रहस्य: दुनिया का सबसे लंबा जानवर जन्म लेता है पर मरता नहीं!

उदय दिनमान डेस्कः अभी तक तो आपने सुना और देखा होगा कि जिसने भी जन्म लिया उसे एक दिन मरना है। लेकिन आपको आज एक ऐसे जानवर के बारे में हम बताने जा रहे हैं जो पैदा तो होता है पर मरता कभी नहीं। आपको बता दें कि कहते हैं जिसने इस धरती पर जन्म लिया उसकी मौत निश्चित है, लेकिन यह नियम पानी में लागू नहीं होता है। अगर होता तो पानी में कई ऐसे असंख्य जीव है जो मरते ही नहीं हैं। आप चैक गए होंगे कि यह क्या स्टोरी है, लेकिन आपको बता दें कि यह स्टोरी नहीं बल्कि हकीकत है। आज हम आपको बताएंगे इसके बारे में विस्तार से-

अमरता का रहस्य समुद्र के अंदर तैर रहा था- जेलीफिश के रूप में।जब हम जेलीफिश के बारे में सोचते हैं, तब हममें से ज्यादातर लोग अपने दिमाग में इसके जीवन के दूसरे चरण “मेडूसा स्टेज” की छवि बनाते हैं।जीवन के इस चरण में जेलीफिश अपने पुछल्ले टेंटिकल्स के साथ बहने वाले अपारदर्शी गुब्बारे की तरह होते हैं।जेलीफिश में नर और मादा दोनों होते हैं। उनमें शुक्राणु और अंडाणु भी होते हैं, लेकिन उनके बच्चे दूसरे जीवों की तरह पैदा नहीं होते।वे अपना जीवन लार्वा के रूप में शुरू करते हैं. लार्वा छोटे सिगार की तरह होते हैं जो पानी में बहते रहते हैं और चिपकने के लिए किसी चट्टान या किसी आसान चीज की तलाश करते हैं।एक बार जब वे अपने लिए सुदृढ़ जगह ढूंढ़ लेते हैं तब उसके लार्वा पॉलिप में बदल जाते हैं। ये पॉलिप अपना क्लोन खुद बनाते हैं और लगातार बनाते रहते हैं। इस तरह पॉलिप की कॉलोनियां बन जाती हैं।पॉलिप की एक कॉलोनी कुछ ही दिनों में पूरे के पूरे बोट डॉक को ढंक सकती है। कुछ खास तरह के पॉलिप बड़ी झाड़ियों का रूप ले लेते हैं।

The jellyfish who can live forever

अगर हालात अनुकूल हों तो ये पॉलिप विशाल संख्या में खिल जाते हैं, ठीक उसी तरह जैसे बगीचे में फूल खिले हों।खिलने पर पॉलिप के अंदर से छोटी जेलीफिश कली की तरह बाहर आ जाती है।जेलीफिश के जीवन की शुरुआत भले ही असाधारण न हो, लेकिन इनकी मृत्यु के समय चीजें बेहद रोमांचक हो जाती हैं।मेडूसा अमर जेलीफिश टुरीटोप्सिस डोहर्नी (turritopsis dohrnii) जब मर जाती है तब उसका शरीर समुद्र की तलहटी में चला जाता है और धीरे-धीरे सड़ने लगता है।आश्चर्यजनक रूप से इसकी कोशिकाएं फिर से इकट्ठा होती हैं। वे मेडूसा नहीं बनातीं, बल्कि पॉलिप बनाती हैं। इस पॉलिप से नई जेलीफिश निकलती है।

इस तरह मेडूसा जेलीफिश पिछले जीवन को छोड़कर नये सिरे से दोबारा जीवन शुरू करती है।मौत को मात देने की यह कहानी विज्ञान गल्प जैसी है। यह उस मिथकीय फीनिक्स पक्षी की कहानी जैसी है जिसके बारे में कहा जाता है कि वह अपनी राख से ज़िंदा हो जाती है।तस्मानिया की जेलीफिश रिसर्चर और मरीन स्टिंगर एडवाइजरी सर्विस की डायरेक्टर डॉक्टर लिसा-एन्न गेर्श्विन कहती हैं, “यह हम सबके दिमाग को उड़ा देने वाली खोज है। यह हमारे समय की सबसे अद्भुत खोजों में से एक है।

