‘माणा’ जरूर आना

बदरीनाथः तब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री नहीं थे, गुजरात के मुख्यमंत्री भी नहीं थे लेकिन सोच वही थी जो आज है। नरेंद्र मोदी आज चीन बॉर्डर पर बसे आखिरी गांव माणा ही क्यों गए? माणा पहुंचकर मोदी ने ऐसा कहा जिसकी चर्चा हर गांव में हो रही है।

उत्तराखंड के चमोली स्थित है गांव माणा..इसे हिंदुस्तान का अंतिम गांव कहा जाता है। बद्रीनाथ धाम से बस तीन किमी दूर माणा समुद्रतल से 3118 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इससे 24 किमी दूर ही चीन का बॉर्डर है। इस गांव से प्रधानमंत्री मोदी का रिश्ता 21 साल पुराना है।

दरअसल, माणा वो इलाका है जहां पहले तिब्बत हुआ करता था। चीन का कब्जा था यहां पर। तिब्बत में जाने के लिए तीन दर्रे हैं नीती, माना और तुन झील ला। 1962 की जंग से पहले इसी इलाके से भारत और तिब्बत के बीच व्यापार होता था लेकिन 1962 की जंग में चीन ने युद्ध यहां के लोगों को चीन के साथ मिलने का लालच दिया गया लेकिन यहां की रहने वाली भोटिया जनजाति जिन्हें मंगोलों का वंशज माना जाता है,

उन्होंने देशप्रेम की मिसाल पेश करते हुए चीन के ऑफर को ठुकरा दिया और भारत का साथ दिया। इसीलिए जब प्रधानमंत्री यहां आये तो माणा की ताकत का बखान करते रहे हैं लेकिन माणा को जो मिलना चाहिए था वो नहीं मिला। लेकिन अब पीएम मोदी माणा जैसे बॉर्डर के गांवों के लिए मेगा प्लान लेकर आए हैं जिसका जिक्र उन्होंने किया।

माणा गांव के बारे में जानिए-
भारत का आखिरी गांव
उत्तराखंड के चमोली जिले में है
24 किमी की दूरी पर चीन की सीमा
बदरीनाथ से 3 किमी की दूरी पर
सरस्वती नदी के तट पर स्थित
सबसे साफ गांव का दर्जा

पीएम मोदी बॉर्डर के गांव में चहल पहल देखना चाहते हैं उसकी वजह साफ है, बॉर्डर के गांवों का विकास और उद्धार। मोदी ऐसा प्रयोग गुजरात में कर चुके हैं जिसका जिक्र उन्होंने किया है। भारत के अंतिम गांव माणा में भी कई संभावनाएं है, माणा जितना सामरिक दृष्टि से अहम है उतना ही धार्मिक दृष्टि से भी। बद्रीनाथ धाम के अलावा यहां महाभारतकालीन कई प्रमाण मौजूद है। धार्मिक टूरिज्म के ऐसे ऐसे प्रमाण है जहां से विकास की कई राहों की खुलने की संभावनाए मौजूद है।

कहा जाता है कि जहां से पांडवों ने स्वर्ग का रास्ता तय किया था माणा वही जगह है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, पांडव जब स्वर्ग जा रहे थे, तो इसी गांव से निकले थे। इस गांव में सरस्वती नदी पर बड़े से पत्थर का पुल मौजूद है जिसे पांडवकालीन भीम पुल कहा जाता है। एक किवंदती और भी है इसी भीम पुल के पास वेद व्यास जी ने गणेश जी से महाभारत लिखवाई थी।

माणा गांव से जुड़ी मान्यताएं-
यहां से जाता है स्वर्ग का रास्ता
पांडव इसी रास्ते से स्वर्ग गए थे
सशरीर स्वर्ग जाना चाहते पांडव
सिर्फ युद्धिष्ठिर सशरीर स्वर्ग पहुंचे थे
भीम ने सरस्वती नदी पर पुल बनाया
भीम पुल पर वेदव्यास ने महाभारत लिखवाई

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