पीएम मोदी ने ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने की अपील की

नई दिल्लीः ‘आजकल हमारे देश में एंड्युरेंस स्पोर्ट्स की संस्कृति तेजी से उभर रही है। इससे मतलब ऐसी गतिविधियों से है, जिनमें इंसानी क्षमता की परख होती है। मुझे बताया गया है कि देशभर में हर महीने 1500 से ज्यादा एंड्युरेंस स्पोर्ट्स का आयोजन होता है, जिसमें हिस्सा लेने के लिए एथलीट्स दूर-दूर तक जाते हैं। इसका उदाहरण है आयरनमैन जिसमें समुद्र में चार किलोमीटर तक तैरना, 180 किलोमीटर की साइकिल चलाना और 82 किलोमीटर तक मैराथन करना जैसे काम एक दिन में करने होते हैं।

ऐसी कई और प्रतियोगिताएं हैं, जो युवाओं में काफी लोकप्रिय हो रही हैं। इनसे फिटनेस को बढ़ावा मिलता है। साथियों आपसे हर महीने मिलना मेरे लिए नया अनुभव होता है। आपकी गाथाएं और आपके प्रयास मुझे प्रेरित करते हैं। आपके सुझाव मुझे इस कार्यक्रम में भारत की विविधताओं को समेटने की प्रेरणा मिलती है। सर्दियों के मौसम में आप अपना और अपने परिवार का ध्यान रखें। अगले महीने हम नए विषयों पर चर्चा करेंगे। तब तक के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।’

पीएम ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा, खेलों की दुनिया में भी भारत का परचम लहराया है। कुछ दिन पहले ही भारत को राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी मिलने का भी एलान हुआ। ये उपलब्धियां देश की हैं, देशवासियों की है। और ‘मन की बात’ देश के लोगों की ऐसी उपलब्धियों को, लोगों के सामूहिक प्रयासों को जन-सामान्य के सामने लाने का एक बेहतरीन मंच है।

‘खेलों के लिहाज से भी ये महीना भारत के लिए सुपरहिट रहा। पहले महिला टीम ने वर्ल्ड कप जीता। कुछ दिनों पहले ही बधिर ओलंपिक में 20 मेडल जीते। हमारी महिला टीम ने कबड्डी वर्ल्ड कप जीता। वर्ल्ड बॉक्सिंग में भी हमारे खिलाडियों ने 20 पदक जीते। हमारी ब्लाइंड महिला टीम ने बिना कोई मैच हारे वर्ल्ड कप जीता। इस टीम का हौसला और जज्बा हमें बहुत कुछ सिखाता है। ये जीत हर भारतीय को प्रेरित करती रहेगी।’

‘प्यारे देशवासियों मैं आप सभी से वोकल फॉर लोकल के मंत्र को साथ लेकर चलने की अपील करता हूं। हाल ही में जी20 सम्मेलन के दौरान मैंने वैश्विक नेताओं को ऐसे उपहार भेंट किए, जो वोकल फॉर लोकल के मंत्र को बढ़ावा देते हैं। मैंने जापान की प्रधानमंत्री को भगवान बुद्ध की चांदी की प्रतिमा भेंट की।

इटली की पीएम को करीमनगर की एक कला भेंट की। मैं चाहता हूं कि दुनिया हमारे कारीगरों की प्रतिभा को पहचाने। मुझे खुशी है कि वोकल फॉर लोकल की भावना को देशवासियों ने अपना लिया है। हाल के त्योहारों की खरीद में लोगों ने मन से भारत के उत्पादों को चुना। इस बार युवाओं ने भी वोकल फॉर लोकल के अभियान को गति दी। आगामी क्रिसमस के समय भी वोकल फॉर लोकल की भावना का ध्यान रखे।’

‘साथियों कुछ हफ्ते पहले मैं भूटान गया था। अपनी इस यात्रा में मैंने भूटान के राजा और पूर्व राजा और अन्य लोगों से मुलाकात की। इस दौरान हर किसी से एक बात जरूर सुनने को मिली। हर कोई वहां भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष भेजे जाने की तारीफ कर रहे थे। ये सुनकर मेरा हृदय खुशी से भर उठा। कई अन्य देशों ने भी, जहां भगवान बुद्ध के अवशेष भेजे गए, उन्होंने भी ऐसी ही खुशी जाहिर की।’

‘अनेक देशों में विंटर फेस्टिवल, स्कीइंग, फैमिली स्नोपार्क जैसे अनुभवों को अपनी पहचान बनाया है। हमारे देश में भी विंटर टूरिज्म की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। इन दिनों उत्तराखंड का विंटर टूरिज्म लोगों को आकर्षित कर रहा है। कई जगह लोगों के बीच खूब प्रसिद्ध हो रही हैं। हाल ही में आदि कैलाश में राज्य की पहली हाई एल्टीट्यूड मैराथन रन का आयोजन किया गया। 60 किलोमीटर लंबी आदि कैलाश रन कड़कड़ाती सर्दी में सुबह 5 बजे हुआ था। आदि कैलाश की यात्रा पर जहां तीन साल पहले तक दो हजार तक पर्यटक आते थे, आज यह संख्या बढ़कर 30 हजार तक पहुंच गई है।’