एफ. स्कॉट फिट्जगेराल्ड ने 96 साल पहले बेंजामिन बटन की कहानी लिखी थी, जिस पर बाद में फिल्म भी बनी. उस कहानी में बेंजामिन बटन बूढ़े से जवान होता है।गेर्श्विन कहती हैं, “जेलीफिश की कहानी बेंजामिन बटन से थोड़ी अलग है. बेंजामिन बटन एक ही रहता है. लेकिन जेलीफिश की कहानी ऐसी है मानो बूढ़े बेंजामिन बटन की एक उंगली कट जाए और वह उंगली एक जवान बेंजामिन बटन में तब्दील हो जाए.”अपनी लाश से दोबारा ज़िंदा होने वाले जीवों में मेडूसा अमर जेलीफिश (टुरीटोप्सिस डोहर्नी) अकेली नहीं है।

2011 में चीन की शियामेन यूनिवर्सिटी में मरीन बायलॉजी के छात्र जिनरू ही ने मून जेलीफिश (ऑरेलिया ऑरिटा, aurelia aurita) को एक टैंक में रखा।जब वह मून जेलीफिश मर गई तो उस छात्र ने उसके मृत शरीर को दूसरे टैंक में रख दिया और उसकी निगरानी करता रहा।तीन महीने बाद उसने देखा कि मून जेलीफिश के मृत शरीर के ऊपर एक छोटा पॉलिप बाहर आ रहा था।मृत शरीर से दोबारा जन्म लेने की यह प्रक्रिया अब तक जेलीफिश की 5 प्रजातियों में देखी जा चुकी है।

टुरीटोप्सिस डोहर्नी हाइड्रोजोआ वर्ग के जीव हैं, जबकि मून जेलीफिश स्काइफोजोआ वर्ग के हैं. इन दोनों में उतना ही अंतर है, जितना अंतर स्तनधारियों और उभयचरों (एंफिबिया, जैसे- मेढ़क) में होता है।जेलीफिश उम्र बढ़ जाने से या किसी बीमारी के कारण कमजोर हो जाती है या कोई ख़तरा महसूस करती है तो वह अपने अस्तित्व को बचाने के लिए इस अविश्वसनीय तरीके का सहारा लेती है और दोबारा जन्म लेती है।

एक बार जब यह प्रक्रिया शुरू होती है तो जेलीफिश की घंटी (पैराशूट की छतरी जैसा हिस्सा) और इसके टेंटिकल्स गलने लगते हैं.यह फिर से पॉलिप में बदल जाती है. पॉलिप किसी सतह के साथ चिपक जाते हैं और फिर से एक जेलीफिश के रूप में बढ़ने लगते हैं.इस प्रक्रिया में जेलीफिश के साथ वास्तव में जो होता है, उसका एक हिस्सा “सेलुलर ट्रांसडिफरेंसिएशन” कहलाता है।नये शरीर की कोशिकाएं पहले से अलग होती हैं और वे नये शारीरिक संरचना का निर्माण करती हैं. जेलीफिश यह प्रक्रिया बार-बार दुहरा सकती है।

Blue Bottle Jellyfish attacks on people 150 injured within two days - समुद्र में नहा रहे लोगों पर ब्लू बोटल जेलीफिश का हमला, 150 घायल

डॉक्टर गेर्श्विन का कहना है कि वह जेलीफिश की अमरता और इंसान की अमरता की खोज के बीच फिलहाल कोई संबंध नहीं देखतीं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि भविष्य में इस तरह के जेनेटिक स्प्लिसिंग (genetic splicing) संभव नहीं हो सकते।कौन जानता है? कुछ जेली जीन्स हों और हम सब ‘डॉक्टर हू’ (विज्ञान गल्प पर आधारित टीवी सीरियल का हीरो) की तरह हो जाएं और जब हम मरने के करीब हों तो खुद का पुनर्जन्म कर लें।

