उत्तराखंड 81 पहुंची कोरोना संक्रमितों की संख्या

देहरादून।गुरुवार को दस साल की एक बच्ची समेत छह और कोरोना पॉजिटिव मिले थे। देहरादून और ऊधमसिंहनगर जिले में सामने आए ये सभी प्रवासी हैं। यह लोग दिल्ली और मुंबई से देहरादून लौटे थे। पिछले सात दिन में अन्य राज्यों से उत्तराखंड आए 16 लोग संक्रमित पाए गए हैं। राज्य में संक्रमितों की कुल संख्या 81 पहुंच गई है, इनमें से 51 स्वस्थ हो चुके हैं।

उत्तराखंड में प्रवासियों की आमद बढ़ने के साथ ही कोरोना का ग्राफ भी बढ़ रहा है। शुक्रवार को कोरोना संक्रमित महिला के बेटे में भी कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। युवक कुछ दिन पहले अपनी मां के साथ गरुग्राम से देहरादून पहुंचा था।

स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अमिता उप्रेती ने बताया कि गुरुवार को 366 सैंपल की रिपोर्ट प्राप्त हुई है। जिनमें 360 की रिपोर्ट नेगेटिव और छह केस पॉजिटिव हैं। इनमें देहरादून में मसूरी निवासी 36 वर्षीय महिला बच्चों के साथ रिश्तेदारी में दिल्ली गई हुई थी।

इसी तरह, खटीक मोहल्ला सीमेंट रोड निवासी 45 वर्षीय मीट विक्रेता 20 मार्च को किसी कार्य से दिल्ली गया था। लॉकडाउन होने के चलते वह वहीं रिश्तेदारी में रुक गए। 12 मई को वह टैक्सी से देहरादून पहुंचे थे। दूसरी तरफ सुंदरवाला निवासी 36 वर्षीय युवक जो कि मुंबई में नौकरी करता है।

वह भी 12 तारीख को ही देहरादून पहुंचा था। उसी दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आशारोड़ी चेक पोस्ट पर तीनों के सैंपल लेकर कोरोना जांच के लिए भेजे थे। तीनों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव पाए जाने पर गुरुवार को मसूरी निवासी महिला, बच्चों सहित परिवार के तीन सदस्य, डीएल रोड निवासी मीट विक्रेता और उनकी पत्नी व दो बच्चों और सुंदरवाला, रायपुर निवासी युवक और उनके माता-पिता को राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा दिल्ली व मुम्बई आइसीडीएस को भी सूचना भेज दी गई है।

ऊधमसिंहनगर जिले में भी तीन नए मामले सामने आए हैं। इनमें रुद्रपुर खेड़ा निवासी सात लोग किराए पर इनोवा लेकर 12 मई को दिल्ली से चले। कार चालक ने इन्हें रामपुर में छोड़ दिया। यहां से ये लोग पैदल ही स्वार पहुंचे और फिर पिकअप वाहन से रामपुर-रुद्रपुर सीमा पहुंचे। पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग की मदद से इन्हें जवाहर लाल नेहरु अस्पताल में आइसोलेशन सेंटर में भर्ती कराया था।

इन सात लोगों में दस साल की एक बच्ची में कोरोना की पुष्टि हुई है, जबकि अन्य की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। ऊधमसिंहनगर के ग्राम छिनकी और नदन्ना के चार लोग अंधेरी, महाराष्ट्र से अपनी कार से 12 मई को वापस लौटे थे। इन सभी तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आइसोलेट किया गया था। जिनमें दो युवकों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, बाकी दो की रिपोर्ट नेगेटिव है।

पंजाब और दिल्ली में संक्रमित पाए जाने के बाद उत्तराखंड में इलाज कराने वाले दो मरीजों समेत कुल संक्रमितों का आंकड़ा 80 पहुंच गया है। 51 मरीजों के स्वस्थ होने के बाद वर्तमान में प्रदेश में 28 एक्टिव केस हैं। एक महिला की मौत भी हो चुकी है। गुरुवार को देहरादून में दो मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए हैं।

मसूरी में होम क्वारंटाइन बुजुर्ग की 12 मई को मौत हो गई थी। उनकी कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। इसके अलावा हर्रावाला स्थित रिलायंस के वेयर हाउस में पुणो से सामान लेकर पहुंचा ट्रक चालक बेहोश हो गया था। उसके साथ क्लीनर का भी सैंपल जांच को भेजा था, दोनों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है।

शहर में कोरोना का पहला मामला सामने आने के बाद लोग दहशत में हैं। पुलिस-प्रशासन ने लंढौर के बूचड़खाना मोहल्ले को सील कर यहां लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी है। मोहल्ले में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रशासन के माध्यम से होगी। महिला और उसके परिवार को अस्पताल में भर्ती कराने के साथ ही उनके संपर्क में आने वाले टैक्सी चालक समेत 25 लोगों को संस्थागत क्वारंटाइन में रखा गया है।

