उत्तराखंडः तेजी से बढ़ रहा है कोरोना से मौत का ग्राफ, 261 मरीजों की हुई मौत

देहरादून। उत्तराखंड में कोरोना संक्रमितों की मौत का आंकड़ा बढ़ना चिंता के साथ ही चुनौतियां भी बढ़ा रहा है। प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य महकमा इसको लेकर चिंतित है। प्रदेश में अनलाॅक चार में संक्रमितों का आंकड़ा ही नहीं बढ़ रहा बल्कि संक्रमितों की मौत का आंकड़ा भी प्रतिदिन बढ़ रहा है। इससे शासन-प्रशासन और स्वास्थ्य महकमें के माथे पर पसीना आना भी लाजमी है।

उत्‍तराखंड में संक्रमितों की बढ़ती संख्या के बीच मौत का ग्राफ भी लगातार बढ़ रहा है। अनलॉक-4 में यह आंकड़ा ज्यादा तेजी से बढ़ा है। अभी सितंबर बीता भी नहीं और कोरोना संक्रमित 261 मरीज दम तोड़ चुके हैं। यह मरने वालों की कुल संख्या का 49 फीसद है। पिछले छह माह की स्थिति देखें तो अभी तक सर्वाधिक मौत अगस्त माह में हुई थी। गत माह कोरोना संक्रमित 189 मरीजों की मौत हुई थी, लेकिन इस माह मौत का भी रिकॉर्ड टूट गया है।

उत्तराखंड में कोरोना का पहला मामला पंद्रह मार्च को सामने आया था, जबकि पहली मौत मई माह में हुई। इसके बाद लॉकडाउन-4 तक संक्रमितों की संख्या जरूर बढ़ी पर मरने वालों की संख्या कम ही हुई थी, लेकिन अनलॉक के पहले चरण से ही मरने वालों की संख्या में तेजी आई है। कोरोना के शुरुआती चरण में बहुत कम मरीज गंभीर स्थिति में पहुंच रहे थे। ऐसे चुनिंदा ही मरीज थे जिन्हें आइसीयू या वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही थी। पर अब स्थिति ठीक उलट हो चुकी है।

स्थिति ये है कि बढ़ते मामलों के बीच आइसीयू बेड तक कम पड़ गए हैं। सितंबर माह का आकलन करें तो पिछले कुछ वक्त से हर दिन औसतन 10-11 मरीजों की मौत हो रही है। चिंताजनक ये कि पिछले 23 दिन में 23893 लोग संक्रमित हो चुके हैं।

ऐसे में इंतजाम भी एक-एक कर ध्वस्त होते जा रहे हैं। जिस तरह की स्थित अभी है मरने वालों की संख्या पर अभी लगाम लगती नहीं दिख रही। बल्कि हालात ये बन गए हैं कि कोरोना के साथ ही मरीज व्यवस्था से भी लड़ रहे हैं। आइसीयू की आस में उनकी सांसें उखड़ रही हैं। ऐसे में स्थिति और भयावह हो सकती है।

प्रदेश में सबसे ज्यादा मौत चार मैदानी जिलों में हुई हैं। इनमें भी देहरादून पहले पायदान पर है। अभी तक उत्तराखंड में कोरोना संक्रमित 530 मरीज दम तोड़ चुके हैं। जिनमें 92 फीसद मामले देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी व नैनीताल से हैं। 48 फीसद मौत सिर्फ जनपद देहरादून में हुई है। पर्वतीय जिलों में सर्वाधिक पंद्रह मौत पौड़ी गढ़वाल में हुई है। सिर्फ चमोली एकमात्र ऐसा जिला है जहां अभी तक एक भी मरीज की मौत नहीं हुईन है।

शुरुआती चरण में जो मरीज मिल भी रहे थे, उनमें से अधिकांश बिना लक्षण वाले सामान्य किस्म के मरीज थे। कम मरीजों को ऑक्सीजन, आइसीयू और वेंटीलेटर की जरूरत पड़ रही थी। लेकिन, पिछले दो महीनों में ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है और अब आइसीयू और वेंटीलेटर फुल चल रहे हैं। साथ ही ऑक्‍सीजन की खपत भी तीन गुना तक बढ़ गई है।

जुलाई महीने के शुरू में राज्य के अस्पतालों में हर दिन दो हजार क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन की डिमांड थी जो अब बढ़कर छह हजार के करीब पहुंच गई है। बढ़ते गंभीर मरीजों की संख्या को देखते हुए अस्पतालों को ऑक्सीजन का स्टॉक बढ़ाने को भी कहा गया है।

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