काठमांडू: नेपाल में आई भयानक बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 586 हो गई, जबकि दो हजार से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए गए हैं. जिनमें से 320 भारतीय नागरिक है. फिलहाल प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी है. लापता लोगों को ढूंढने के लिए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर आई त्रासदी में कई गांवों के बह जाने से 2,400 से अधिक लोग लापता हैं और अब तक 586 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. द हिमालयन टाइम्स के मुताबिक, लापता लोगों में 644 विदेशी नागरिक शामिल हैं.नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने शुक्रवार शाम 7 बजे को बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए 15,431 सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है, जिसमें नेपाल आर्मी के 6,755 लोग, नेपाल पुलिस के 4,473 लोग और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 4,203 लोग शामिल हैं.
NDRRMA के मुताबिक, चितवन में सबसे अधिक 233 शव मिलें, इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 154, गोरखा में 46, धाडिंग में 40, नुवाकोट में 37, तनहुन में 30, नवलपरासी वेस्ट में 27 और रसुवा में 12 शव मिले. लापता 1,924 लोगों में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के कर्मी, विदेशी नागरिक, आम लोग और सुरक्षा और सरकारी कर्मचारी शामिल हैं. अकेले हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स के 933 कर्मी लापता बताए गए हैं, जबकि 517 विदेशी नागरिकों का अभी तक कोई पता नहीं चला है. NDRRMA के मुताबिक, लापता लोगों की सूची में नेपाल आर्मी के 45 लोग, नेपाल पुलिस के 28 लोग, आर्म्ड पुलिस फोर्स के 13 लोग, कस्टम ऑफिस के 15 लोग और इमिग्रेशन ऑफिस के 15 लोग शामिल हैं, जबकि लांगटांग नेशनल पार्क से भी तीन लोगों के लापता होने की खबर है.
रेस्क्यू टीमों ने अब तक 4,451 लोगों को सुरक्षित निकाला है, जिसमें शुक्रवार को हाइड्रोइलेक्ट्रिक टनल से बचाए गए 191 लोग और हवाई रास्ते से निकाले गए 517 लोग शामिल हैं. 129 विदेशी नागरिकों को भी बचाया गया हैनेपाल में कास्की के मुख्य जिला अधिकारी कुमन सिंह गुरुंग ने का, “कास्की के हॉस्पिटल की कुल क्षमता 88 है. हमें तनहुन, नवलपरासी ईस्ट और धाडिंग से शव मिल रहे हैं. कुल मिलाकर, हमारे पास 47 शव आ चुके हैं. अभी और शव मिल रहे हैं, और अज्ञात शवों के लंबे समय तक स्टोर होने से हालात और मुश्किल हो सकते हैं. अधिकारी ‘अज्ञात और लावारिस शवों के प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश, 2021’ के तहत शवों को मैनेज कर रहे हैं, जिसके तहत जिला पुलिस प्रमुख के नेतृत्व वाली एक कमेटी शवों को मैनेज करने के लिए जिम्मेदार है.”
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि नेपाल में बाढ़ के बाद असम के 12 लोगों का अभी तक पता नहीं चला है. उन्होंने शुक्रवार को कहा कि राज्य के 12 लोगों का विवरण मिल गया है, जो अभी तक नेपाल में लापता हैं. उनसे संपर्क करने और भयानक बाढ़ के बाद उन्हें सुरक्षित बचाने की कोशिशें जारी हैं. सरमा ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अधिकारी 12 लोगों से बातचीत करने और उनके ठिकाने का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि नेपाल में बाढ़ के बाद लापता हुए लोगों की एक लिस्ट भी साझा की, जिसमें उनके नाम और डिटेल्स हैं. ये लोग राज्य के कई हिस्सों से हैं, जिनमें कार्बी आंगलोंग, गोलाघाट, होजई, कामरूप मेट्रोपॉलिटन और नलबाड़ी शामिल हैं.दो दिन पहले चीन-नेपाल सीमा के पास के इलाकों में आई भयानक बाढ़ के बाद लापता ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्रियों के ग्रुप के बारे में कोई अपडेट नहीं है. ग्रुप की कोऑर्डिनेटर ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव (सद्गुरु) के संगठन ईशा फाउंडेशन के नेतृत्व में 77 सदस्यों के ग्रुप से अभी भी संपर्क नहीं हो पाया है.
