भारत की भूमि पर आंख उठाने वालों को करारा जवाब मिला: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली. पीएम मोदी ने कहा कि भारत में जहां एक तरफ़ बड़े-बड़े संकट आते गए, वहीं सभी बाधाओं को दूर करते हुए अनेकों-अनेक सृजन भी हुए. नए साहित्य रचे गए, नए अनुसंधान हुए, नए सिद्धांत गड़े गए, यानि संकट के दौरान भी हर क्षेत्र में सृजन की प्रक्रिया जारी रही और हमारी संस्कृति पुष्पित-पल्लवित होती रही. इसी साल में, देश नये लक्ष्य प्राप्त करेगा, नयी उड़ान भरेगा, नयी ऊंचाइयों को छुएगा। मुझे, पूरा विश्वास, 130 करोड़ देशवासियों की शक्ति पर है, आप सब पर है, इस देश की महान परम्परा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम के जरिए देश को संबोधित किया। इस बार वे कोरोनावायरस महामारी के कारण प्रभावित हो रही पढ़ाई और मानसून पर चर्चा कर सकते हैं। इस बार की मन की बात कार्यक्रम के लिए उन्होंने 14 जून को ट्वीट करके जनता से सुझाव मांगे थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, ‘‘इस महीने #MannKiBaat कार्यक्रम 28 जून को प्रसारित होगा। चूंकि इसमें दो हफ्ते बाकी हैं, इसलिए अपने सुझाव दें। इससे मैं ज्यादा से ज्यादा लोगों के विचार जान सकूंगा और फोन कॉल के ​जरिए उनसे जुड़ सकूंगा। मुझे विश्वास है कि आपके पास कोविड 19 से लड़ाई और कई दूसरे मुद्दों पर कहने के लिए बहुत कुछ होगा।’’

पिछली बार मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने जनता से योग और कोरोना महामारी पर चर्चा की थी। उन्होंने कहा था, ‘‘कोरोना काल में देखा जा रहा है कि हरिद्वार से हॉलीवुड तक लोग योग अपना रहे हैं। कई लोग आयुर्वेद की तरफ लौट रहे हैं।

कम्युनिटी, इम्युनिटी और यूनिटी के लिए योग बेहतर साबित हो सकता है। जीवन में योग को बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय ने एक प्रतियोगिता शुरू की है। दुनियाभर से लोग इसमें हिस्सा ले सकते हैं। आपको योग करते हुए वीडियो पोस्ट करना है और योग से आए बदलावों को बताना है।’’

पीएम मोदी ने कहा कि भारत में जहां एक तरफ़ बड़े-बड़े संकट आते गए, वहीं सभी बाधाओं को दूर करते हुए अनेकों-अनेक सृजन भी हुए. नए साहित्य रचे गए, नए अनुसंधान हुए, नए सिद्धांत गड़े गए,यानि संकट के दौरान भी हर क्षेत्र में सृजन की प्रक्रिया जारी रही और हमारी संस्कृति पुष्पित-पल्लवित होती रही.

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक साल में एक चुनौती आए या पचास, नंबर कम-ज्यादा होने से, वो साल, ख़राब नहीं हो जाता। भारत का इतिहास ही आपदाओं और चुनौतियों पर जीत हासिल कर, और ज़्यादा निखरकर निकलने का रहा है. सैकड़ों वर्षों तक अलग-अलग आक्रांताओं ने भारत पर हमला किया, लोगों को लगता था कि भारत की संरचना ही नष्ट हो जाएगी, लेकिन इन संकटों से भारत और भी भव्य होकर सामने आया.

मोदी ने कहा कि इन सबके बीच, हमारे कुछ पड़ोसियों द्वारा जो हो रहा है, देश उन चुनौतियों से भी निपट रहा है I वाकई, एक-साथ इनती आपदाएं, इस स्तर की आपदाएं, बहुत कम ही देखने-सुनने को मिलती हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि अभी, कुछ दिन पहले, देश के पूर्वी छोर पर तूफान अम्फान आया, तो पश्चिमी छोर पर साइक्लोन निसर्ग आया. कितने ही राज्यों में हमारे किसान भाई–बहन टिड्डी दल के हमले से परेशान हैं और कुछ नहीं, तो देश के कई हिस्सों में छोटे-छोटे भूकंप रुकने का ही नाम नहीं ले रहे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ट्वीट कर कहा था कि रविवार को 11 बजे दिन मन की बात कार्यक्रम को सुनें. ये मन की बात कार्यक्रम का 66वां संस्करण है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर महीने के आखिरी रविवार को मन की बात कार्यक्रम में देशवासियों के साथ संवाद करते हैं.

इससे पहले 14 जून को पीएम मोदी ने देशवासियों से ‘मन की बात’कार्यक्रम के लिए सुझाव और विचार मांगे थे. पीएम ने ट्वीट कर कहा था कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपने विचारों को शेयर करें. पीएम ने कहा था कि मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं कि आपके पास कोविड-19 से लड़ाई और कई दूसरे मुद्दों पर कहने के लिए बहुत कुछ होगा.

जब पीएम ने 14 जून को मन की बात कार्यक्रम के लिए लोगों से सुझाव मांगे थे तब तक गलवान में चीनी धोखे की घटना सामने नहीं आई थी. 15 जून की रात को गलवान में भारतीय सेना की चीनी सैनिकों से भिड़ंत हुई थी. माना जा रहा है कि पीएम मोदी अपने संवाद में गलवान में भारतीय सैनिकों के पराक्रम का जिक्र कर सकते हैं.

पिछले दो मन की बात कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी देशवासियों से कोरोना संक्रमण पर बात कर चुके हैं. 31 मई को हुए मन की बात कार्यक्रम में पीएम ने लोगों से अपनी सुरक्षा का ध्यान रखने और एहतियात बरतने को कहा था.

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