपायों पर चर्चा की।
इस्राइली सेना इस्राइल डिफेंस फोर्सेज ने दावा किया है कि उसने लेबनान में हिजबुल्ला से जुड़े महत्वपूर्ण ठिकानों और नेटवर्क को निशाना बनाया है। आईडीएफ के अनुसार, अली यूसुफ हर्शी, जो हिजबुल्ला के महासचिव नईम कासिम के निजी सचिव और करीबी सलाहकार थे, संगठन के संचालन में अहम भूमिका निभाते थे।
सेना का कहना है कि हर्शी कासिम के कार्यालय के प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े प्रमुख काम संभालते थे, जिससे उनकी संगठन में महत्वपूर्ण स्थिति थी। इसके अलावा, इस्राइली सेना ने दक्षिण लेबनान में लितानी नदी के दक्षिण हिस्से में हिजबुल्ला द्वारा हथियारों के परिवहन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले दो अहम मार्गों को भी निशाना बनाया। आईडीएफ ने दावा किया कि इस कार्रवाई में करीब 10 हथियार भंडारण केंद्र, लॉन्चर और कमांड सेंटर भी तबाह किए गए हैं।
स्पेन ने ईरान की राजधानी तेहरान में अपना दूतावास दोबारा खोलने का फैसला किया है। स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बेरेस ने कहा कि उन्होंने तेहरान में अपने राजदूत को वापस लौटने और पदभार संभालने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि स्पेन इस कदम के जरिए क्षेत्र में शांति प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। अलबारेस ने कहा हम हर संभव स्तर पर शांति बहाल करने की कोशिशों में शामिल होंगे, जिसमें तेहरान से भी पहल की जाएगी।
ईरान के पाकिस्तान में राजदूत रजा अमीरी मोघदम ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट को हटाकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है। दरअसल, राजदूत ने पहले अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर जानकारी दी थी कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के साथ युद्धविराम वार्ता के लिए पाकिस्तान का दौरा करेगा। इस पोस्ट में कहा गया था कि प्रतिनिधिमंडल उसी रात इस्लामाबाद पहुंचेगा। हालांकि, कुछ ही समय बाद यह पोस्ट प्लेटफॉर्म से गायब हो गया। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या वार्ता की योजना में कोई बदलाव हुआ है या कूटनीतिक स्तर पर कोई नई रणनीति तैयार की जा रही है।
पोस्ट हटाए जाने के पीछे फिलहाल कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कदम अक्सर संवेदनशील कूटनीतिक बातचीत के दौरान उठाए जाते हैं, जहां सूचनाओं को लेकर सतर्कता बरती जाती है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। लेबनान के दक्षिणी शहरों पर इस्राइली हमले जारी हैं। अल-जजीरा अरबी की रिपोर्ट के अनुसार, इस्राइल ने लेबनान के दक्षिणी शहर हब्बूश पर हमला किया। इससे पहले हारूफ और अल दुवैर में भी इस्राइली हमले दर्ज किए गए थे।
ईरान के पाकिस्तान में राजदूत रेजा अमीरी मोगादम ने बताया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल आज रात इस्लामाबाद के लिए रवाना होगा। प्रतिनिधिमंडल ईरान की 10-बिंदु शांति योजना पर आधारित वार्ता करेगा। मोगादम ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि इस कदम के बावजूद ईरानियों में इस बात को लेकर संदेह है कि इस्राइली सरकार कूटनीतिक पहल को विफल करने का प्रयास कर सकती है।
ब्रिटिश विदेश सचिव इवेट कूपर ने कहा कि अमेरिकी-ईरान सीजफायर में लेबनान को भी शामिल किया जाना चाहिए, जहां इजरायल ने घातक हमले जारी रखे हैं। कूपर ने रॉयटर्स को बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से मालवाहन शिपिंग शुल्क-मुक्त होनी चाहिए, और ईरान द्वारा संभावित शुल्क लगाने की रिपोर्टों को खारिज किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंपने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक बयान देते हुए कहा कि अमेरिका की सैन्य ताकत ईरान और उसके आस-पास तब तक मौजूद रहेगी जब तक असल समझौते का पूर्ण पालन नहीं हो जाता।
ट्रंप ने कहा इसमें अमेरिकी जहाज, विमान और सैनिक शामिल होंगे, साथ ही अतिरिक्त गोला-बारूद, हथियार और वह सब कुछ जो दुश्मन के कमजोर किए गए ढांचे को पूरी तरह नष्ट करने के लिए जरूरी हो। राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि समझौते का पालन किसी भी कारण से नहीं हुआ, तो कार्रवाई बड़ी, मजबूत और ऐसी होगी जो किसी ने पहले कभी नहीं देखी।ट्रंप ने आगे कहा यह लंबे समय पहले तय हुआ था और सभी झूठी बातें और बयानबाजी के बावजूद कोई परमाणु हथियार नहीं होंगे और होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह सुरक्षित और खुला रहेगा।