जेलीफिश उम्र बढ़ जाने से या किसी बीमारी के कारण कमजोर हो जाती है या कोई ख़तरा महसूस करती है तो वह अपने अस्तित्व को बचाने के लिए इस अविश्वसनीय तरीके का सहारा लेती है और दोबारा जन्म लेती है.एक बार जब यह प्रक्रिया शुरू होती है तो जेलीफिश की घंटी (पैराशूट की छतरी जैसा हिस्सा) और इसके टेंटिकल्स गलने लगते हैं.यह फिर से पॉलिप में बदल जाती है. पॉलिप किसी सतह के साथ चिपक जाते हैं और फिर से एक जेलीफिश के रूप में बढ़ने लगते हैं.इस प्रक्रिया में जेलीफिश के साथ वास्तव में जो होता है, उसका एक हिस्सा “सेलुलर ट्रांसडिफरेंसिएशन” कहलाता है.नये शरीर की कोशिकाएं पहले से अलग होती हैं और वे नये शारीरिक संरचना का निर्माण करती हैं. जेलीफिश यह प्रक्रिया बार-बार दुहरा सकती है.

डॉक्टर गेर्श्विन का कहना है कि वह जेलीफिश की अमरता और इंसान की अमरता की खोज के बीच फिलहाल कोई संबंध नहीं देखतीं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि भविष्य में इस तरह के जेनेटिक स्प्लिसिंग (genetic splicing) संभव नहीं हो सकते.कौन जानता है? कुछ जेली जीन्स हों और हम सब ‘डॉक्टर हू’ (विज्ञान गल्प पर आधारित टीवी सीरियल का हीरो) की तरह हो जाएं और जब हम मरने के करीब हों तो खुद का पुनर्जन्म कर लें.

बिना दिमाग की जेलीफिश भी सोती है | विज्ञान | DW | 26.09.2017

विवादास्पद तौर पर दुनिया का सबसे लंबा जानवर

जेलीफ़िश या जेली या समुद्री जेली या मेड्युसोज़ोआ, या गिजगिजिया नाइडेरिया संघ का मुक्त-तैराक़ सदस्य है। जेलीफ़िश के कई अलग रूप हैं जो स्काइफ़ोज़ोआ (200 से अधिक प्रजातियां), स्टॉरोज़ोआ (लगभग 50 प्रजातियां), क्यूबोज़ोआ (लगभग 20 प्रजातियां) और हाइड्रोज़ोआ (लगभग 1000-1500 प्रजातियाँ जिसमें जेलीफ़िश और कई अनेक शामिल हैं) सहित विभिन्न नाइडेरियाई वर्गों का प्रतिनिधित्व करती हैं। इन समूहों में जेलीफ़िश को, क्रमशः, स्काइफ़ोमेड्युसे, स्टॉरोमेड्युसे, क्यूबोमेड्युसे और हाइड्रोमेड्युसे भी कहा जाता है। सभी जेलीफ़िश उपसंघ मेड्युसोज़ोआ में सन्निहित हैं। मेड्युसा जेलीफ़िश के लिए एक और शब्द है और इसलिए जीवन-चक्र के वयस्क चरण के लिए विशेष रूप से प्रयुक्त होता है।जेलीफ़िश हर समुद्र में, सतह से समुद्र की गहराई तक पाए जाते हैं। कुछ हाइड्रोज़ोआई जेलीफ़िश, या हाइड्रोमेड्युसे ताज़ा पानी में भी पाए जाते हैं; मीठे पानी की प्रजातियां व्यास में एक इंच (25 मि.मी.), बेरंग होती हैं और डंक नहीं मारती हैं। ऑरेलिया जैसे कई सुविख्यात जेलीफ़िश, स्काइफ़ोमेड्युसे हैं। ये बड़े, अक्सर रंगीन जेलीफ़िश हैं, जो विश्व भर में सामान्यतः तटीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं।अपने व्यापक अर्थ में, शब्द जेलीफ़िश आम तौर पर संघ टीनोफ़ोरा के सदस्यों को निर्दिष्ट करता है। हालांकि नाइडेरियन जेलीफ़िश से कोई निकट संबंध नहीं है, टीनोफ़ोर मुक्त-तैराक़ प्लैंक्टोनिक मांसभक्षी हैं, जो सामान्यतः पारदर्शी या पारभासी और विश्व के सभी महासागरों के उथले से गहरे भागों में मौजूद होते हैं।शेर अयाल जेलीफ़िश सर्वाधिक विख्यात जेलीफ़िश हैं और विवादास्पद तौर पर दुनिया का सबसे लंबा जानवर है.

जेलीफ़िश वास्तव में मछली नहीं हैं

जेलीफ़िश वास्तव में मछली नहीं हैं, शब्द जेलीफ़िश को मिथ्या नाम के रूप में माना जाता है और अमेरिकी सार्वजनिक मछलीघरों ने इसके बजाय जेली या समुद्री जेली शब्दों के उपयोग को लोकप्रिय बनाया है। कई अन्य जेलीफ़िश को, जो एक सदी से भी ज़्यादा समय से आम प्रचलन में है, उतना ही उपयोगी और सुरम्य मानते हैं और जेली से ज़्यादा इस शब्द को पसंद करते हैं। शब्द जेलीफ़िश का उपयोग कई अलग प्रकार के नाइडेरियन को निरूपित करने के लिए किया जाता है, जिन सबमें छतरी के समान दिखने वाली एक बुनियादी शारीरिक संरचना होती है, जिनमें शामिल हैं स्काइफ़ोजोई, स्टॉरोज़ोई (वृंतीय जेलीफ़िश), हाइड्रोज़ोई और क्युबोज़ोई जीव (बॉक्स जेलीफ़िश)। कुछ पाठ्यपुस्तकें और वेबसाइट स्काइफ़ोजोई को “असली जेलीफ़िश” के रूप में संदर्भित करती हैंइसके व्यापक उपयोग में, कुछ वैज्ञानिक जब जेलीफ़िश को संदर्भित कर रहे हों, कभी-कभी संघ टीनोफ़ोरा (कोंब जेली) के सदस्यों को शामिल करते हैं। अन्य वैज्ञानिक जल स्तंभ में कोमल शरीर वाले जंतुओं के साथ, इनका संदर्भ देते समय सबको शामिल करने वाले शब्द “जीलेटिनस ज़ूप्लैंक्टन” का प्रयोग पसंद करते हैं.

जेलीफ़िश में उनके जीवन-चक्र का दूसरा भाग

जेलीफ़िश के समूह को कभी-कभी ब्लूम या झुंड भी कहा जाता है। “ब्लूम” आम तौर पर छोटे क्षेत्र में एकत्रित होने वाले जेलीफ़िश के बड़े समूह के लिए प्रयुक्त होता है, पर जिनमें समय घटक भी शामिल हो सकता है, जो मौसमी बढ़ोतरी या अपेक्षा से अधिक संख्या में होते हैं। जेलीफ़िश अपने जीवन-चक्र के स्वभावानुसार “प्रस्फुटित” होते हैं, जो धूप और प्लैंकटन की बढ़ोतरी पर प्रायः अपने नितलस्थ पॉलिप द्वारा उत्पादित होते हैं, जिसकी वजह से वे अकस्मात प्रकट होते हैं और अक्सर बड़ी संख्या में, तब भी जब पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बना हुआ है। “झुंड” का उपयोग एक प्रकार से साथ रहने की सक्रिय क्षमता का संकेत देता है, जैसे कि ऑरेलिया, मून जेली की कुछ प्रजातियां प्रदर्शित करती हैं।अनेक जेलीफ़िश में उनके जीवन-चक्र का दूसरा भाग होता है, जिसे पॉलिप चरण कहा जाता है। जब एकल निषेचित अंडे से उत्पन्न एक पॉलिप स्टोलोन कहलाने वाले ऊतकों के रेशों द्वारा एक-दूसरे से जुड़े, अनेक पॉलिप गुच्छ में विकसित होते हैं, तो उन्हें “संघजीवी” कहा जाता है। कुछ पॉलिप कभी प्रचुरोद्भवित नहीं होते और उन्हें “निःसंग” उपजाति के रूप में संदर्भित किया जाता है।

