सोशल मीडिया: खेत में हल चला रहे हैं करोड़ों का कारोबार करने वाले बाबा !

देहरादून।योग गुरू के नाम से अंतर्राष्ट्ीय फलक पर अपनी पहचान बनाने वाले बाबा रामदेव की कुछ तस्वीरे आजकल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं वह भी हल चलाते हुए। इन तस्वीरों को बाबा ने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि उनका जन्म किसान के परिवार में हुआ और वह कर्म से योगी बन गए।

फिर क्या था सोशल मीडिया पर बाबा इस बात को लेकर टोल हो गए सोशल मीडिया पर बाबा के बारे में यूजर ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाये देनी शुरू कर दी। वैसे भी आपको बता दें कि बाबा रामदेव हमेशा किसी न किसी बात को लेकर सोशल मीडिया पर छाये रहते हैं। कोरोना काल में खेती करते हुए छाना वैसे तो कोई नयी बात नहीं पर सोशल मीडिया पर यूजर क्या कहते हैं। इसके बारे में बताते हैं आपको विस्तार से-

योग गुरु बाबा रामदेव हमेशा ही लोगों को योग करें, निरोग रहें कहते हुए नजर आते हैं। वे तरह-तरह की योग क्रियाओं के जरिए लोगों को स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करते हैं। इतना ही नहीं वो सोशल मीडिया पर भी अक्सर एक्टिव नजर आते हैं और योगासनों के बारे में जानकारी देते हैं, लेकिन इस बार बाबा रामदेव सोशल मीडिया पर हल चला छा गए हैं। कुछ ने उन्हें ट्रोल किया तो कई उनके समर्थन में कूद गए।

दरअसल, बाबा रामदेव ने सोशल मीडिया पर खेत में हल चलाने की कुछ तस्वीरें पोस्ट की हैं। इसमें उन्होंने लिखा है कि मेरा जन्म किसान परिवार में हुआ और कर्म से योगी बन गया। आज स्वस्थ रहने के लिए हर व्यक्ति जैसे फैमिली डॉक्टर रखता है, वैसे ही फैमिली किसान रखना पड़ेगा।

हम जो खेत में डालते हैं वह हमारे पेट में आता हैं। खेत में जो यूरिया, प्रेस्टिसाइड्स, डालते हैं, उससे शाक, अन्न, दूध, घी जो खेत से मिलता है, जहरीला हो गया है। बाबा रामदेव ने आगे लिखा कि इसका एकमात्र समाधान है भारत को तंबाकू, शराब, जंक फूड आदि से बचकर ऑर्गेनिक खेती को अपनाना पड़ेगा। वापस अपनी पुरानी संस्कृति में लौटना होगा। आज पूरी दुनिया में ऑर्गेनिक उत्पादों का महत्व लोग समझ रहे हैं।

बाबा के सोशल मीडिया पर फोटो डालते ही उन्हें ट्रोल किया जाने लगा। हालांकि, कई उनके समर्थन में भी उतरे। एक यूजर ने ट्वीट किया व्यवसाय पर बात न करें, पहले विदेशी बैंकों में जमा सभी काले धन को वापस लाएं, जो भारत का है। जैसा कि आपने वादा किया था। इसके साथ ही उन्होंने कई मुद्दे भी रखे और कहा कि जब आप इन बातों को पूरा कर लेते हैं।

तभी हमें कुछ भी करने के लिए कहें। वहीं, एक यूजर ने तो यहां तक लिख दिया कि महाराज सरकार से ये बोलते क्यों नहीं कि तंबाकू बैन करवा दें। यूजर यहीं नहीं रुका और ये तक कह दिया कि कहीं सरकार आपको ही बंद न कर दे। एक यूजर ने तो बाबा से तंबाकू से होने वाले नुकसान का वैज्ञानिक प्रमाण ही मांग लिया।

हालांकि, बाबा के समर्थन में आयुषी नाम की एक यूजर ने ट्वीट किया, भारत में ऋषि कर्म और कृषि कर्म की संस्कृति को सर्वाधिक गौरव दिया जाता रहा है। कृषि को समृद्धि और सम्मान मिले इसके लिए देश की बड़ी हस्तियों को भी स्वयं खेती का अनुभव करना चाहिए। वहीं, एक अन्य यूजर बहादुर सिंह ने लिखा, आपने सत्य कहा है, ऑर्गेनिक खेती होना चाहिए, आजकल जहरीली फसल हो रही है। जहर को खेतों में डाला जा रहा है।

बाबा रामदेव ने एक अन्य ट्वीट के जरिए ड्रग माफिया पर निशाना साधा। बाबा ने लिखा, कोरोना, बीपी, हार्ट, लिवर, किडनी की छोटी-छोटी बीमारियों के लिए ड्रग माफिया हॉस्पिटल में लाखों रुपए का बिल बना देते हैं। लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी कई बार तो हॉस्पिटल से डेड बॉडी ही बाहर आती है। इस लूट के खिलाफ हमने एक आंदोलन शुरू किया।

रामकृष्ण यादव से बन गए योगगुरू बाबा रामदेव

रामकृष्ण यादव भारतीय योग-गुरु हैं, जिन्हें अधिकांश लोग स्वामी रामदेव के नाम से जानते हैं। उन्होंने योगासन व प्राणायामयोग के क्षेत्र में योगदान दिया। रामदेव जगह-जगह स्वयं जाकर योग-शिविरों का आयोजन करते हैं, जिनमें प्राय: हर सम्प्रदाय के लोग आते हैं। रामदेव अब तक देश-विदेश के करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से योग सिखा चुके हैं। भारत से भ्रष्टाचार को मिटाने के लिये अभियान इन्होंने प्रारम्भ किया।

भारत में हरियाणा राज्य के महेन्द्रगढ़ जनपद स्थित अली सैयदपुर नामक गाँव में वर्ष १९६५ को गुलाबो देवी एवं रामनिवास यादव के घर जन्मे रामदेव का वास्तविक नाम रामकृष्ण यादव था। समीपवर्ती गाँव शहजादपुर के सरकारी स्कूल से आठवीं कक्षा तक पढाई पूरी करने के बाद रामकृष्ण ने खानपुर गाँव के एक गुरुकुल में आचार्य प्रद्युम्न व योगाचार्य बल्देव जी से वेद संस्कृत व योग की शिक्षा ली। योग गुरु बाबा रामदेव ने युवावस्था में ही सन्यास लेने का संकल्प किया और रामकृष्ण, बाबा रामदेव के नये रूप में लोकप्रिय हो गए।

बाबा रामदेव में 1995 में दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की। 2003 से आस्था टीवी ने हर सुबह बाबा रामदेव का योग का कार्यक्रम दिखाना शुरू किया जिसके बाद बहुत से समर्थक उनसे जुड़े। योग को जन-जन तक पहुँचाने में बाबा रामदेव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, भारत और विदेशों में उनके योग शिविरों में आम लोगों सहित कई बड़ी-बड़ी हस्तियां भी भाग लें चूंकि हैं। बाबा रामदेव से योग सीखने वालों में अभिनेता अमिताभ बच्चन और अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी का नाम उल्लेखनीय है।

योग और आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए बाबा रामदेव ने पतंजलि योगपीठ की स्थापना की। ब्रिटेन, अमेरिका, नेपाल, कनाडा और मारीशस में भी पतंजलि योगपीठ की दो शाखाएँ हैं पतंजलि योगपीठ-एक और पतंजलि योग पीठ-दो। पतंजलि आयुर्वेद का 2015-16 में 5000 करोड़ रु का कारोबार हुआ।

स्वामी रामदेव ने सन् २००६ में महर्षि दयानन्द ग्राम हरिद्वार में पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के अतिरिक्त अत्याधुनिक औषधि निर्माण इकाई पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड नाम से दो सेवा प्रकल्प स्थापित किये। इन सेवा-प्रकल्पों के माध्यम से स्वामी रामदेव योग, प्राणायाम, अध्यात्म आदि के साथ-साथ वैदिक शिक्षा व आयुर्वेद का भी प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। उनके प्रवचन विभिन्न टी० वी० चैनलों जैसे आस्था टीवी, आस्था इण्टरनेशनल, जी-नेटवर्क, सहारा-वन तथा इण्डिया टी०वी० पर प्रसारित होते हैं।

भारत में भ्रष्टाचार और इटली एवं स्विट्ज़रलैण्ड के बैंकों में जमा लगभग ४०० लाख करोड़ रुपये के “काले धन” को स्वदेश वापस लाने की माँग करते हुए बाबा ने पूरे भारत की एक लाख किलोमीटर की यात्रा भी की। भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव जी अनवरत लड़ाई जारी है और राष्ट्र निर्माण में भी वो प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा स्वामी रामदेव ने स्वच्छ भारत अभियान में भी भाग लिया। इतना ही नहीं उन्होंने इस अभियान के तहत हरिद्वार और तीर्थ नगरी ऋषिकेश को गोद लेने की घोषणा की।

बाबा रामदेव ने जब २७ फ़रवरी २०११ को रामलीला मैदान में जनसभा की थी उस जनसभा में स्वामी अग्निवेश के साथ-साथ अन्ना हजारे भी पहुँचे थे। इसके बाद दिल्ली के जन्तर मन्तर पर ५ अप्रैल २०११ से अन्ना हजारे सत्याग्रह के साथ आमरण अनशन की घोषणा की जिसमें एक दिन के लिये बाबा रामदेव भी शामिल हुए। बाबा रामदेव ने ४ जून २०११ से दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन के साथ सत्याग्रह की घोषणा कर दी। ४ जून २०११ को प्रात: सात बजे सत्याग्रह प्रारम्भ हुआ।

रात को बाबा रामदेव पांडल में बने विशालकाय मंच पर अपने सहयोगियों के साथ सो रहे थे चीख-पुकार सुनकर वे मंच से नीचे कूद पड़े और भीड़ में घुस गये। ५ जून २०११ को सुबह १० बजे तक बाबा को लेकर अफ़वाहों का बाजार गर्म रहा। यह सिलसिला दोपहर तब जाकर रुका जब बाबा ने हरिद्वार पहुँचने के बाद पतंजलि योगपीठ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपने बच कर निकलने की पूरी कहानी सुनाई।

बाबा रामदेव समय-समय पर योग शिविरों का आयोजन करते रहते हैं। अपने योग शिविरों के माध्यम से बाबा रामदेव भारतीय संस्कृति और योग के महत्व को विदेशों में भी जन-जन तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। अपने इसी क्रम को आगे बढ़ते हुए उन्होंने ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर भारतीय संस्कृति का और योग का प्रचार-प्रसार किया, जिससे वहाँ पर भी लोग उनसे काफी प्रभावित हुए।

बाबा रामदेव का एक संकल्प है कि पूरा देश स्वस्थ हो और पूरे देश को स्वस्थ बनाने की कड़ी में बाबा रामदेव ने अब सेना के जवानो को भी योग सिखना शुरू किया है। जिसकी शुरुआत उन्होंने जैसलमेर में जवानों को योग सिखाने से की।इसके अलावा बाबा रामदेव ने दिल्ली में भी सैनिक और उनके परिवारजनों के लिए योग शिविर का आयोजन किया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *