मल्लिकार्जुन खड़गे ने संभाला कांग्रेस अध्‍यक्ष का पद

नई दिल्ली। कांग्रेस के नए अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार यानी 26 अक्टूबर 2022 को कांग्रेस अध्यक्ष का पद भार संभाल लिया। सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मौजूदगी में खड़गे ने खुद को ‘मजदूर का बेटा’ बताया।

दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्‍यालय में बुधवार को खड़गे को निर्वाचन का सर्टिफिकेट दिया गया। इसके बाद खड़गे ने कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यभार संभाल लिया। उन्‍हें सोनिया गांधी और राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की मौजूदगी में पार्टी की कमान सौंपी गई।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने बतौर अध्‍यक्ष, पहले संबोधन में कहा कि आज मजदूर का बेटा, एक सामान्य कार्यकर्ता को जो सम्मान दिया है उसका आभार प्रकट करता हूं। सोनिया ने कार्यक्रम की शुरुआत में सभी कांग्रेसियों को धन्‍यवाद दिया और खड़गे को शुभकामनाएं दीं। कांग्रेसियों का शुक्रिया अदा करते हुए सोनिया ने कहा कि आपने इतने वर्षों तक जो प्यार, सम्मान दिया है,

यह मेरे लिए गौरव की बात है। मुझे इसका अहसास जीवन की आखिरी सांस तक रहेगा। सोनिया ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि खड़गे जी से पूरी पार्टी को प्रेरणा मिलेगी, एक संदेश मिलेगा और इनके नेतृत्व में कांग्रेस मजबूत होगी।

कर्नाटक के दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले 80 वर्षीय खड़गे ने 17 अक्टूबर को हुए ऐतिहासिक चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वी 66 वर्षीय थरूर को मात दी थी। पार्टी के 137 साल के इतिहास में छठी बार अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुआ था।

24 साल बाद गांधी परिवार से बाहर का कोई व्यक्ति कांग्रेस का अध्यक्ष बना है। बीदर जिले के वारावट्टी में 21 जुलाई, 1942 को गरीब परिवार में जन्मे खरगे ने स्कूली पढ़ाई के अलावा स्नातक की पढ़ाई कलबुर्गी में की। विधि स्नातक खरगे राजनीति में आने से पहले वकालत के पेशे में थे।

वह बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं और कलबुर्गी में बुद्ध विहार परिसर में निर्मित सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट के संस्थापक-अध्यक्ष हैं। उन्होंने 13 मई, 1968 को राधाबाई से विवाह रचाया और उनकी दो बेटियां और तीन बेटे हैं। उनके एक बेटे प्रियंक खरगे विधायक हैं और कर्नाटक में मंत्री रहे हैं।

खड़गे को 2024 के आम चुनाव से पहले पार्टी को मजबूत करने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव में कांग्रेस के बेहतर करने की उम्मीदें बड़ी चुनौती है, वहीं राजस्थान व कर्नाटक में पार्टी के भीतर जारी रस्साकशी ने पार्टी की परेशानी और बढ़ा दी है। ऐसे में 2024 के आम चुनाव से पहले पार्टी को एकजुट करना खड़गे के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

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