1 अप्रैल से बढ़ेगी सैलरी !

नई दिल्लीः केंद्र सरकार के प्रस्तावित New Income Tax Act 2026 के तहत टैक्स का बोझ कम होने वाला है. इसका सीधा मतलब है कि हर महीने आपकी सैलरी से कटने वाला टीडीएस (TDS) कम होगा और आपके हाथ में आने वाला पैसा बढ़ जाएगा. आइए जानते हैं उन 5 बड़े बदलावों के बारे में जो आपकी सैलरी बढ़ाने वाले हैं.

नए टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को चुनने वालों के लिए सरकार ने राहत का दायरा बढ़ा दिया है. धारा 87A के तहत मिलने वाले रिबेट को बढ़ाकर 60,000 रुपये कर दिया गया है. इससे ये होगा क‍ि अब 12 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले लोगों को एक भी रुपया टैक्स नहीं देना होगा. इससे मध्यम आय वर्ग के लोगों की सालाना 25000 से 50000 रुपये तक की बचत होगी.

पुराने टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) का इस्तेमाल करने वालों के लिए HRA (House Rent Allowance) के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव किया गया है. अब दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के साथ-साथ बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी मेट्रो शहरों की श्रेणी में शामिल किया गया है. इन शहरों में रहने वाले कर्मचारी अब अपनी बेसिक सैलरी का 50% HRA क्लेम कर पाएंगे (जो पहले 40% था). इससे टैक्स योग्य आय काफी कम हो जाएगी.

दशकों पुराने अलाउंस की लिमिट को आखिरकार महंगाई के हिसाब से बढ़ा दिया गया है. पहले मिलने वाले मात्र 100 रुपये प्रति माह को बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह (पर बच्चा) करने का प्रस्ताव है. Hostel Allowance को 300 प्रति माह की सीमा को बढ़ाकर सीधे 9000 रुपये प्रति माह किया जा रहा है. जिन कर्मचारियों के बच्चे पढ़ रहे हैं, उनकी टैक्स बचत में सालाना 50000 से ज्यादा का अंतर आ सकता है.

सैलरीड कर्मचारियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ दोनों रिजीम में जारी रहेगा. चर्चा है कि इसे मौजूदा 75000 रुपये से बढ़ाकर 100000 रुपये तक किया जा सकता है, जिससे सीधे तौर पर आपकी टैक्सेबल इनकम 25000 रुपये और कम हो जाएगी.

अभी तक कंपनी की तरफ से मिलने वाले 5000 रुपये से ज्यादा के गिफ्ट वाउचर टैक्स के दायरे में आते थे. नए ड्रॉफ्ट रूल्स में इस सीमा को बढ़ाकर 15000 रुपये कर दिया गया है. यानी अब दिवाली बोनस या रिवॉर्ड्स पर आपको टैक्स की चिंता कम होगी.

विशेषज्ञों के अनुसार, इन बदलावों के कारण एक औसत सैलरीड कर्मचारी की सालाना टेक-होम सैलरी 25000 से 80000 रुपये तक बढ़ सकती है. हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आप कौन सा टैक्स रिजीम चुनते हैं और आपकी सैलरी का स्ट्रक्चर क्या है.

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