जम्मू सहित कई जिलों में धारा 144, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती नजरबंद !

कई जिलों में इंटरनेट, केबल टीवी और स्कूल-कॉलेज सहित सभी शैक्षणिक संस्थान बंद
उमर ने ट्वीट किया- मुझे और अन्य नेताओं को नजरबंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई
महबूबा मुफ्ती ने कहा- हालात मुश्किल हैं, लेकिन कोई हमारी प्रतिबद्धता को तोड़ नहीं पाएगा
महबूबा मुफ्ती ने सर्वदलीय बैठक बुलाई, इसमें फारूक अब्दुल्ला, सज्जाद लोन, उमर अब्दुल्ला मौजूद रहे
रविवार को गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बीच बैठक हुई

श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला को नजरबंद कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि इन दोनों के साथ-साथ सज्जाद लोन को भी नजरबंद किया गया। राज्य के कई जिलों में धारा-14 लागू कर दी गई है। इसके अलावा घाटी में मोबाइल इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई है। राज्य के स्कूल और कॉलेज को भी बंद किया गया। राज्य में सचिवालय, पुलिस मुख्यालय, एयरपोर्ट और अन्य संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई।

इसी बीच महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर कहा- हालात मुश्किल हैं, लेकिन कोई हमारी प्रतिबद्धता को तोड़ नहीं पाएगा। वहीं, उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि मुझे और अन्य नेताओं को नजरबंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रविवार को राज्य के तनावपूर्ण हालात को लेकर सर्वदलीय बैठक की। बैठक में नेशनल कांफ्रेस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भारत और पाकिस्तान से अपील की कि वे ऐसे कदम न उठाएं, जिससे राज्य में तनाव की स्थिति बने।

फारूक ने कहा कि हम सब मिलकर राज्य के विशेष दर्जे की हिफाजत करेंगे। बैठक मेें मौजूदा हालात और आर्टिकल 35 ए पर भी चर्चा हुई।अमरनाथ यात्रा के दौरान पाक में बनी बारूदी सुरंग और स्नाइपर राइफल मिलने और नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ के इनपुट्स के बाद खुफिया एजेंसियों ने बड़े आतंकी हमले की आशंका व्यक्त की थी। पर्यटकों को वापस लौटने की एडवायजरी जारी की गई थी।

नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्‍दुल्‍ला ने सर्वदलीय बैठक के बाद कहा, “कश्‍मीर में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। कश्‍मीर के लिए सबसे बुरा वक्‍त है। 30 साल में कभी अमरनाथ यात्रा नहीं रोकी गई। भारी संख्‍या में फोर्स की तैनाती से घाटी के लोग घबराए हुए हैं।” उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख की पहचान और स्पेशल स्टेट्स की सुरक्षा को लेकर यह बैठक आयोजित की गई थी।

इससे पहले महबूबा ने ट्वीट कर केंद्र पर अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों को वापस जाने की बात कहकर डर का माहौल और तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में कश्मीरियों को न कोई राहत दी गई और न ही कोई सुरक्षा। उन्होंने लिखा, “अमरनाथ यात्रियों, पर्यटकों, मजदूरों, छात्रों और क्रिकेटरों को कश्मीर छोड़ने को कहा गया। इससे सिर्फ भय का माहौल और दबाव बनाया गया।”

महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को ट्वीट कर कहा था कि जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति को लेकर छेड़छाड़ करने के मुद्दे पर सभी दलों को एक साथ मिलकर काम करना चाहिए। जम्मू-कश्मीर की हालिया स्थिति से सिर्फ भय का माहौल बनता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र ने अभी तक कोई स्पष्ट बयान जारी नहीं किया है।

महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया था, हालांकि यह गठबंधन पिछले साल ही टूट गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पूर्व सहयोगी दल राज्य में अनुच्छेद 35ए के खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने पिछले हफ्ते कहा था कि 35ए के साथ छेड़छाड़ करना बारूद को हाथ लगाने जैसा होगा। इसके लिए जो हाथ उठेगा वो हाथ नहीं पूरा जिस्म जलकर राख हो जाएगा।

अनुच्छेद-35ए धारा 370 का एक हिस्सा है, जो कश्मीर के लोगों को विशेष अधिकार देता है। इस अनुच्छेद के तहत जम्मू-कश्मीर सरकार राज्य के नागरिकों को पूर्ण नागरिकता प्रदान करती है। राज्य के बाहर का कोई भी व्यक्ति यहां किसी प्रकार की संपत्ति नहीं खरीद सकता है। यहां की महिला से शादी के बाद उसकी संपत्ति पर अपना हक भी नहीं जमा सकता है। इस कानून को लेकर लंबे समय से विवाद है और इस पर कई तरह की बयानबाजियां होती रही हैं।

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