लॉकडाउन: राजस्थान में धज्जियां उड़ीं, हजारों छात्र बस स्टैंड पर इकट्ठा हुए

कोटा. लॉकडाउन के दौरान राजस्थान में फंसे उत्तरप्रदेश के करीब साढ़े 7 हजार कोचिंग छात्रों को लेने के लिए शुक्रवार को यूपी सरकार ने 252 बसें कोटा भेजी। ये सभी छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारियों के लिए कोटा में कोचिंग कर रहे हैं। वहीं के होस्टलों और पीजी में रह रहे हैं।

गुरुवार को राजस्थान और यूपी सरकार ने कोटा में फंसे छात्रों को वापस लाने के लिए बसों का इंतजाम करने का फैसला लिया था। इसके बाद शुक्रवार को 102 बसें झांसी और 150 बसें आगरा से रवाना हुईं। शुक्रवार देर रात ये बच्चे बसों से यूपी के लिए रवाना हो गए। मगर इससे पहले बस स्टैंड पर हजारों छात्रों के एक साथ इकट्ठा होने से लॉकडाउन की धज्जियां उड़ गई।


प्रशासन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी करवाने में असफल रहा। इस बीच भास्कर संवाददाता ने इन छात्रों से बात की और जानी इनके मन की बात। कोटा में पढ़ाई कर रहे यूपी के इन छात्रों को एक दिन पहले ही बता दिया गया था कि आपको लेने यूपी से बसें आएंगी। अपना सामान तैयार रखें।

बस स्टैंड पर घर जाने को तैयार बैठे अभिषेक त्रिपाठी से बातचीत की। वह यूपी में कन्नौज के रहने वाले हैं। कोटा में एक संस्थान से नीट की तैयारी कर रहे हैं। अभिषेक के मुताबिक, उनको 16 अप्रैल की शाम कोचिंग से मैसेज आया कि आप अपना बैग तैयार रखिए।

कल आपको घर ले जाने के लिए बसें आ रही हैं। इससे अभिषेक काफी खुश थे। हालांकि, हॉस्टल से निकलने के बाद वे नर्वस भी हो रहे हैं। उन्हें कोरोना संक्रमित होने का डर सता रहा है। कारण कि उनका घर बहुत दूर है।

अभिषेक ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान बस यूं ही टाइम कट रहा था। पढ़ाई नहीं हो पा रही थी। दोस्त भी सब अंदर से घबराए हुए थे कि कहीं कोई संक्रमित ना हो जाए। इस दौरान मम्मी-पापा से रोजाना आठ-दस बार बात होती थी। वे कहते थे कि जब मन में आए, तभी बात कर लेना। मैं कोटा लगभग एक साल पहले आया था। लॉकडाउन में परेशानी कोई नहीं आई। लेकिन, थोड़ा सा डर गया हूं।

यूपी रोडवेज की 252 बसें देर शाम तक कोटा पहुंची। यहां उन्हें सैनिटाइज किया गया। यूपी जाने वाले छात्रों की स्क्रीनिंग हुई। फिर वे रवाना हुए।लखनऊ निवासी गौरव ने बताया कि हमें कोई प्रॉब्लम नहीं हो रही है।

यहां रहते तो भी कोई टेंशन नहीं थी। कल पता चला कि बसें आ रही हैं और घर जा सकते हैं इसलिए जा रहे हैं। वरना यहां भी हॉस्टल में ठीक थे। मैं जेईई की तैयारी कर रहा हूं। मैं यहां जुलाई में आया था। मम्मी-पापा से लगातार बात हो रही थी।

उन्होंने हमारी पूरी लोकेशन देखी हुई थी। इसलिए कोई टेंशन नहीं थी। थोड़ा बहुत एक्साइटमेंट जरूर है। मैं पहले भी यहां कोटा में रह चुका हूं। लॉकडाउन जरूर है लेकिन, कोई खास बात नहीं है। यदि परेशान होंगे तो और गड़बड़ होगा। शांति रखेंगे तो सारे काम हो जाएंगे।

यूपी में प्रतापगढ़ निवासी आकांक्षा सिंह कोटा में पिछले दो साल से एमबीबीएस की तैयारी कर रही हैं। वह यहां 11 वीं क्लास से पढ़ रही हैं। आकांक्षा ने बताया कि घर जाने के लिए बसें आएंगी। यह मैसेज मिलने पर काफी एक्साइटमेंट है। घर जाना अच्छा लग रहा है क्योंकि, हॉस्टल में थोड़ी दिक्कत रहती थी। यहां लॉकडाउन के दौरान खाना बाहर से आता था। इसलिए डर था कि कहीं संक्रमण ना हो जाए।

लेकिन, अब मन में यही है कि हम सुरक्षित घर पहुंच जाएं ताकि वहां खाना घर का मिल सकेगा। आकांक्षा ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान कोई दिक्कत नहीं हुई। हां, कोरोना संक्रमण की खबरें पढ़कर थोड़ी टेंशन हो रही थी। थोड़ा डिस्टर्ब रहते थे। लेकिन, हम फ्रेंड्स पढ़ाई पर फोकस रहते थे। लॉकडाउन के दौरान पेरेंट्स से बातचीत होती थी। उन्होंने कभी निगेटिव बात नहीं की।

झारखंड में धनबाद के रहने वाले कुंवर प्रताप सिंह कोटा में पिछले साल जुलाई में आए थे। वह यहां नीट की तैयारी कर रहे हैं। बस स्टैंड पर अपने साथी अभिषेक त्रिपाठी को छोड़ने आए कुंवर प्रताप सिंह ने बताया कि हॉस्टल के कुछ फ्रेंड्स लॉकडाउन के पहले ही घर चले गए थे। लेकिन, हम यहीं फंस गए थे।

ऐसे में थोड़ा मैंटल स्ट्रेस हो गया था। मैं कुन्हाड़ी में हॉस्टल में रहता हूं। यहीं नजदीक कोरोना पॉजिटिव केस मिले हैं। हम लोग यहां हॉस्टल में 30 बच्चे रह गए थे।

कुंवर प्रताप सिंह के घर वालों ने भी उनकी घर वापसी के लिए दो बार फ्लाइट की टिकट बुक करवाई। लेकिन, कैंसिल हो गई। इसके बाद ट्रेन भी कैंसिल हो गई। उन्होंने बताया कि रोजाना पेरेंट्स से बातचीत होती है। जिसमें मम्मी कभी-कभी इमोशनल हो जाती थी क्योंकि, मैं इस वक्त घर से बाहर रह गया हूं।

हमारे मन में भी यह चल रहा है कि हमें भी घर जाना है। वहां परिवार के साथ रहेंगे तो मैंटल स्ट्रेस खत्म हो जाएगा। वहां अच्छे से पढ़ाई भी होगी।

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