900 आवश्यक दवाओं की कीमतों में वृद्धि !

नई दिल्ली : एक अप्रैल से करीब 900 दवाओं के दाम बढ़ाने की घोषणा की गई है. भारत के औषधि मूल्य नियामक और राष्ट्रीय औषधि मूल्य प्राधिकरण (एनपीपीए) के निर्देश के बाद इसकी जानकारी दी गई है.जिन दवाओं की कीमतें बढ़ने जा रही हैं, उनमें दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाएं शामिल हैं. कीमतों में 1 अप्रैल से लगभग 0.65 प्रतिशत की वृद्धि होने वाली है. हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि कीमतों में यह वृद्धि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से संबंधित नहीं है.

ईटीवी भारत को भारतीय औषधि उद्योग परिसंघ (सीआईपीआई) के सलाहकार विनोद कलानी ने कहा, “राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची में शामिल निर्धारित दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य में यह वृद्धि एक नियमित प्रक्रिया है. इसका ईरान और इजराइल-अमेरिका युद्ध से कोई संबंध नहीं है.”रासायनिक एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय औषधि मूल्य प्राधिकरण ने एक कार्यालय ज्ञापन में घोषणा की है कि निर्माता सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची में शामिल निर्धारित दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य में वृद्धि कर सकते हैं.

ईटीवी भारत के पास मौजूद ज्ञापन में कहा गया है, “वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार विभाग के आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आंकड़ों के आधार पर, वर्ष 2025 में डब्ल्यूपीआई में वर्ष 2024 की इसी अवधि की तुलना में (+)0.64956% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है.”

ज्ञापन के अनुसार, डब्ल्यूपीआई के आधार पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) बढ़ाने के लिए निर्माताओं को सरकार की पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी. दवा (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 (डीपीसीओ, 2013) के अनुच्छेद 16(2) के प्रावधानों के अनुसार, निर्माता इस डब्ल्यूपीआई के आधार पर निर्धारित दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में वृद्धि कर सकते हैं और इस संबंध में सरकार की पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी.

कलानी ने कहा कि केंद्र सरकार मौजूदा स्थिति से भलीभांति परिचित है और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है. कलानी ने कहा, “सरकार द्वारा गठित सात अधिकार प्राप्त समितियां निश्चित रूप से मुद्दों को सुलझाएंगी ताकि भारत के बाजारों पर इसका असर न पड़े.”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संघर्ष के संभावित दीर्घकालिक प्रभावों से निपटने के लिए सात अधिकार प्राप्त समितियों के गठन की घोषणा की और राज्यों से संकट से निपटने के लिए केंद्र के साथ ‘टीम इंडिया’ दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया.यह अधिकार प्राप्त समिति युद्ध के परिणामों से निपटेगी और ईंधन, उर्वरक, गैस, आपूर्ति श्रृंखला और मुद्रास्फीति के लिए रणनीतियां विकसित करेगी.

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