‘2 दिसंबर से काशी तमिल संगमम की शुरुआत हो रही है। यह उन सभी लोगों के एक महत्वपूर्ण मंच गया है, जिन्हें तमिल भाषा से प्यार है। इस बार भी काशी वासी पूरे जोश और उत्साह के साथ तमिलनाडु से आने वाले अपने भाई-बहनों का स्वागत करने के लिए उत्सुक है। इसके साथ ही ऐसे और मंचों के बारे में सोचे, जिनसे एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना मजबूत हो।’

‘मेरे प्यारे देशवासियों, जब भारत के सुरक्षा तंत्र को मजबूती मिलती है तो सभी को खुशी होती है। पिछले दिनों आईएनएस माहे को लॉन्च किया गया। इसका माहे नाम, उस स्थान माहे के नाम पर रखा गया है, जिसकी समृद्ध विरासत रही है। केरल और तमिलनाडु के लोगों ने तारीफ की है। हमारी नौसेना तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही है। 4 दिसंबर को हम नौसेना दिवस मनाने जा रहे हैं। ये दिन हमारे बहादुर नौसेना जवानों को सम्मान देने का अवसर है।’

‘हरियाणा के कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध हुआ। अब इस युद्ध के अनुभव को कुरुक्षेत्र में डिजिटल तरीके से भी महसूस कर सकते हैं। कुरुक्षेत्र में ब्रह्म सरोवर पर आयोजित गीता महोत्सव में शामिल होना भी मुझे आनंद से भर गया था। इस महोत्सव में यूरोप, सेंट्रल एशिया समेत दुनिया के कई देश शामिल हुए। इस साल सऊदी अरब में पहली बार गीता की प्रस्तुति की गई।’

‘भारत की महान संस्कृति में शांति और करुणा का भाव सर्वोपरि रहा है। दूसरे विश्वयुद्ध के समय जब चारों ओर भय का माहौल था। उस वक्त जामनगर के राजा दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जडेजा जामसाब ने विश्वयुद्ध के बीच यहूदी बच्चों की रक्षा की। उन्होंने तब गुजरात में हजारों यहूदी बच्चों को शरण देकर उनकी रक्षा की, जो आज भी मिसाल है। पिछले साल पोलैंड के वारसॉ में मुझे जामसाब की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने का मौका मिला था, जो मेरे लिए अविस्मरणीय पल रहा।’

‘जब चंद्रयान 2 संपर्क से बाहर हो गया था, उस दिन पूरा देश और वैज्ञानिक कुछ पल के लिए निराश हुए, लेकिन उसी दिन वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 की सफलता की कहानी लिखनी शुरू कर दी थी। हर बार जब मैं युवाओं की लगन और वैज्ञानिकों के समर्पण को देखता हूं तो मन उत्साह से भर जाता है, यही हमारे देश की ताकत है।’

‘हम सभी शहद की मिठास से परिचित होंगे, लेकिन हमें ये पता नहीं चलता कि इसके पीछे कितने लोगों की मेहनत है। जम्मू कश्मीर के सुलाई में शहद को जीआई टैग मिला है, जिसके बाद इसकी पहचान पूरे देश में बन रही है। दक्षिण कन्नड़ जिले की वनस्पतियां शहद उत्पादन के लिए अच्छी मानी जाती हैं।

यहां ग्रामजन्य संस्था ने शहद उत्पादन को ब्रांडेड बनाकर शहरों तक बेचा है, जिसका लाभ किसानों को मिल रहा है। आज भारत शहद उत्पादन में नए रिकॉर्ड बना रहा है। आज भारत में शहद उत्पादन डेढ़ लाख मीट्रिक टन से ज्यादा हो गया है। इससे हजारों लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं। इससे देश के कोनों में शहद की मिठास भी बढ़ रही है और ये मिठास किसानों की आय भी बढ़ा रही है।’

‘हाल ही में भारत के स्पेस इकोसिस्टम को स्काईरूट के इन्फिनिटी कैंपस ने नई उड़ान दी है। कृषि क्षेत्र में भी देश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 3.57 करोड़ टन के खाद्यान उत्पादन के साथ रिकॉर्ड बनाया है। कुछ दिन पहले ही भारत को राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी मिली है।

ये उपलब्धियां देश की और देशवासियों की हैं। खेलों में भी हमारे खिलाड़ियों ने देश का नाम रोशन किया है। साथियों अगर मन में लगन हो, टीम की तरह काम करने का विश्वास हो और फिर से उठ खड़े होने का साहस हो तो कठिन से कठिन काम भी पूरे होते हैं। आज दुनिया के देश अंतरिक्ष की ऊंचाईयों को नाप रहे हैं।’

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