ग्रुप की एक कोऑर्डिनेटर मा गंभीरी (Maa Gambhiri) ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि सद्गुरु मदद के लिए ग्यिरोंग जाना चाहते थे, जो आपदा की मुख्य जगह है, लेकिन उन्हें मंजूरी नहीं मिली. उन्होंने कहा कि उनके साथ 19 देशों के लोग थे और उन्होंने भारत, चीन और नेपाल में हर दूतावास से संपर्क किया ताकि उन्हें हर तरह की मदद मिल सके. उन्होंने कहा कि सद्गुरु ने कोई भी जानकारी और मदद पाने के लिए भारत और नेपाल में अलग-अलग ऑफिस और मंत्रालयों से भी संपर्क किया.उन्होंने कहा, “पिछले दो दिनों से ईशा फाउंडेशन के 77 लापता तीर्थयात्रियों के बारे में कोई अपडेट नहीं है. बचाव दल मौके पर हैं, लेकिन अभी तक कोई जानकारी नहीं है.”
नेपाल में भयानक बाढ़ पर NDMA के पूर्व सलाहकार सफी अहसान रिजवी ने कहा, “ग्लेशियल पिघलना एक सच्चाई है, और हिमालय की झीलों से लाखों क्यूबिक मीटर पानी बहकर आ सकता है.”नेपाल और तिब्बत में आई भयानक बाढ़ की वजह से कई भारतीय फंसे हुए हैं. इस त्रासदी के बाद से बंगाल के 37 लोग लापता हैं. राज्य सरकार उन्हें ढूंढने के लिए एक विशेषज्ञ टीम भेजने की तैयारी में है. प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, बंगाल के पर्यटक कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान कोसी नदी के पास फंसे हुए थे.
लापता लोगों के परिवार वाले अपनों से संपर्क टूटने की वजह से काफी परेशान हैं. राज्य प्रशानस के अधिकारियों ने शुक्रवार को उनके साथ एक लंबी मीटिंग की. इसके बाद, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया कि सरकार लापता लोगों को सुरक्षित वापस लाने की पूरी कोशिश कर रही है. दो लोगों का पता चल गया है, और राज्य ने बाकी 37 लोगों की तलाश के लिए काठमांडू में एक स्पेशल टीम भेजने का फैसला किया है.
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार रात करीब 8 बजे लापता लोगों के परिवारों से मुलाकात की. इस दौरान आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे. बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने कहा कि शुरुआती रिपोर्ट में राज्य के 32 लोगों के लापता होने का पता चला था, लेकिन बाद में पता चला कि कुल 39 लोग लापता हैं. हालांकि, एक अच्छी खबर यह है कि पोद्दार परिवार के दो सदस्य मिल गए हैं; वे अभी बीरगंज के पास सुरक्षित और स्वस्थ हैं, और उन्हें ट्रेन से राज्य वापस लाने का इंतजाम किया जा रहा है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भयंकर बाढ़ में अभी भी 320 भारतीय या तो लापता हैं या उनसे संपर्क नहीं हो पाया है. उन्होंने बताया कि 84 भारतीयों को बचाया गया है, जिनमें 21 तमिलनाडु के हैं और 63 लोग त्रिशूली-I प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे. उन्होंने बताया कि चीन में करीब 400 लोग सुरक्षित हैं, दूतावास उनके संपर्क में है और उन्हें वहां से निकालने की प्रक्रिया जारी है.
