हूती विद्रोहियों की ‘ब्लैक इकोनॉमी’

तेहरान: ईरान युद्ध में अब यमन के हूती विद्रोहियों की एंट्री हो चुकी है। अभी तक हूती विद्रोही तटस्थ थे और सिर्फ बयान जारी कर ईरान का साथ दे रहे थे। लेकिन, अब उन्होंने इजरायल को निशाना बनाकर कम से कम दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। इससे मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के और ज्यादा गहराने की आशंका बढ़ गई है। हूती विद्रोही दुनिया के सबसे व्यस्ततम समुद्री मार्गों में से एक पर अपना नियंत्रण रखते हैं। इन्होंने पहले भी लाल सागर से वैश्विक समुद्री परिवहन को अपने हमलों का निशाना बनाकर रोक दिया था। अब एक बार फिर उन्होंने मध्य पूर्व संघर्ष में प्रवेश कर दुनिया की चिंता को बढ़ाया है।

खुफिया जानकारी से पता चला है कि हूती विद्रोहियों ने एक ऐसी आत्मनिर्भर युद्ध अर्थव्यवस्था खड़ी कर ली है, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवह और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन गई है। इसमें खुफिया रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि यह समूह यमन की आयातित भोजन और ईंधन अर्थव्यवस्था का फायदा उठाकर भारी राजस्व कमा रहा है। इससे हूती विद्रोहियों के सैन्य अभियानों में आर्थिक मदद मिल रही है। इस कारण हूती विद्रोही इजरायल और अमेरिका के हमलों के बावजूद खुद को फिर से संगठित करने और हमले को अंजाम देने में सक्षम बना रहे हैं।

हूती विद्रोहियों को अंसार अल्लाह के नाम से भी जाना जाता है। यह यमन का एक सशस्त्र शिया समूह है।
हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है, जिसके दम पर इन्होंने यमन की राजधानी सना सहित बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है।हूती विद्रोही खुद को ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ का हिस्सा मानते हैं। जो गाजा पट्टी पर हमले का विरोध और ईरान का समर्थन करते हैं।1990 के दशक में स्थापित, हूती विद्रोही शिया इस्लाम के जैदी संप्रदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं।2023 से हूतियों ने गाजा में फिलिस्तीनियों के समर्थन में लाल सागर से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे।

हूती विद्रोहियों के नेटवर्क में तीन अहम बंदरगाह शामिल हैं। इनके नाम होदेइदाह बंदरगाह, सलीफ बंदरगाह और रास ईसा बंदरगाह हैं। हूती विद्रोही इन तीनों बंदरगाहों के जरिए भारी सीमा शुल्क और टैरिफ वसूलते हैं। कुछ मामलों में जरूरी सामानों पर यह टैरिफ 100 प्रतिशत तक लगाया जाता है। इसके साथ ही जरूरी भोजन और ईंधन के आयात पर भी अतिरिक्त टैक्स वसूला जाता है। अनुमान है कि 2022 से 2024 के बीच, हूती विद्रोहियों ने ईंधन आयात शुल्क से लगभग 4 अरब डॉलर जुटाए हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि हूती विद्रोहियों को अवैध लेवी और मुनाफे से लगभग 5.5 अरब डॉलर की कमाई हुई है। यह मुनाफा लगातार बढ़ता जा रहा है, क्योंकि यमन की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। इस कमाई का इस्तेमाल मिसाइल उत्पादन, ड्रोन निर्माण और नौसैनिक गतिविधियों को तेज करने में किया जाता है। हूती विद्रोही आयातित या तस्करी किए गए ईंधन को ब्लैक मार्केट में बढ़ी हुई कीमतों पर बेचकर भी मुनाफा कमाते हैं। यह ऐसी कमाई है, जिसके जल्द बंद होने का कोई अनुमान नहीं है।

इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यमन के हूती विद्रोही हथियारों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले पुर्जों, कच्चे माल और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए चीन पर निर्भर हैं। इन्हें चीन से दोहरे उपयोग वाले पुर्जे और कच्चे माल आसानी से मिलते हैं। हाल के वर्षों में हूती विद्रोहियों को भेजे जा रहे माल की जब्ती में 35 प्रतिशत की हिस्सेदारी चीन की मिली है। हूती विद्रोही ईरान के प्रतिबंधित तेल को चीनी रिफाइनरियों तक भी पहुंचा रहे हैं। इससे भारी राजस्व मिलता है, जिसका फायदा हूती विद्रोही आसानी से उठा रहे हैं।

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