जेलीफ़िश 90% जल से संघटित

जेलीफ़िश में विशेष पाचन, परासरण-नियंत्रक, केंद्रीय तंत्रिका, श्वसन, या रक्तवाही प्रणालियां नहीं होती हैं। वे आमाशय-वाहिकीय विवर के जठर-त्वचीय अस्तर का उपयोग करते हुए, जहां पोषक तत्वों का अवशोषण होता है, पाचन करते हैं। उन्हें श्वसन प्रणाली की जरूरत नहीं है क्योंकि उनकी त्वचा इतनी पतली होती है कि शरीर विसरण द्वारा ऑक्सीकरण करता है। उनका गति पर सीमित नियंत्रण होता है, लेकिन वे अपने घंटीनुमा शरीर के संकुचन-स्पंदन के माध्यम से द्रवस्थैतिक कंकाल का उपयोग करते हुए संचलन कर सकते हैं; कुछ प्रजातियां सक्रिय रूप से अधिकांश समय तैरती रहती हैं, जबकि अन्य ज़्यादा समय निष्क्रिय रहती हैं। जेलीफ़िश 90% जल से संघटित होते हैं; उनकी छतरी की अधिकांश मात्रा श्लेषीय सामग्री मिसोग्लिया नामक-जेली-से बनी होती है, जो उपकला कोशिकाओं की दो परतों द्वारा घिरी होती है, जो घंटी, या शरीर के छत्र (ऊपरी सतह) और उपछत्र (निचली सतह) को बनाते हैं।

जेलीफ़िश में मस्तिष्क या केंद्रीय तंत्रिका प्रणाली मौजूद नहीं होती, बल्कि बाह्यत्वचा में अवस्थित तंत्रिकाओं का ढीला नेटवर्क रहता है, जिसे “तंत्रिका जाल” कहा जाता है। एक जेलीफ़िश अपने तंत्रिका जाल के माध्यम से अन्य जंतुओं के स्पर्श सहित विभिन्न उद्दीपनों को जानता है, जो फिर जेलीफ़िश के शरीर के घेरे में स्थित रोपैलियल लैपेट के ज़रिए, पूरे तंत्रिका जाल और वर्तुल तंत्रिका वलय के इर्द-गिर्द अन्य तंत्रिका कोशिकाओं को आवेग प्रसरित करता है। कुछ जेलीफ़िश में नेत्रक भी होते हैं: प्रकाश के प्रति संवेदनशील अंग, जो चित्र नहीं बनाते, पर जो प्रकाश का पता लगा सकते हैं और जल की सतह पर धूप के प्रकाश के प्रति प्रतिक्रिया करते हुए, ऊपर और नीचे का निर्धारण कर सकते हैं। ये आम तौर पर वर्णक बिंदु नेत्रक होते हैं, जिनकी कुछ कोशिकाएं (सभी नहीं) रंजित होती हैं।

शिकार की उपलब्धता और वर्धित तापमान और धूप की प्रतिक्रिया में सागरीय प्रस्फुटन की उपस्थिति आम तौर पर मौसमी होती है। महासागर की धाराओं का झुकाव जेलीफ़िश को बड़े झुंड़ या “प्रस्फुटन” में एकत्रित करने की ओर होता है, जिसमें सैकड़ों या हजारों जेलीफ़िश रहती हैं। समुद्री धाराओं द्वारा कभी-कभी संकेंद्रित होने के अलावा, प्रस्फुटन कुछ सालों में असामान्य रूप से उच्च आबादी का भी परिणाम हो सकता है। प्रस्फुटन निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है जो सागर की धाराओं, पोषक तत्वों, तापमान, परभक्षण और ऑक्सीजन सांद्रता पर निर्भर है।

जेलीफ़िश अपने प्रतियोगियों की तुलना में कम ऑक्सीजन वाले जल में बेहतर तरीक़े से जीवित रहने में सक्षम होते हैं और इस तरह बिना प्रतिस्पर्धा के प्लवक पर पल सकते हैं। जेलीफ़िश लवणीय जल से भी लाभान्वित हो सकते हैं, चूंकि लवण जल में अधिक आयोडीन होता है, जो पॉलिपों को जेलीफ़िश में बदलने के लिए आवश्यक है। जलवायु परिवर्तन से बढ़ते समुद्री तापमान भी जेलीफ़िश प्रस्फुटन में योगदान दे सकते हैं, क्योंकि जेलीफ़िश की कई प्रजातियां गर्म पानी में बेहतर रूप से जीवित रहने में सक्षम हैं। जेलीफ़िश काफ़ी बड़े प्रस्फुटनों में रहने की संभावना है और प्रत्येक में यह 100, 000 तक पहुंच सकता है।लोगों की स्मृति में “छाप” के अलावा, समय के साथ वैश्विक जेलीफ़िश आबादी में परिवर्तन के बारे में बहुत कम डेटा उपलब्ध है। वैज्ञानिकों के पास ऐतिहासिक या वर्तमान जेलीफ़िश आबादी का बहुत कम परिमाणात्मक डेटा उपलब्ध है जेलीफ़िश आबादियों के बारे में हाल ही की अटकलें “विगत” डेटा पर आधारित हैं।