कोरोना संक्रमित पाई गई लंढौर के बूचड़खाना में रहने वाली महिला अपने दो बच्चों के साथ बीती 12 मई की रात दिल्ली से टैक्सी बुक करके मसूरी पहुंची थी। राज्य में प्रवेश करते वक्त देहरादून की आशारोड़ी चेकपोस्ट में उसका सैंपल लिया गया था, जो पॉजिटिव आया है।

इसकी जानकारी होते ही गुरुवार सुबह कोतवाल विद्याभूषण नेगी और कोरोना मामलों के नोडल अधिकारी आशुतोष सती मेडिकल टीम के साथ बूचड़खाना मोहल्ले पहुंचे और महिला, उसके पति व बच्चों को एंबुलेंस से देहरादून स्थित दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय भेज दिया। मोहल्ले को सीज करने के साथ ही संक्रमित महिला और उसके परिवार की कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग की जा रही है। मसूरी आने के बाद महिला परिवार के साथ बाजार भी गई थी।

संयुक्त सिविल अस्पताल के नोडल अधिकारी डॉ. आलोक जैन ने बताया कि जिस टैक्सी में महिला दिल्ली से मसूरी आई थी, उसके चालक को भी क्वारंटाइन किया गया है। इसके अलावा संक्रमित महिला और टैक्सी ड्राइवर के संपर्क में आए 24 अन्य लोग भी क्वारांटाइन किए गए हैं। सभी को माल रोड स्थित एक होटल में रखा गया है।

एसडीएम वरुण चौधरी ने बताया कि टैक्सी चालक दिल्ली से लौटने के बाद टैक्सी का पास बनवाने के लिए कचहरी स्थित एसडीएम कार्यालय गया था। ऐसे में एसडीएम कार्यालय परिसर और आवास को सेनिटाइज कराने के बाद एहतियातन कुछ दिनों के लिए सील कर दिया गया है। एसडीएम ने बताया कि कार्यालय बंद होने के बाद भी ऑनलाइन कार्य होते रहेंगे।

बूचड़खाना मोहल्ले से सटे क्षेत्रों को वहां के लोगों ने एहतियातन खुद ही सील कर लिया है। मंसाराम किरकिट मोहल्ले को वहां के निवासियों ने खुद ही सील कर बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। लोगों का कहना है कि बाहर से आने वाले लोगों की समुचित जांच नहीं हो रही।

प्रवासियों को उत्तराखंड वापस आने की मंजूरी मिलने के बाद देहरादून वापस आने वाले लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। देहरादून जिला प्रशासन ने गुरुवार को ऐसे 4802 लोगों को के पास को स्वीकृति दी। इसके अलावा दून से बाहर जाने वाले लोगों के 1825 पास को मंजूरी दी गई।

जिलाधिकारी ने बताया कि जो भी लोग दून आ रहे हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से होम क्वारंटाइन का पालन करना होगा। नियमों की अनदेखी करने वाले लोगों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम में तत्काल मुकदमा दर्ज करने को कहा गया है। बताया कि आने वाले सभी लोगों का पूरी गंभीरता से स्वास्थ्य परीक्षण करने का निर्देश दिया गया है।

दिल्ली से इलाज कराकर लौटे चमन विहार निवासी बुजुर्ग व्यक्ति में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी। यह जांच दिल्ली के एक निजी अस्पताल ने की थी। इसके बाद चमन विहार निवासी को ऋषिकेश स्थित एम्स में भर्ती करा दिया था।

साथ ही दो मई को चमन विहार की 11 नंबर विंग के एक भाग को सील कर दिया गया था। हालांकि, एम्स में कराई गई जांच में लगातार दो रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद बुजुर्ग व्यक्ति को होम क्वारंटाइन के लिए डिस्चार्ज कर दिया गया था।

जिला प्रशासन का मानना है कि बुजुर्ग व्यक्ति को लेकर चमन विहार में किसी तरह का खतरा नहीं दिखता। ऐसे में विंग नंबर 11 के सील हिस्से को खोलने पर विचार किया जा रहा है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि नियमों के मुताबिक सील खोलने की अवधि 30 मई को पूरी होगी,

मगर वहां के सामान्य हालात को देखते हुए शासन से सलाह ली जा रही है, जिससे पृथक लॉकडाउन को समाप्त कर दिया जाए। इससे संबंधित क्षेत्र के लोगों को अनावश्यक पाबंदी में भी नहीं रहना पड़ेगा।

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