दर्दनाक तस्वीरः आग से 300 करोड़ जंगली जानवर-पक्षी जलकर खाक

उदय दिनमान डेस्कः प्रकृति के प्रकोप का असर मानव ही नहीं जीव-जंतुओं पर भी होता है। प्रतिवर्ष जंगलों में आग लगने से जहां प्रकृति को भारी नुकसान होता है वहीं जंगलों में पल रहे जानवर भी इसकी भेंट चढ़ते है। एक सर्वें के अनुसार अमेजन के जंगलों में आग से 300 करोड़ जानवर इसकी चपेट में आये हैं। यह तस्वरी दर्दनाक है। चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से-

प्रकृति और मानव एक दूसरे के पूरक है। प्रकृति के विना इंसान का कोई अस्तित्व नहीं है। प्रकृति में कई ऐसे जीव भी हैं जो मानव के आसपास रहते है। प्रकृति में उथल-पूथल से मानव सभ्यता भी प्रभावित होती है। जंगल का सीधा संबंध मनुष्य से होता है। लेकिन जब जंगल आग की चपेट में आते हैं तो कई बडे़ नुकसान होते है।

प्रकृति का प्रकोप इंसानों से ज्यादा जानवरों को झेलना पड़ता है. ऑस्ट्रेलिया में इस साल भीषण गर्मी की वजह से जंगलों में जो आग लगी उससे लगभग 300 करोड़ जानवर और पक्षी मारे गए. यह आंकड़ा जानवरों के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-ऑस्ट्रेलिया द्वारा जारी किया गया है.

अमेजन के जंगलों में लगी आग के बाद ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में भी आग लगने की घटना हुई थी। इन दोनों घने जंगलों में आग लगने के बाद ये कहा जा रहा था कि इससे कई अरब जंगली जानवरों की या तो मृत्यु हो गई या वो उस जगह से भागकर कहीं और पहुंच गए।ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में साल 2019-20 की आग पर हुए एक शोध का कहना है कि इस भयानक आपदा के कारण करीब तीन अरब जानवर या तो मारे गए या फिर विस्थापित हो गए।

यह आंकड़ा जनवरी में ऑस्ट्रेलियाई स्तनधारी विशेषज्ञ प्रोफेसर क्रिस डिकमैन द्वारा दिए गए अनुमान का लगभग तीन गुना है. डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-ऑस्ट्रेलिया ने 2019-20 में जंगलों में आग से मारे गए या विस्थापित हुए जानवरों की संख्या का विस्तृत अनुमान प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिकों के एक समूह का गठन किया गया था जिसने मंगलवार को अपनी अंतरिम रिपोर्ट जारी की.

रिपोर्ट में आग से प्रभावित 11.46 मिलियन हेक्टेयर भूमि की जांच की गई तो पता चला कि लगभग तीन अरब देशी जानवर जंगलों में मौजूद लकड़ियों की वजह से जल गए . इसमें 143 मिलियन स्तनधारी, 2.46 बिलियन सरीसृप, 180 मिलियन पक्षी और 51 मिलियन मेंढक शामिल हैं जिनके बारे में माना जा रहा है कि वे आग की चपेट में आ गए थे.

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-ऑस्ट्रेलिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डर्मोट ओ गोरमैन ने कहा कि निष्कर्ष चौंकाने वाले हैं. उन्होंने कहा, ‘दुनिया में कहीं भी ऐसी दूसरी घटना के बारे में सोचना मुश्किल है, जिसमें कई जानवर मारे गए या विस्थापित हो गए. इसे आधुनिक इतिहास में सबसे खराब वन्यजीव आपदा कहा गया है.प्रो डिकमैन ने जनवरी में ब्लैक समर की आग में एक बिलियन से अधिक जानवरों के मारे जाने का अनुमान लगाया था. उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा पुराना था और केवल एनएसडब्ल्यू और विक्टोरिया में जलाए गए क्षेत्रों को लेकर दिया गया था.

शोध के एक लेखक क्रिस डिकमैन के मुताबिक आग से बचने वाले जानवरों की संभावनाएं बहुत अधिक नहीं थीं ऐसा भोजन, शरण और शिकारियों से सुरक्षा की कमी के कारण हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया के जंगल में 2019 के मध्य में लगी आग के कारण 1,15,000 वर्ग किलोमीटर के जंगल और झाड़ जल गए। इस आग में 30 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों मकान जलकर राख हो गए थे। ऑस्ट्रेलिया के आधुनिक इतिहास में यह जंगल की आग सबसे लंबे दौर तक चलने वाली आग थी, वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को इस संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया है।


सिडनी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने मंगलवार को कहा कि वैज्ञानिक कितनी जानवरों की मौत हुई है इसकी सटीक पुष्टि नहीं कर सकते हैं. किसी भी वन्यजीव के बचने की संभावनाएं भोजन और आश्रय की कमी पर निर्भर करता है. उन्होंने तर्क दिया कि झाड़ियों ने पर्यावरण को बदल दिया है और देशी जैव विविधता को समाप्त कर दिया है.

ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी इस आग को आधुनिक इतिहास की सबसे खराब आपदाओं में से एक कहा जा रहा है। शोध में शामिल ऑस्ट्रेलिया के कई विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों का कहना है कि आग के कारण 14.4 करोड़ स्तनधारी, 2.46 अरब सरीसृप, 18 करोड़ पक्षी और 5.1 करोड़ मेंढक प्रभावित हुए। हालांकि शोध में यह जानकारी नहीं हासिल हो सकी कि इससे कितने जानवरों की जलने से मौत हुई होगी।

इससे पहले जनवरी में हुए एक शोध में अनुमान जताया गया था कि आग से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य न्यू साउथ वेल्स और विक्टोरिया में एक अरब के करीब जानवर मारे गए। लेकिन ताजा शोध के लिए वैज्ञानिकों ने पूरे महाद्वीप में आग के क्षेत्र का सर्वे किया। सर्वे के नतीजे अभी भी पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाए हैं और अंतिम नतीजे अगस्त महीने के आखिर तक आने की उम्मीद है। लेकिन शोध के लेखकों का कहना है कि आग लगने से प्रभावित तीन अरब जानवरों की संख्या में किसी भी तरह से बदलाव की संभावना नहीं है।

वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर के ऑस्ट्रेलिया शाखा के प्रमुख डर्मट ओ गोरमैन के मुताबिक अंतरिम निष्कर्ष चौंकाने वाले हैं, दुनिया में कहीं और ऐसी घटना के बारे में सोचना मुश्किल है जिसमें इतने सारे जानवर मारे गए या विस्थापित हुए। उनके मुताबिक यह आधुनिक इतिहास में सबसे भयानक जंगल की आग में से एक है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऑस्ट्रेलिया में गर्मी का मौसम लंबा खिंच रहा है और यह खतरनाक होता जा रहा है। सर्दी का मौसम छोटा होने के कारण जंगलों की आग पर रोकथाम का काम नहीं हो पा रहा है।

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