जेलीफ़िश प्रस्फुटन आवृत्ति में वैश्विक वृद्धि मानवीय प्रभाव से उत्पन्न हो सकती है। कुछ स्थानों पर जेलीफ़िश पारिस्थितिक आलों को भर सकते हैं जिस पर पहले अब अधिक मछलीमार जीवों का कब्जा था, लेकिन नोट किया गया है कि इस परिकल्पना में समर्थक डेटा की कमी है। जेलीफ़िश शोधकर्ता मार्श यंगब्लुथ आगे स्पष्ट करते हैं कि “जेलीफ़िश एक ही प्रकार के युवा और वयस्क मछली के शिकार पर पोषण करते हैं, इसलिए यदि मछली को समीकरण से हटा दिया जाए, तो जेलीफ़िश द्वारा वह जगह लेने की संभावना है।

कुछ जेलीफ़िश आबादियां, जिन्होंने पिछले कुछ दशकों में स्पष्ट वृद्धि दर्शायी है, अन्य प्राकृतिक वास से आने वाले “आक्रामक” प्रजाति के हैं: उदाहरण में शामिल हैं काला सागर और कैस्पियन सागर, बाल्टिक सागर, मिस्र और इज़राइल के पूर्वी भूमध्य समुद्र तट और मैक्सिको की खाड़ी का अमेरिकी तट आक्रामक प्रजाति की आबादी तेजी से विस्तारित हो सकती हैं क्योंकि उनके विकास को रोकने के लिए अक्सर नए आवास में कोई प्राकृतिक शिकारी मौजूद नहीं रहते हैं। ज़रूरी नहीं कि ऐसे प्रस्फुटन अधिक मछलीमारी या अन्य पर्यावरणीय समस्याओं को प्रतिबिंबित करें।

वर्धित पोषक तत्व, जिसका श्रेय कृषि बहाव को दिया जाता है, जेलीफ़िश के प्रचुरोद्भवन के पूर्ववृत्त के रूप में भी उद्धृत किए गए हैं। अलबामा के डॉफ़िन द्वीप सागरीय प्रयोगशाला के मॉन्टी ग्राहम कहते हैं कि “पारिस्थितिकी प्रणालियां, जिनमें पोषक तत्वों का उच्च स्तर रहा है।.. सूक्ष्म जीवों के लिए पोषण प्रदान करती हैं, जिनसे जेलीफ़िश आहार ग्रहण करते हैं। पानी जहां स्वास्थ्यप्रदपोषण हो, अक्सर कम ऑक्सीजन स्तर में परिणत होता है, जिससे जेलीफ़िश पर अनुग्रह होता है चूंकि वे मछली की तुलना में कम ऑक्सीजनयुक्त जल बर्दाश्त कर सकते हैं।

यह तथ्य कि जेलीफ़िश बढ़ रहे हैं इस बात का संकेत है कि पारिस्थितिकी तंत्र में कुछ घटित हो रहा है।नामीबिया के समुद्री तट से दूर सागरीय जीवन के नमूने द्वारा पता चलता है कि पिछले कुछ दशकों में इस क्षेत्र में भारी मछलीमारी के फलस्वरूप, जेलीफ़िश जैव मात्रा मछली से आगे निकल गई है।जेलीफ़िश द्वारा गंभीरता से प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं उत्तरी मेक्सिको खाड़ी, जिसके बारे में ग्राहम कहते हैं “मून जेलियों ने एक प्रकार का श्लेषीय जाल गठित किया है जो खाड़ी के एक छोर से दूसरे छोर तक फैला है।

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