सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या: घर में सुख-समृद्धि के लिए इस प्रकार करें पितरों की विदाई

उदय दिनमान डेस्कःअश्विनी मास की अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. इस साल सर्व पितृ अमावस्या 17 सितंबर को पड़ रही हैं. इसे आश्विन अमावस्या, बड़मावस और दर्श अमावस्या भी कहा जाता है. आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है.

राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज आईडीपीएल के संस्कृत प्रवक्ता आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने बताया . किअमावस्या तिथि श्राद्ध परिवार के उन मृतक सदस्यों के लिये किया जाता है, जिनकी मृत्यु अमावस्या तिथि, पूर्णिमा तिथि तथा चतुर्दशी तिथि को हुई हो.


इस प्रकार अपनाएं श्राद्ध की विधि

उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य घिल्डियाल बताते हैंकि यदि कोई सम्पूर्ण तिथियों पर श्राद्ध करने में सक्षम न हो, तो वो मात्र अमावस्या तिथि पर श्राद्ध (सभी के लिये) कर सकता है. अमावस्या तिथि पर किया गया श्राद्ध, परिवार के सभी पूर्वजों की आत्माओं को प्रसन्न करने के लिये पर्याप्त है.

जिन पूर्वजों की पुण्यतिथि ज्ञात नहीं है, उनका श्राद्ध भी अमावस्या तिथि पर किया जा सकता है. इसीलिए अमावस्या श्राद्ध को सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है.
सौर विज्ञानी डॉ चंडी प्रसाद घिल्डियाल बताते हैं कि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और फिर साफ-सुथरे कपड़े पहनें. पितरों के तर्पण के लिए सात्विक पकवान बनाएं और उनका श्राद्ध करें. शाम के समय सरसों के तेल के चार दीपक जलाएं. इन्हें घर की चौखट पर रख दें. एक दीपक लें. एक लोटे में जल लें. अब अपने पितरों को याद करें और उनसे यह प्रार्थना करें कि पितृपक्ष समाप्त हो गया है

इसलिए वह परिवार के सभी सदस्यों को आशीर्वाद देकर अपने लोक में वापस चले जाएं. यह करने के पश्चात जल से भरा लोटा और दीपक को लेकर पीपल की पूजा करने जाएं. वहां भगवान विष्णु जी का स्मरण कर पेड़ के नीचे दीपक रखें जल चढ़ाते हुए पितरों के आशीर्वाद की कामना करें.

सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या कहा जाता है, क्योंकि इस दिन उन मृत लोगों के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण कर्म किए जाते हैं, जिनकी मृत्यु तिथि मालूम नहीं होती है। अगर किसी कारण से मृत सदस्य का श्राद्ध नहीं कर पाए हैं तो अमावस्या पर श्राद्ध कर्म किए जा सकते हैं। पितृ मोक्ष अमावस्या पर सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के पिंडदान आदि शुभ कर्म करना चाहिए। मान्यता है कि पितृ पक्ष में सभी पित्र देवता धरती पर अपने कुल के घरों में आते हैं और धूप-ध्यान, तर्पण आदि ग्रहण करते हैं। अमावस्या पर सभी पित्र अपने लोक लौट जाते हैं।

पितरों के लिए अमावस्या का विशेष महत्व है। वर्षभर इस दिन कुछ खास उपाय किए जाएं तो मातृ और पितृ ऋण से मुक्ति मिल सकती है। जानिए ऐसे ही सात उपाय, जिनका धर्म ग्रंथों में वर्णन है –

अमावस्या के दिन सवेरे शुद्ध होकर स्टील के लोटे या कटोरे में पानी, गंगाजल और काले तिल डालकर दक्षिणमुखी होकर पितरों को जल का तर्पण करें और जल देते समय 3 बार ऊं सर्वपितृदेवाय नम: बोलें और पितरों से सुख-शांति व काम रोजगार दिलाने के लिए प्रार्थना करें।
हर अमावस्या खास तौर पर सोमवती अमावस्या, भौमवती अमावस्या, मौनी अमावस्या और शनैश्चरी अमावस्या को सवेरे खीर-पूड़ी, आलू की सब्जी, खीर, बेसन का लड्डू, केला व दक्षिणा और सफेद वस्त्र किसी ब्राह्मण को दें और आशीर्वाद लें।

इससे हमारे पितृ अत्यंत प्रसन्ना होते हैं और सारे दोषों से मुक्ति दिलाते हैं।सोमवार के दिन आक के 21 पुष्पों व कच्ची लस्सी, बेलपत्र के साथ शिव पूजन करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है।


पितृदोष होने पर किसी गरीब कन्या के विवाह में सहायता करने से दोष से राहत मिलती है।
रविवार की संक्रांति या रवि वासरी अमावस्या को ब्राह्मणों को भोजन, लाल वस्तुओं का दान, दक्षिणा एवं पितरों का तर्पण करने से पितृदोष की शांति होती है।

हर अमावस्या के दिन पितरों का ध्यान करते हुए पीपल पर कच्ची लस्सी, गंगाजल, काले तिल, चीनी, चावल, जल, पुष्प इत्यादि चढ़ाएं और 3 बार ऊं पितृभ्य: नम: बोलें। पितरों से सुख शांति की प्रार्थना करें।

इन उपायों के अतिरिक्त सर्प पूजा, ब्राह्मणों को, गोदान, कुआं खुदवाना, पीपल व बरगद के वृक्ष लगवाना, विष्णु-मंत्रों का जाप करने से, श्रीमद्भागवद गीता का पाठ करने से, माता-पिता का आदर करने से, पितरों के नाम से अस्पताल में दान करने से, मंदिर, विद्यालय व धर्मशाला बनवाने से भी पितृदोषों की शांति होती है।

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