नई दिल्ली। गृह मंत्रालय ने भारत की पहली पूरी एंटी टेरर पॉलिसी जारी की है। इस पॉलिसी का नाम ‘PRAHAAR’ (प्रहार) रखा गया है। पॉलिसी में क्रॉस बॉर्डर आतंकवाद का जिक्र है, साथ ही क्रिमिनल हैकर्स और साइबर हमले की वजह से देश को मिल रही चुनौतियों का भी वर्णन किया गया है।
इसमें कहा गया है कि देश पानी, जमीन और हवा में आतंकवादी खतरों का सामना कर रहा है। पॉलिसी के मुताबिक, ‘भारत आतंकवाद को किसी खास धर्म, नस्ल, राष्ट्रीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ता है।’ पॉलिसी में कहा गया है कि टेरर ग्रुप लॉजिस्टिक्स और रिक्रूटमेंट के लिए तेजी से ऑर्गेनाइज़्ड क्रिमिनल नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं।
वहीं फंडिंग और ऑपरेशनल गाइडेंस के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लिकेशन, एन्क्रिप्शन टूल, डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट के इस्तेमाल की ओर इशारा किया गया है। इसमें एनॉनिमस एक्टिविटी पर भी चिंता जताई गई है।
गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड इस स्ट्रैटेजी डॉक्यूमेंट के मुताबिक, ‘CBRNED (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, एक्सप्लोसिव, डिजिटल) मैटीरियल तक पहुंचने और उसका इस्तेमाल करने की टेररिस्ट कोशिशों को रोकना काउंटर टेररिज्म एजेंसियों के लिए एक चुनौती बना हुआ है। सरकारी और नॉन-स्टेट एक्टर्स द्वारा जानलेवा मकसदों के लिए ड्रोन और रोबोटिक्स का गलत इस्तेमाल करने का खतरा भी चिंता का विषय बना हुआ है।’
गृह मंत्रालय ने कहा है कि आतंकी ग्रुप भारतीय युवाओं को भर्ती करने की कोशिशें जारी रखे हुए हैं। पहचान होने के बाद ऐसे लोगों पर पुलिस की ग्रेडेड कार्रवाई होती है। इसमें सामाजिक और धार्मिक नेताओं की भूमिका की बात भी कही गई है। कहा गया है कि मॉडरेट प्रचारक और NGO रेडिकलाइजेशन और चरमपंथी हिंसा के नतीजों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए लगे हुए हैं।
पॉलिसी में अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) जैसे ग्लोबल टेरर ग्रुप्स का नाम लेते हुए कहा गया है कि उन्होंने स्लीपर सेल के जरिए भारत में हिंसा भड़काने की कोशिश की है। साथ ही कहा गया है कि दूसरे देशों से काम करने वाले हिंसक चरमपंथियों ने आतंकवाद को बढ़ावा देने की साजिशें रची हैं।
इस पॉलिसी में ट्रांसनेशनल आतंकवाद से निपटने के लिए राष्ट्रीय उपायों के साथ-साथ इंटरनेशनल और क्षेत्रीय सहयोग भी होना चाहिए। समें यह भी बताया गया है कि विदेश में मौजूद ग्रुप हमले करने के लिए लोकल इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और इलाके की जानकारी पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं।
