डीजल में इथेनॉल का प्रयोग फेल

नई दिल्ली: डीजल में इथेनॉल मिलाने का प्रयोग सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतर पाया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को संसद में बताया कि डीजल में इथेनॉल मिलाने से ईंधन का फ्लैश पॉइंट काफी कम हो गया, जिसके कारण यह तय सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं कर सका।

सुरेश गोपी ने संसद में लिखित जवाब में बताया कि सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटरों के जरिए डीजल में इथेनॉल ब्लेंडिंग का वैज्ञानिक परीक्षण किया। इन परीक्षणों में मान्यता प्राप्त लैब और वाहन बनाने वाली कंपनियों ने भी सहयोग किया। जांच में पाया गया कि इथेनॉल मिलाने के बाद डीजल का फ्लैश पॉइंट तय सीमा से काफी नीचे चला गया। इसलिए इथेनॉल-ब्लेंडेड डीजल जरूरी सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरा।

संसद में यह भी पूछा गया कि क्या डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिलाया जा रहा है। इस पर मंत्री ने साफ किया कि फिलहाल डीजल में आइसोब्यूटेनॉल की ब्लेंडिंग नहीं की जा रही है।सरकार ने पेट्रोल में मौजूदा 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य से आगे बढ़ाने का अभी कोई फैसला नहीं किया है। मंत्री के मुताबिक, आगे ब्लेंडिंग बढ़ाने पर विस्तृत वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन के बाद विचार किया जाएगा। इसमें वाहन कंपनियों, तेल कंपनियों और रिसर्च संस्थानों से सलाह भी ली जाएगी।

सरकारी तेल कंपनियों ने सितंबर 2025 में 2025-26 के इथेनॉल सप्लाई ईयर के लिए करीब 10.5 अरब लीटर इथेनॉल खरीदने का पहला टेंडर जारी किया था। इसके लिए करीब 17.6 अरब लीटर की पेशकश मिली, जो मांगी गई मात्रा से लगभग 68% अधिक थी। इसके बाद 378 रजिस्टर्ड सप्लायर्स को कुल 10.485 अरब लीटर इथेनॉल आवंटित किया गया।सरकार इथेनॉल को खाना पकाने के ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर भी काम कर रही है। इससे एलपीजी के आयात पर निर्भरता कम करने और देश में उपलब्ध अतिरिक्त इथेनॉल उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *