बीजिंग: ताइवान के मुद्दे पुराने दुश्मन चीन और जापान के बीच बीते कुछ समय से तनाव बढ़ा हुआ है। ताइवान पर जापान के बयान से शुरू हुई जुबानी जंग आगे बढ़ते हुए युद्ध की धमकी तक पहुंच गई है। एक्सपर्ट ने चेताते हुए कहा है कि एशिया की इन दो सबसे बड़ी इकॉनमी के बीच एक गलत कदम सैन्य टकराव शुरू कर सकता है। ऐसा हुआ तो यह टकराव इन दो देशों से आगे बढ़ते हुए विश्व युद्ध जैसे हालात तक पहुंच सकता है। एक्सपर्ट ने ऐसी तीन संभावनाओं पर बात की है।
द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि जापान और चीन के नेताओं के बीच जुबानी जंग क्षेत्र में खतरनाक सुरक्षा स्थिति को दिखाती है। उप्साला यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अशोक स्वैन ने द सन से कहा, ‘हालांकि दोनों देशों के बीच जंग का अंदेशा कम है लेकिन स्थिति बिगड़ने से इनकार नहीं किया जा सकता है।’
आर्मी एनालिस्ट फिलिप इंग्राम ने कहा कि जापान इस इलाके में ताकत दिखाने के लिए अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है। जापान फिलहाल वह कर रहा है, जो उसने दूसरे वर्ल्ड वॉर के बाद से नहीं किया है। चीन पहले से ही आर्मी पर भारी खर्च कर रहा है और ताइवान पर सख्त है।
प्रोफेसर स्वेन ने उन तीन संभावनों के बारे में बात की है, जिनको बीजिंग और टोक्यो दोनों रेड लाइन के तौर पर देखेंगे। तीन ऐसी स्थिति हैं, जिसमें चीन और जापान आमने-सामने आ सकते हैं। यानी ऐसी घटनाओं पर चीन और जापान में पूरी तरह से जंग छिड़ सकती है।
प्रोफेसर स्वेन का कहना है कि चीन-जापान में युद्ध भड़काने वाली घटनाओं में फाइटर जेट क्लैश या समुद्री जंगी जहाजों की टक्कर शामिल है। इससे मिलिट्री एक्टिविटीज का स्पॉट बनता है। इसमें तनाव को रोकना मुश्किल होता है। राजनेताओं के दखल से पहले ही ऐसी स्थिति में गोलीबारी शुरू हो चुकी होती है।
प्रोफेसर स्वेन ने कहा कि दूसरी वजह कोई गलतफहमी या दुर्घटना हो सकती है। इसमें किसी पायलट के गलत रास्ता लेना भी शामिल है। ऐसे में दोनों देशों की तरफ से मिलिट्री एक्शन से चीजें कंट्रोल से बाहर हो जाती हैं। साल 1937 में मार्को पोलो ब्रिज हादसे ऐसा ही था, जिसे दूसरे चीन-जापान युद्ध की शुरुआत माना जाता है।
प्रोफेसर स्वेन ने कहा कि तीसरी संभावना चीन के लिए एक और रेड लाइन यानी जंग की संभावना जापान का ताइवान के पास हथियार तैनात करना होगा। ताइवान की जमीन के पास या उस पर हथियार होने पर चीन सख्त और तुरंत मिलिट्री जवाब देगा। जापान की ताइवान में मिसाइल तैनाती निश्चित ही मिलिट्री टकराव की ओर ले जाएगा।
दोनों देशों की लड़ाई के फैलने पर एक्सपर्ट का कहना है कि जापान को सुरक्षा वादे की वजह से अमेरिका जंग में घसीटा जाने वाला पहला देश होगा। ऐसा यूएस-जापान सिक्योरिटी ट्रीटी की वजह से होगा, जिसमें वॉशिंगटन ने टोक्यो की रक्षा का वादा किया है। अमेरिका ने जापानी जमीन पर बड़ी मिलिट्री फैसिलिटी और फोर्स रखी है।
रूस और चीन के बीच कोई नाटो स्टाइल का डिफेंस एग्रीमेंट नहीं है लेकिन गहरा स्ट्रेटेजिक रिश्ता है। कई एक्सपर्ट मानते हैं कि रूसी सेना चीन की रक्षा में मदद करेगा। इस संघर्ष में रूसी प्रेसीडेंट पुतिन यूरोप पर हमले का मौका तलाश सकते हैं। ईरान और उत्तर कोरिया भी रूस-चीन को सपोर्ट दे सकते हैं। इससे यह लड़ाई तीसरे विश्वयुद्ध की शक्ल अख्तियार कर लेगी।
